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देश की इन महिला सरपंचों ने लाखों रुपये की नौकरी छोड़ गांव को दिखाई तरक्की की राह

कैच ब्यूरो | Updated on: 8 March 2019, 13:39 IST

दुनियाभर में आज यानि 8 मार्च को अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस मनाया जा रहा है. ये दिन दुनियाभर की महिलाओं के अधिकारों, उन्हें जागरुक करने का दिन है. आज हम आपको देश की ऐसी ही कुछ महिलाओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिन्होंने लाखों रुपये की नौकरी छोड़कर अपने गांव की सेवा करने की हिम्मत दिखाई.

यही नहीं उन्होंने गांव का सरपंच बनने का बाद अपने गांव को बुलंदियों तक पहुंचा जिसे गांव के पुरुष सरपंच भी नहीं पहुंचा पाए. देश की ये महिला सरपंच कोई अनपढ़ या कम पड़ी लिखी नहीं हैं. बल्कि इनमें से कुछ ने तो विदेशों में दुनिया की टॉप यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की है. तो किसी ने देश में अच्छी यूनिवर्सिटी या कॉलेज से शिक्षा हासिल की है. इन महिला सरपंचों ने देश में ही नहीं बल्कि विदेशों में भी भारत का नाम रोशन किया है.

छवि राजावत साल 2010 में सोडा गांव की पहली बार सरपंच चुनी गई. छवि ने अपने गांव सोडा में चंद दिनों में ही वो सबकुछ कर दिखाया जो आजादी के बाद से नहीं हुआ था. राजस्थान का ये गांव विकास से कोसों दूर था, लेकिन छवि के सरपंच बनते ही इस गांव की तकदीर पलट गई और ये गांव बिजली, पानी, स्कूल और इंटरनेट जैसे साधनों से भी जुड़ गयाछवि ने पुणे से एमबीए करने के बाद छवि भारती-टेली वेंचर्स में सीनियर मैनेजमेंट की नौकरी कर रही थीं. उन्हें सालाना कई लाख रुपये का पैकेज मिलता था.

छवि अपने गांव की पहली ऐसी सरपंच हैं जो सूरज के ढलते ही गांव में भ्रमण के लिए निकल पड़ती हैं. छवि ने भारत की सबसे कम उम्र की महिला सरपंच बनने का भी रिकॉर्ड बनाया. उनके द्वारा गांव में किए गए विकास कार्यों के लिए संयुक्त राष्ट्र संघ ने भी उन्हें बुलावा भेजा. जहां उन्होंने गांव के विकास की पूरी कहानी बताई थी. छवि का गांव राजस्थान की राजधानी जयपुर से 60 किलोमीटर दूर है. उनके दादा रघुवीर सिंह भारतीय सेना में ब्रिगेडियर थे और उन्हें महावीर चक्र से सम्मानित किया गया था.

Chhavi Rajawat

छवि की प्रारंभिक शिक्षा जयपुर में हुई उसके बाद वह दिल्ली आईं और लेडी श्रीराम कॉलेज में स्नातक में दाखिला लिया. स्नातक की पढ़ाई पूरी करने के बाद उन्होंने पुणे स्थित ‘इंडियन इंस्टिट्यूट ऑफ़ मॉडर्न मैनेजमेंट’ से एमबीए किया. एमबीए में उन्होंने परीक्षा में सबसे अधिक अंक हासिल किए थे. इसके बाद उन्हें विभिन्न बहुराष्ट्रीय कंपनियों से नौकरी के प्रस्ताव आने लगे. उसके बाद उन्होंने टाइम्स ऑफ़ इंडिया में नौकरी करनी शुरू की.

Bhakti Sharma

भक्ति शर्मा, सरपंच- बड़खेड़ी अबदुल्ला पंचायत, मध्यप्रदेश

भक्ति शर्मा मध्यप्रदेश की राजधानी भोपाल के पास बड़खेड़ी अबदुल्ला पंचायत की सरपंच हैं. उन्होंने अमेरिका के टेक्सास शहर में अच्छी नौकरी छोड़कर अपने गांव में विकास की गंगा बहाई. भक्ति शर्मा ने गांव की सरपंच बनने के बाद अपने गांव की तस्वीर बदल दी है. सरपंच भक्ति शर्मा का नाम देश की 100 लोकप्रिय महिलाओं में शामिल है. अमेरिका से उच्च शिक्षा प्राप्त करने वाली भक्ति शर्मा फर्राटेदार अंग्रेजी में बात करती हैं और निडर होकर अधिकारियों से मिलती हैं.

उनकी ये कोशिश रहती हैं कि हर सरकारी योजना का लाभ इनके पंचायत के लोगों को मिल सके. उनके गांव की आबादी 2700 है. उनके सरपंच बनने के बाद गांव में स्ट्रीट लाइट, आदर्श आंगनबाड़ी केन्द्र के साथ सभी घरों में शौचालय का निर्माण हुआ है. भक्ति शर्मा कहती हैं कि गांव के सभी किसानों को मुआवजा मिला है, ग्रामीणों का राशनकार्ड, बैंक एकाउंट, मृदा स्वास्थ्य कार्ड बना है, इसके साथ ही हर महीने गांव में दो से तीन बार मुफ्त में स्वास्थ्य की जांच की जाती है.

यही नहीं भक्ति ने सरपंच बनने के बाद सबसे जरूरी काम बेटी के जन्म पर 10 पौधे लगाने का शुरु किया. साथ ही वो मां बनने वाली महिला को अपनी दो महीने की तनख्वाह भी देती हैं. उनके गांव में पहले साल 12 बेटियां पैदा हुई, मां अच्छे से अपना खानपान कर सके इसलिए अपनी यानि सरपंच की तनख्वाह ‘सरपंच मानदेय’ के नाम से शुरू की.

युक्ति चौधरी, सरपंच- फतेहाबाद, हरियाणा, वार्ड मेंबर- फतेहाबाद जिला परिषद

युक्ति चौधरी हरियाणा के फतेहाबाद की सरपंच रहीं. उसके बाद वो फतेहाबाद से ही जिला परिषद की वार्ड मेंबर चुनी गईं. युक्ति चौधरी ने हावर्ड यूनिवर्सिटी से पढ़ाई की. लेकिन गांव के विकास के लिए वतन वापस आ गई और सरपंच बनकर गांववालों की सेवा करने लगीं. युक्ति ने अपने गांव में विकास की गंगा बहा दी.

हावर्ड जाने से पहले युक्ति ने दिल्ली के सेंट स्टीफन्स कॉलेज से इंग्लिश ऑनर्स से ग्रैजुएशन किया. उसके बाद दिल्ली यूनिवर्सिटी से ही एलएलबी की पढ़ाई पूरी की. यही नहीं युक्ति ने इंटरनेशनल ह्यूमन राइट्स में एलएलएम की पढ़ाई भी की है.

Shahnaz Khan

शाहनाज खान, सरपंच- कमां पंचायत, भरतपुर, राजस्थान

शाहनाज खान राजस्थान के भरतपुर जिले के कमां पंचायत की सरपंच हैं. 25 साल की शाहनाज साल 2018 में गांव की सरपंच चुनी गईं. उन्होंने एमबीबीएस की पढ़ाई की है. शाहनाज को राजनीतिक पृष्टभूमि विरासत में मिली है. उनसे पहले शाहनाज के दादा यहां के सरपंच रहे. लेकिन किसी वजह से गांव से सरपंच का चुनाव निरस्त कर दिया. उसके बाद शहनाज को गांव का सरपंच चुना गया.

शाहनाज बताती हैं कि वह राजनीति में आने का इरादा तो रखती थीं लेकिन इतनी जल्दी वह राजनीति में आएंगी उन्होंने सोचा नहीं था. वह बताती हैं, “मुझसे पहले मेरे दादाजी भी यहां से सरपंच थे. लेकिन कोर्ट ने चुनाव खारिज़ कर दिया. उसके बाद से ही चुनाव में घर से कौन खड़ा होगा, इसकी चर्चा शुरू हुई.”

शाहनाज की मां राजस्थान से विधायक, मंत्री और संसदीय सचिव रही हैं. शहनाज परिवार की चौथी पीढ़ी हैं, जो राजनीति में जा रही हैं. शाहनाज बताती हैं कि उनके सरपंच बनने के बाद से गांव में लड़कियों की शिक्षा के प्रति रूझान बढ़ेगा. वह बताती हैं कि उनकी मां गांव की प्रधान रहते हुए पर्दा प्रथा को खत्म किया था और अपनी बेटी को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया था.”

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First published: 6 March 2019, 16:11 IST
 
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