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फिरोज की फोटोग्राफी में दिखता है दिल्ली का मिजाज

लमट र हसन | Updated on: 28 May 2016, 14:47 IST
(आसिफ फिरोज)
QUICK PILL
  • फोटोग्राफर अहमद फिरोज ने अपने फोटो में दिल्ली के मिजाज को पकड़ने की कोशिश की है. फिरोज के कैमरे में कैद दिल्ली में आपको शहर के मिजाज की झलक दिखाई देगी.
  • दिल्ली केवल वैसी जगह नहीं है जहां ऐतिहासिक इमारतें और मस्जिदें हैं बल्कि यह बेहद गहमागहमी से  भरा शहर है जहां आधुनिकता का पारंपरिकता से संगम होता है.
  • फिरोज के मुताबिक विडंबना यह है कि फोटोग्राफी की जगह सिकुड़ती जा रही है. फोटो की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है और साथ ही पहले खींच कर उसे प्रकाशित करने की होड़ बढ़ गई हैं.
  • क्या आपको दिल्ली आकर्षक लगता है या फिर आप इसे मूडी शहर कहेंगे? फोटोग्राफर अहमद फिरोज ने अपने फोटो में दिल्ली के मिजाज को पकड़ने की कोशिश की है. फिरोज के कैमरे में कैद दिल्ली में आपको शहर के मिजाज की झलक दिखाई देगी.

    दुनिया बैकस्टेज और ऑनस्टेज में विभाजित हो चुकी है. पर्दे के पीछे की दुनिया यानी बैकस्टेज में कई सारी भाव भंगिमाएं होती है जिसे वह बाहर लेकर आते हैं. उनके भविष्य को लेकर सवालिया निशान हैं. जबकि सामने की दुनिया वह है जहां भविष्य की संभावनाएं खुलती हैं. यह मंच अभिनेता की किस्मत तय करता है. 

    इन्हीं भाव भंगिमाओं ने फिरोज को रोमांचित किया और उन्होंने इसे अपने कैमरे में कैद करने की कोशिश की. फिरोज बताते हैं, 'पर्दे के पीछे की दुनिया बेहद संवेदनशील होती है और कलाकारों के लिए यह बेहद तनाव भरा क्षण होता है. इसकी बड़ी वजह यह होती है कि वह जो दिखाना चाहते हैं वह सामान्य तौर पर होता नहीं है.'

    केवल दिल्ली

    फिरोज की तस्वीरों में दिल्ली की ऐतिहासिक पृष्ठभूमि को बैकग्राउंड बनाया गया है. यह ऐसी पृष्ठभूमि है जिससे हम बेहद परिचित हैं.

    यही वजह है कि फिरोज की तस्वीरें आनंद देती है क्योंकि इसमें दिल्ली को कई अलग-अलग आयामों से दिखा गया है. दिल्ली केवल वैसी जगह नहीं है जहां ऐतिहासिक इमारतें और मस्जिदें हैं बल्कि यह बेहद गहमागहमी से  भरा शहर है जहां आधुनिकता का पारंपरिकता से संगम होता है.

    तस्वीर: आसिफ फिरोज

    फिरोज शहर के रहस्यों को भी बताते हैं. जो इसकी आत्मा है. उन्होंने अपनी तस्वीरों में ऊर्जा, रंग, आकर्षक और दिल्ली के मिजाज को शामिल किया है. जाहिर तौर पर उन्होंने इस दौरान पर्दे के पीछे की दुनिया को सामने के मंच से मिलाने की कोशिश की है.

    कुछ तस्वीरें एब्सट्रैक्ट हैं. वैसी तस्वीरें जिनकी व्याख्या देखने वाला अपने मुताबिक कर सकता है. उन्होंने कई गंभीर रंगों का इस्तेमाल किया है. मसलन लाल रंग उनकी तस्वीरों की पहचान है.

    फ्रेम दर फ्रेम

    फिरोज ने दुनिया भर की तस्वीरें खींची हैं. वह इससे पहले एक या दो मौकों पर इन तस्वीरों का प्रदर्शन भी कर चुके हैं. लेकिन इस बार की प्रदर्शनी उनके अपने शहर दिल्ली पर है. 

    फिरोज ने कहा, 'करीब 80 फीसदी से अधिक खींची गई तस्वीरें दिल्ली के बाहर की हैं. लेकिन इस बार मैंने दिल्ली के मिजाज को पकड़ने की कोशिश की है.'

    तस्वीर: आसिफ फिरोज

    फिरोज के लिए कोई तस्वीर बेहद खास नहीं है क्योंकि उन्हें सभी तस्वीरों से एकसमान लगाव है. वह बताते हैं, 'हर तस्वीर की अपनी कहानी है.'

    फिरोज अर्थशास्त्री हैं. इसलिए फोटोग्राफी से उनका घर नहीं चलता है. यही वजह है कि एक प्रोफेशनल फोटोग्राफर की जिंदगी में आने वाली तमाम दुश्वारियों से मुक्त हैं. वह अपने शौक को आसानी से पूरा कर लेते हैं. तस्वीरों के लिए वह सब्जेक्ट चुनते हैं और फिर जैसे चाहे उसे क्लिक करते हैं.

    कुछ तस्वीरें एब्सट्रैक्ट हैं. वैसी तस्वीरें जिनकी व्याख्या देखने वाला अपने मुताबिक कर सकता है

    फिरोज ने कहा, 'हर तरफ कैमरा है. चाहे वह डीएसएलआर प्रोफेशनल कैमरा हो या फिर सेलफोन में लगा कैमरा. हर दिन करीब करोड़ों फोटो खींची जाती हैं. हर दिन डॉक्यूमेंटेशन होता है.'

    हालांकि विडंबना यह है कि फोटोग्राफी की जगह सिकुड़ती जा रही है. फोटो की गुणवत्ता में गिरावट आ रही है और साथ ही पहले खींच कर उसे प्रकाशित करने की होड़ बढ़ गई हैं. उन्होंने कहा, 'फोटोग्राफर को एक परफेक्ट शॉट लेने के लिए लंबा इंतजार करना पड़ता है.'

    चाहे वह कथकली नृत्यांगना की तस्वीर ही क्यों न हो जो शो के पहले पर्दे के पीछे बेहद तनाव में होती है. या फिर कलबालिया डांसर्स जो प्रदर्शन के दौरान भीड़ की ऊर्जा से उत्साहित होते हैं. फिरोज ने इन सभी फ्रेम को अपने कैमरे में कैद किया है.

    उनकी जबरदस्त तस्वीरों में एक तस्वीर पश्चिमी भारत के एक ग्रामीण महिला की है जिसके पीछे कुतुब मीनार है. फिरोज ने जानबूझकर इस तस्वीर में उसके मिजाज को प्रमुखता दी. फोटो को देखकर ऐसा लगता है कि यह एक पेंटिंग है. एक और तस्वीर है जिसमें एक दूसरी नृत्यांगना है और वह आनंदातिरेक से लबालब है.

    दिल्ली पर खींची गई उनकी सबसे शानदार तस्वीर वह है जिसमें एक रिक्शा वाला पुराने दिल्लीवाले से सौदेबाजी कर रहा है और वह गाना गाने में व्यस्त है. यह फिरोज की पहचान है. 

    First published: 28 May 2016, 14:47 IST
     
    लमट र हसन @LamatAyub

    Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.