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मुग़ल बादशाह अकबर ने कराया था महाभारत का फारसी अनुवाद

लमट र हसन | Updated on: 28 March 2016, 9:06 IST

मुगल बादशाह अक़बर ने 1580 में संस्कृत के क्लासिक महाभारत का फारसी में अनुवाद कराया था. इतिहासकार ऑड्री ट्रश ने अपनी किताब 'कल्चर ऑफ एनकाउंटर्सः संस्कृति एट द मुग़ल कोर्ट' में ये जानकारी दी है.

इस अनुवाद का नाम फ़िरदौसी रचित फ़ारसी क्लासिक शाहनामा की तर्ज पर रज़्मनामा(युद्ध की कहानी) रखा गया.

अकबर ने अपने साहित्यिक रत्नों फैज़ी और अबुल फ़ज़ल को इस अनुवाद की निगरानी का जिम्मा सौंपा.

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आड्री के अनुसार रज़्मनामा शहजादों की तालीम का अनिवार्य हिस्सा हुआ करता था. दुनिया के सबसे बड़े महाकाव्य के रूप में विख्यात महाभारत का अनुवाद कराना आसान नहीं था.

अनुवाद की मुश्किलें


महाभारत के अनुवाद के लिए बिल्कुल नई तकनीकी का प्रयोग किया गया. ऑड्री के अनुसार अनुवाद में सैकड़ों संस्कृत शब्दों को हूबहू फ़ारसी लिप्यंतरण के साथ प्रयोग किया गया. अनुवाद में फारसी कविता का भी प्रयोग किया गया था.

अकबर ने महाभारत के अनुवाद की निगरानी अपने साहित्यिक रत्नों फैज़ी और अबु अल-फ़ज़ल को सौंपी थी

अनुवाद के दौरान सबसे बड़ी मुश्किल धार्मिक मतभेद की थी. इस्लाम एकेश्वरवादी धर्म है जबकि हिंदू धर्म बहुुदेववादी है.

ऑड्री लिखती हैं, "इस तकनीकी से मुस्लिम समाज के लिए वो संस्कृत महाकाव्य को उसकी धार्मिक बारिकियों के साथ प्रस्तुत करने में सफल रहे."

ऑड्री इस तकनीकी का उदाहरण देते हुए लिखती हैं, "..रज़्मनामा की शुरुआत में ब्रह्मा की जगह खुदावंद का प्रयोग किया गया है."

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उनके अनुसार रज्मनामा में लिखा है, "जब सूतपुराणिक (कथावाचक) को पता चला कि शौनक और दूसरे लोग ये कथा सुनना चाहते हैं तो उन्होंने कथा सुनानी शुरू की. उन्होंने पहले खुदा को याद करते हुए और उसकी महिमा बताते कहा, जल्ला जलालहू वा अम्मा नवालहु."

इस बदलाव का मक़सद हिंदू देवताओं का महत्व कम करना नहीं था बल्कि अनुवादक चाहते थे कि फारसी में इसे पढ़ने वाले जुड़ाव महसूस कर सकें.

ऑड्री बताती हैं कि नल और दमयंति की कथा को भी स्थानीय ढंग से पेश किया गया.

अपनी किताब के 'अकबर के फारसी महाभारत' अध्याय में ऑड्री लिखती हैं, "मुग़ल भगवद्गीता में दिए धार्मिक संदेश को लेकर असहज थे इसलिए उन्होंने उस हिस्से को छोटा करवाते हुए थोड़ा बदलाव भी कराया."

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मूल भगवद्गीता में क़रीब सात सौ श्लोक हैं लेकिन रज़्मनामा में इसे कुछ पन्नों में समेट दिया गया है.

ऑड्री मानती हैं कि भगवद्गीता में ये बदलाव एकेश्ववादी मुसलमानों को ध्यान में रखते हुए किया गया था.

अकबर अपने अनुवादक बदायूंनी के महाभारत के अनुवाद में कुछ जगहों पर इस्लामिक संदेश डालने से नाराज भी हुए थे.

अकबर ने महाभारत के अनुवाद के फारसी और संस्कृत विद्वानों के दो दल बनाए थे

किताब के अनुसार अकबर ने कहा, "हमें लगा था कि ये आदमी (बदायूंनी) नौजवान और सुफियों को मानने वाला है लेकिन वो इस्लामी शरियत का ऐसा कट्टर मानने वाला निकला कि उसकी कट्टरता को दुनिया की कोई तलवार नहीं काट सकती."

हालांकि बदायूंनी ने अकबर को जब समझाया कि उन्होंने असल श्लोक के संग कोई छेड़छाड़ नहीं की है तब वो मान गए.

दोनों भाषाओं के विद्वान


महाभारत का अनुवाद संस्कृत और फ़ारसी के विद्वानों ने मिलकर किया क्योंकि कोई भी विद्वान दोनों भाषाओं का समान रूप से आधिकारिक विद्वान नहीं था. इसलिए दोनों दलों ने मिलकर अंतिम अनुवाद तैयार किया.

फ़ारसी विद्वानों का नेतृत्व नक़ीब ख़ान कर रहे थे. मुल्ला शीरी, सुल्तान थानीसरी और बदायूंनी उनके सहयोगी थे.

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संस्कृति के विद्वानों में देव मिश्रा, सतावधान, मधुसूदन मिश्रा, चतुर्भुज और शायख भावन शामिल थे.

ऑड्री लिखती हैं, "ब्राह्मण ने मुगलों को एक साझी भाषा में बोलकर बताया, नक़ीब ख़ान उस भाषा को हिन्दी कहते हैं. जो हिन्दी का प्राचीन रूप (हिन्दवी) रही होगी."

संस्कृत मूल शब्द


फ़ारसी या अरबी में समानार्थक शब्दों के मौजूद होने के बावजूद अनुवाद में कई संस्कृत शब्दों को हूूबहू रखा गया.

ऑड्री उदाहरण देते हुए कहती हैं, "नरक की जगह आसानी से दोज़ख, पुराण की जगह तारीख़ का प्रयोग हो सकता था लेकिन फ़ारसी में मूल शब्दों का प्रयोग किया गया."

अभी हाल में सोशल मीडिया पर भारतीय इतिहास से मुग़लों की निकालने की मांग वायरल हो गयी थी. जबकि मुग़ल बादशाह अकबर भारतीय इतिहास के महान ग्रंथों से इस्लामी जगत को परिचित कराना चाहते थे. महाभारत के अलावा उन्होंने रामायण का भी फ़ारसी में अनुवाद कराया था.

First published: 28 March 2016, 9:06 IST
 
लमट र हसन @LamatAyub

Bats for the four-legged, can't stand most on two. Forced to venture into the world of homo sapiens to manage uninterrupted companionship of 16 cats, 2 dogs and counting... Can read books and paint pots and pay bills by being journalist.

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