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यहां दिखती है भाईचारे की मिशाल, मुस्लिम भी मनाते हैं बसंत पंचमी का त्योहार

कैच ब्यूरो | Updated on: 22 January 2018, 18:20 IST

बसंत पंचमी का त्योहार पूरे देश में हर्षोल्लास के साथ मनाया जाता है. वैसे बसंत पंचमी को हिन्दू धर्म के लोग ही मनाते हैं. मगर भाईचारे की मिशाल वाले हमारे देश में एक ऐसी भी जगह है जहां मुस्लिम समुदाय के लोग भी बसंत पंचमी के त्योहार को मनाते हैं.

मुस्लिम कहां मनाते हैं बसंत पंचमी-

दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में हिन्दू ही नहीं बल्कि मुस्लिम धर्म के लोग भी बसंत पंचमी का त्योहार मनाते हैं. यहां स्थिति हजरत निजामुद्दीन औलिया की दरगाह पर हर साल बसंत पंचमी का त्योहार मनाया जाता है. बसंत पंचमी पर यहां हरे रंग की चादर ही नहीं बल्कि पीले फूलों की चादर भी चढ़ाई जाती है और बसंत के गाने गाए जाते हैं.

यहां क्यों मनाते हैं मुस्लिम बसंत पंचमी-

कहा जाता है संत हजरत निजामुद्दीन औलिया अपने भांजे तकीउद्दीन नूह को बहुत प्यार करते थे. किसी बीमारी की वजह से उनकी मौत हो गई. इसलिए हजरत निजामुद्दीन बहुत दुखी रहने लगे. वो ना किसी से बात करते थे और ना ही हंसते थे. अमीर खुसरो उनके सबसे अच्छे शिष्य थे. हजरत निजामुद्दीन औलिया की ये मायूसी अमीर खुसरो से देखी नहीं जाती थी. उन्होंने हजरत निजामुद्दीन को खुश करने और हंसाने की लाख कोशिशें कीं लेकिन वे कामयाब नहीं हुए.

बसंत के दिन हजरत निजामुद्दीन को हंसाने में कामयाब हुए थे खुसरो-

ये बसंत के दिन थे. अमीर खुसरो ने कई महिलाओं को पीले रंग की साड़ी और हाथों में गेंदे के पीले फूल लिये देखा. सभी औरतें गाना गा रही थी और खुशियां मना रही थी. पीले कपड़ों में औरतें खेतों में सरसों के फूलों की मानिंद दिखाई दे रही थी. औरतों के पीले कपड़े और हाथों पीले फूल देखकर खुसरो को एक विचार आया कि अपने गुरु हजरत निजामुद्दीन को इसी तरह से खुश किया जाए

जब अमीर खुसरो ने पहनी पीली साड़ी-

अमीर खुसरो अपने गुरु निजामुद्दीन औलिया को बहुत प्यार किया करते थे. वो उनके लिए कुछ भी कर सकते थे. इसीलिए उन्होंने एक पीले रंग का घाघरा और दुपट्टा पहना, गले में ढोलक डाली और हाथों में पीले फूल लेकर बसंत के गाने गाने लगे.

खुसरो को इस वेश में देख हजरत निजामुद्दीन अपनी हंसी नहीं रोक सके. इसी दिन को याद कर आज भी हजरत निजामुद्दीन की दरगाह पर हर साल बसंत पंचमी मनाई जाती है और पीले फूलों की चादर चढ़ाई जाती है.

First published: 22 January 2018, 18:19 IST
 
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