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Navratri 2020: नवरात्रि पर कलश स्थापित करना होता है बेहद शुभ, जल भरकर रखने और जौ बोने का है खास महत्व

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 October 2020, 9:54 IST

Navratri 2020: हिंदू सनातन धर्म में कलश स्थापना का खास महत्व माना गया है. इसलिए शुभ कामों में कलश पूजन किया जाता है. शारदीय नवरात्रि 17 अक्टूबर से शुरू होने वाली है. इसमें भक्तगण मां के नौ स्वरुपों की चौकी सजाकर पूजा करते हैं.नवरात्रि के पहले दिन पूजा के साथ-साथ घटस्थापना करने का प्रावधान है. मां की चौकी लगाते वक्त घटस्थापना जरूर की जाती है.

जिसके लिए मिट्टी का कुंभ, तांबे या फिर चांदी का लोटा लिया जाता है. इसके बाद उसके ऊपर स्वास्तिक का चिह्म बनाया जाता है और नारियल स्थापित किया जाता है. विधि-विधान के साथ पूजन करके कलश स्थापित किया जाता है. आज हम आपको बताने जा रहे हैं कि आखिर नवरात्रि में कलश की स्थापना क्यों की जाती है और इसमें नारियल लगाने का क्या महत्व है. इसी के साथ मिट्टी में जौ बोने के पीछे भी क्या कारण है.


कलश मध्य स्थान से गोलाकार और मुख छोटा होता है. मान्यताओं के मुताबिक कहा जाता है कि कलश के मुख में विष्णु, कंठ में महेश और मूल में ब्रह्मा जी का स्थान माना गया है. कलश के मध्य का स्थान मातृशक्तियों का स्थान माना गया है. कलश को तीर्थों का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है. विशेष तौर पर देखें तो देवताओं की एक जगह आवाह्म किया जाता है.

इसके अलावा शास्त्रों में खाली कुंभ को अशुभ माना जाता है. जिसके चलते कलश में हमेशा जल भरकर रखा जाता है. भरे हुए कलश को संपन्नता का प्रतीक भी माना जाता है. ऐसा करने से घर में संपन्नता आती है.

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इस दौरान ध्यान रखें कि कलश स्थापित करते वक्त कलश के जल में दुर्वा, सुपारी और अक्षत आदि डाले जाते हैं. इसी के साथ इसके ऊपर आम के पत्ते भी लगाए जाते हैं. जिसका कारण है कि दुर्वा में संजीवनी के गुण, सुपारी जैसे स्थिरता के गुण, पुष्प के उमंग और उल्लास के गुण आदि हमारे अंदर समाहित हो जाएं.

इसके अलावा कलश के ऊपर लाल रंग के कपड़े में नारियल लपेटकर रखा जाता है. नारियल को गणेश जी का प्रतीक मानकर पूजा की जाती है. जिस तरह से सभी कामों में गणेश जी का पूजन किया है उसी तरह से पूजा में सबसे पहले कलश पूजन होता है. ऐसा करने से पूजा पूर्ण मानी जाती है.

इसके अलावा नवरात्रि में कलश स्थापना करते वक्त जौ भी जरूर बोए जाते हैं. माना जाता है कि सृष्टि के निर्माण के बाद सबसे पहली फसल जौ थी इसलिए इसे पूर्ण फसल माना जाता है. इसके पीछे ये मान्यता है कि जौ को सुख-समृद्धि और संपन्नता का प्रतीक माना जाता है. ऐसा कहा जाता है कि यदि जौ तेजी के साथ बढ़ते हैं तो सुख-संपन्नता आती है.

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First published: 14 October 2020, 9:54 IST
 
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