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अब शायर गौहर रज़ा की शायरी को देशद्रोही करार दिया गया

निखिल कुमार वर्मा | Updated on: 10 March 2016, 15:16 IST

प्रतिष्ठित शंकर-शाद मुशायरे को भी अब देशभक्ति और देशद्रोह के विवाद में घसीटा जा रहा है. इस मुशायरे में जाने-माने वैज्ञानिक और शायर गौहर रजा की एक प्रस्तुति को निजी समाचार चैनल जी न्यूज़ ने अफ़ज़ल प्रेमी गैंग का मुशायरा बताया है. चैनल ने अपने प्राइम टाइम पर इससे जुड़ा एक कार्यक्रम दिखाया जिसमें गौहर रजा की शायरी को अफ़जल का समर्थक और देश का विरोधी बताया गया. चैनल के मुताबिक रजा की शायरी राष्ट्रविरोधी है.

बुधवार को जी न्यूज़ पर प्रसारित इस कार्यक्रम को चैनल के संपादक सुधीर चौधरी पेश कर रहे थे.

शंकर-शाद मुशायरा विश्व भर में उर्दू के सबसे बड़े और लोकप्रिय मुशायरों में से एक है. यह मुशायरा दो हिंदू शायरों सर शंकरलाल शंकर और लाला मुरलीधर शाद की याद में आयोजित किया जाता है. पांच मार्च को इसका 51वां आयोजन दिल्ली में किया गया था.

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चैलन पर इस कार्यक्रम के बाद गौहर रजा को धमकी भरे फोन आने लगे हैं. कैच से बातचीत में गौहर रजा ने कहा, 'जब से जी न्यूज़ ने यह कार्यक्रम प्रसारित किया है, तब से उन्हें धमकी भरे कॉल आने शुरू हो गए हैं. उन्हें अलगाववादी और देशद्रोही कहा जा रहा है. लोग गालियां भी बक रहे हैं.' रज़ा इस पूरे घटनाक्रम से परेशान हैं. उन्होंने बताया कि वे अफने वकीलों से इस मामले में कानूनी मशविरा कर रहे हैं ताकि आगे संबंधित चैनल पर कानूनी कार्रवाई की जा सके.

यह पूछने पर कि चैनल ने आपको निशाना क्यों बनाया, वे कहते हैं, 'चैनल जो दिखा रहा है उसमें कुछ भी आपत्तिजनक नहीं है. वे बीच से जानबूझकर एक हिस्सा काट कर दिखा रहे थे. यह मूल वीडियो से छेड़छाड़ का मामला है. यह चैनल अपनी टीआरपी के लिए मुझे इस तरह बदनाम कर रहा है. आप खुद वह वीडियो देख सकते हैं.'

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हम यहां शंकर-शाद मुसायरे का वह पूरा वीडियो और गौहर रजा द्वारा पढ़ी गई गज़ल पूरा दे रहे हैं. वीडियो देखने और शायरी पढ़कर कहीं से भी यह नहीं लगता है कि रजा ने कहीं अफजल का समर्थन किया है या देशविरोधी बात कही है. आपको बता दें कि गौहर रजा इससे पहले गुजरात दंगों पर एक डॉक्युमेंट्री फिल्म भी बना चुके हैं.

मुशायरे में गौहर रजा

पूरी ग़ज़ल

''धर्म में लिपटी वतन परस्ती क्या क्या स्वांग रचाएगी
मसली कलियाँ, झुलसा गुलशन, ज़र्द ख़िज़ाँ दिखलाएगी

यूरोप जिस वहशत से अब भी सहमा सहमा रहता है
खतरा है वह वहशत मेरे मुल्क में आग लगायेगी

जर्मन गैसकदों से अबतक खून की बदबू आती है
अंधी वतन परस्ती हम को उस रस्ते ले जायेगी

अंधे  कुएं में झूट की नाव तेज़ चली थी मान लिया
लेकिन बाहर रौशन दुनियां तुम से सच बुलवायेगी

नफ़रत में जो पले बढे हैं, नफ़रत में जो खेले हैं
नफ़रत देखो आगे आगे उनसे क्या करवायेगी

फनकारो से पूछ रहे हो क्यों लौटाए हैं सम्मान
पूछो, कितने चुप बैठे हैं, शर्म उन्हें कब आयेगी

यह मत खाओ, वह मत पहनो, इश्क़ तो बिलकुल करना मत
देश द्रोह की छाप तुम्हारे ऊपर भी लग जायेगी

यह मत भूलो अगली नस्लें रौशन शोला होती हैं
आग कुरेदोगे, चिंगारी दामन तक तो आएगी''

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इस पूरे प्रकरण पर रज़ा का कहना है कि उनकी विचारधारा सरकार के खिलाफ हो सकती है लेकिन चैनल उसे देश के खिलाफ प्रचारित कर रहा है. भारतीय लोकतंत्र में हर दल और हर व्यक्ति के पास अपनी विचारधारा फैलाने और अपनी बात कहने का अधिकार है.

लोकतंत्र में असहमति के सुरों को भी सुना जाता रहा है लेकिन पिछले कुछ दिनों में आवाज उठाने वालों को 'देशद्रोही' कहा जाने लगा है.

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इंदिरा गांधी के शासनकाल में रामधारी सिंह दिनकर और धूमिल जैसे बड़े कवियों ने खुलकर उनकी आलोचना में कविताएं लिखी थी. आज के माहौल में शायद उन लोगों को भी 'गद्दार' करार दिया जाता. गौहर रजा की शायरी में जो सरकार की आलोचना है उसे जी न्यूज़ देश के खिलाफ बता कर प्रचारित कर रहा है.

इससे पहले भी जवाहरलाल नेहरू युनिवर्सिटी (जेएनयू) विवाद में जी न्यूज़ पर कथित तौर पर छात्रसंघ अध्यक्ष कन्हैया कुमार के भाषण का फर्जी वीडियो चलाने का आरोप लग चुका है. दिल्ली सरकार फर्जी वीडियो चलाने वाले न्यूज चैनलों पर केस करने की तैयारी में है.

First published: 10 March 2016, 15:16 IST
 
निखिल कुमार वर्मा @nikhilbhusan

निखिल बिहार के कटिहार जिले के रहने वाले हैं. राजनीति और खेल पत्रकारिता की गहरी समझ रखते हैं. बनारस हिंदू विश्वविद्यालय से हिंदी में ग्रेजुएट और आईआईएमसी दिल्ली से पत्रकारिता में पीजी डिप्लोमा हैं. हिंदी पट्टी के जनआंदोलनों से भी जुड़े रहे हैं. मनमौजी और घुमक्कड़ स्वभाव के निखिल बेहतरीन खाना बनाने के भी शौकीन हैं.

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