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ये हैं दुनिया के वो 6 देश जहां महिलाओं और पुरुषों के लिए लागू हैं समान अधिकार

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 March 2019, 16:24 IST

पिछले दशक ने दुनिया भर में लैंगिक समानता के लिए कई जीत हासिल की गई है. भारत में बाल विवाह का अपराधीकरण हुआ, सऊदी अरब में महिलाओं को गाड़ी चलाने का कानूनी अधिकार मिला और सूरीनाम का "राष्ट्रीयता कानून" पलट दिया गया, जिससे महिलाएं अपने बच्चों को उसी देश के किसी व्यक्ति से शादी किए बिना ही नागरिकता दे सकती हैं. विश्व बैंक की हालिया रिपोर्ट के अनुसार, केवल छह देशों ने कानून के तहत सच्ची लैंगिक समानता हासिल की है.

रिपोर्ट में देखा गया कि आठ मामलों में महिलाओं के निर्णयों को कैसे प्रभावित किया जाता है. जिनमें यात्रा करने, नौकरी शुरू करने, शादी करने, बच्चे पैदा करने, व्यवसाय चलाने, भुगतान करने, संपत्ति का प्रबंधन और पेंशन प्राप्त करने की क्षमता शमिल हैं. इस मामले में 100 अंक हासिल करने वाले देशों को सर्वश्रेष्ठ माना जाता है लेकिन संयुक्त राज्य अमेरिका जाइए देशों ने भी इसमें 84 अंक हासिल किये. मध्य पूर्व और उत्तरी अफ्रीका में राष्ट्रों ने 47 औसत अनेक हासिल किये. एक नज़र डालें कि छह देशों - बेल्जियम, डेनमार्क, फ्रांस, लातविया, लक्समबर्ग और स्वीडन ने पिछले एक दशक में कानून के तहत समान अधिकार हासिल किए.

 

एक दशक पहले, किसी भी देश ने लैंगिक समानता के विश्व बैंक के आकलन पर एक सही स्कोर हासिल नहीं किया. फ्रांस ने पिछले दस वर्षों में लैंडमार्क नीतियों को पारित करके सबसे बड़ी प्रगति की है. 2018 में सरकार ने घरेलू हिंसा से निपटने के लिए पांच नए उपायों की शुरुआत की, जिसमें एक राष्ट्रीय हेल्पलाइन के लिए अतिरिक्त धन और एक ऑनलाइन प्लेटफॉर्म शामिल है जो हिंसा की रिपोर्ट करने की प्रक्रिया को सरल करता है.

लातविया की अधिकांश महिलाएं पूर्णकालिक वर्कर हैं.2015 में राष्ट्र ने एक समझौते पर हस्ताक्षर किए जो असामान्य अनुसूचियों वाले माता-पिता के लिए लचीली कार्य व्यवस्था प्रदान करता है (जैसे कि रात या सप्ताहांत पर काम करने वाले लोग). 2011 के एक कानून में स्थानीय सरकारों से यह भी कहा गया है कि वे सभी बच्चों को डेढ़ से पांच साल के बच्चों को स्कूल पूर्व शिक्षा के बराबर सुविधा प्रदान करें. अन्य यूरोपीय देशों की तरह, लातविया ने घरेलू हिंसा और मानव तस्करी को कम करने के लिए कई कदम उठाए हैं.

विश्व बैंक की रिपोर्ट में लक्समबर्ग में माता-पिता की छुट्टी नीति पर प्रकाश डाला गया है, जो दोनों माता-पिता को अपने बच्चे को छह साल का होने से पहले भुगतान की गई छुट्टी लेने की अनुमति देता है. (पूर्णकालिक कर्मचारियों को चार से छह महीने के लिए छुट्टी दी जाती है.) परिवार मामलों के मंत्रालय के डेटा में पाया गया कि लक्समबर्ग में सिर्फ 20% पिताओं ने 2014 में माता-पिता की छुट्टी ली.

First published: 5 March 2019, 16:12 IST
 
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