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क्योंकि हंसना जरूरी है: पाकिस्तान में ख़वातीनों का कॉमेडी ग्रुप 'द ख़वातून'

लमत आर हसन | Updated on: 7 February 2017, 8:14 IST
QUICK PILL
  • बहुतेरे लोगों को यह लगता है कि लड़कियां मजाकिया नहीं हो सकती. वह स्वीट और स्मार्ट हो सकती है लेकिन मजाकिया नहीं हो सकती. पाकिस्तान में द खवातून के नाम से बना लड़कियों का यह समूह इस धारणा को चुनौती दे रहा है.
  • कराची और लाहौर में दो-दो शो करने के बाद खवातून को पाकिस्तान का सबसे अधिक मजाकिया महिलाओं का समूह कहा जा रहा है. खवातून उर्दू के शब्द खवातीन से मिलता जुलता है जिसका मतलब महिला होता है. समूह की शुरुआत कराची की हास्य कलाकार फैजा सलीम से होती हैं. 
  • खवातून ने एक महीने के भीतर चार शो किए हैं और इस महीने के आखिर में वह कराची में एक और शो करने जा रहे हैं. सलीम औरतनाक से भी जुड़ी हैं जो एक अन्य महिलाओं का समूह है. जून महीने में इस समूह ने स्टैंड अप कॉमेडी शो किया था.

बहुतेरे लोगों को यह लगता है कि लड़कियां मजाकिया नहीं हो सकती. वह स्वीट और स्मार्ट हो सकती है लेकिन मजाकिया नहीं हो सकती. पाकिस्तान में 'द ख]वातून' के नाम से बना लड़कियों का यह समूह इस धारणा को चुनौती देने का काम कर रहा है.

कराची और लाहौर में दो शो करने के बाद खवातून को पाकिस्तान का सबसे अधिक मजाकिया महिलाओं का समूह कहा जा रहा है. ख़वातून उर्दू के शब्द ख़वातीन से मिलता जुलता है जिसका मतलब होता है महिला. समूह की शुरुआत कराची की हास्य कलाकार फैजा सलीम ने की है.

सलीम हास्य कलाकार बनने से पहले वकील थीं. कभी भी कॉमेडी करने वाले लोगों को साथ रखना संभव नहीं होता. खासकर बात जब पाकिस्तान की हो रही हो.

सलीम ने कैच को बताया, 'शुरुआत में मुझे कोई लड़की ही नहीं मिल रही थी. मैंने सभी जगह कोशिश की लेकिन मुझे सफलता हाथ नहीं लगी. लेकिन इस मकसद को छोड़ना संभव नहीं था. बाद में मुझे कुछ लड़कियां मिली लेकिन उन्होंने कुछ महीनों के प्रशिक्षण के बाद काम छोड़ दिया. बाद में मुझे हालांकि मेरी टीम मिल गई. इनमें से किसी के पास कोई प्रशिक्षण नहीं था लेकिन इनमें जबरदस्त संभावनाएं थीं. प्रशिक्षण और उनकी स्वाभाविक प्रवृत्ति की वजह से हम यहां तक पहुंचे हैं.'

हास्य कलाकारों का समूह

सलीम ने अपने समूह की शुरुआत जुलाई में की थी लेकिन उन्होंने पिछले साल से ही इस पर काम करना शुरू कर दिया था. उन्हें मिलाकर उनकी टीम खवातून में कुल सात लोग हैं.

सलीम बताती हैं, 'हम अपनी कॉमेडी के जरिये पाकिस्तान मेंं और अधिक महिलाओं को जोड़ना चाहते हैं. हम इस मामले में उस धारणा को तोड़ना चाहते हैं कि यह काम सिर्फ पुरुषों का है. हमारे समूह में सभी पृष्ठभूमि की लड़कियां हैं. मेरे लिए सबसे अधिक अहम यह है कि लोगों की पहचान उनके दिखावे से नहीं होगी खासकर तब जब वह अपने सपने को पूरा नहीं कर सकतीं. हम अपने काम की मदद से पाकिस्तान और यहां रह रहीं महिलाओं की बेहतर छवि बनाना चाहते हैं. हम लोगों को उनके जंजीरों से तोड़कर बाहर निकालना चाहते हैं.'

खवातून ने एक महीने के भीतर चार शो किए हैं और इस महीने के आखिर में वह कराची में एक और शो करने जा रहे हैं. सलीम औरतनाक से भी जुड़ी हैं जो एक अन्य महिलाओं का समूह है. जून महीने में इस समूह ने स्टैंड अप कॉमेडी शो किया था.

उन्होंने कहा, 'मैं अभी भी औरतनाक का हिस्सा हूं लेकिन इसमें खवातून से अलग लोग जुड़े हुए हैं. औरतनाक स्टैंड अप कॉमेेडी करता है जबकि खवातून फिलहाल ऐसा नहीं करता.' औरतनाक मजाक और बेहद हल्के फुल्के अंदाज में पूर्वाग्रहों और पितृसत्ता पर प्रहार करता है.

यह उपमहाद्वीप में सुदंरता मसलन, 'मैं गोरी हूं और यह मेरी जिंदगी की सबसे बड़ी उपलब्धि है' पर प्रहार करता है.

लोगों की प्रतिक्रिया

पाकिस्तान में सलीम मशहूर थियेटर कलाकार हैं. वह पाकिस्तान की पहली महिला हैं जो सोशल मीडिया एंटरटेनर हैं. इसके अलावा वह ख़वातून की संस्थापक निदेशक भी हैं.

सलीम बताती हैं, 'लोगों की प्रतिक्रिया बेहद शानदार रही है. लोगों के शानदार समर्थन से हमें आगे बढ़ने में मदद मिलती है. हालांकि भविष्य में उतार चढ़ाव आएंगे और मैं इसके लिए तैयार हूं.' समूह केवल महिलाओं के लिए ही परफॉर्म नहीं करता.

वह बताती हैं, 'बिलकुल नहीं. हमें देखने सभी आते हैं. लेकिन हम केवल महिलाओं के बीच भी प्रदर्शन करने के लिए तैयार हैं. हमें ऐसा करने में कोई परेशानी नहीं है.'

क्या वह सफल हैं, के बारे में पूछे जाने पर वह बताती हैं, 'मैं अभी अपनी सफलता के बारे में इतनी जल्दी कुछ नहीं कहूंगी लेकिन मुझे लगता है कि मेरा काम लोगों को सोचने के लिए मजबूर करता है. जब कोई मुझसे यह कहता है कि मेरी कहानी ने उन्हें प्रेरित किया या उनकी मदद की तो मेरा दिन बन जाता है. इससे बेहतर सुनना क्या हो सकता है कि मेरे काम से किसी की जिंदगी में सकारात्मक बदलाव आया.'

नारीवादी शो

सलीम बताती हैं कि उन्हें नारीवादी समूह बताना गलत है क्योंकि यह एक नारीवादी आंदोलन है. कुछ चीजें  हैं जिन्हें बताने की जरूरत है. यह एक ऐसा मसला है जो सलीम के दिल के करीब है क्योंकि वह खुद मोटी हैं और उन्हें इसे लेकर शर्म नहीं आती.

बीबीसी उर्दू को दिए गए इंटरव्यू में उन्होंने कहा, 'किसी भी मोटे विशेषकर लड़कियों के लिए यह शर्मनाक होता है. उन्हें यह झेलना होता है कि वह मोटी हैं. मैंने अपने शो में कहा और लोगे मेरे पास आए और कहा कि अब उन्हें बेहतर लग रहा है. वह अब इस बात को स्वीकार कर चुके हैं कि वह जैसे भी हैं, वैसे ही रहेंगे.'

'मुझे लगता है कि कॉमेडी का मतलब केवल लोगों को हंसाना नहीं होता बल्कि लोगों की मानसिकता भी बदलने की जरूरत होती है ताकि समाज में बदलाव लाया जा सके.'

वह पाकिस्तान की देसी आंटी संस्कृति की आलोचना करती हैं. वास्तव में उन्होंने लाहौरी आंटियोंं के लिए गाना बनाया है. वह उन्हें बताना चाहती हैं कि लड़कियों के लिए शादी अंतिम लक्ष्य नहीं है.

सलीम और उनका समूूह बड़ी संख्या में लोगों तक पहुंचना होता है. लोग उन्हें अक्सर समृद्ध लोगों के समूह के तौर पर देखते हैं. वहीं कुछ लोग ऐसे हैं जो उन्हें बेशर्म बताकर खारिज करते हैं. जिनके पास कोई तरीका नहीं है और जो लोग अच्छे परिवार से नहीं हैं.

लेकिन सलीम और उनके समूह को बेहतर दिनों की उम्मीद है और उन्हें वैसी लड़कियों के समूह के तौर पर नहीं देखा जाएगा जो खाना बनाने के लिए होती हैं.

First published: 10 September 2016, 8:11 IST
 
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