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Sawan2020: आज है सावन का पहला प्रदोष व्रत, ये है पूजा की विधि

कैच ब्यूरो | Updated on: 18 July 2020, 9:29 IST

Sawan2020: सनातम धर्म में प्रदोष व्रत को महत्वपूर्ण माना जाता है. मान्यता के मुताबिक प्रदोष व्रत चन्द्रमौलेश्वर भगवान शिव की प्रसन्नता और आशीर्वाद को प्राप्त करने के लिए किया जाता है.ज्योतिष के मुताबिक प्रदोष व्रत में शिवजी की उपासना व पूजा की जाती है. हिंदू धर्म के मुताबिक यह व्रत बहुत ही महत्वपूर्ण और लाभकारी है. वहीं यह व्रत हिन्दू कैलेंडर के मुताबिक त्रयोदशी के दिन किया जाता है.

इस साल सावन में दो शनि प्रदोष का भी संयोग बन रहा है. इसके तहत पहला 18 जुलाई और दूसरी 1 अगस्त को पड़ रहा है. इस दिन शनिवार होने से यह शनि प्रदोष व्रत है. प्रत्येक प्रदोष व्रत के दिन भगवान शंकर की पूजा की जाती है, लेकिन शनि प्रदोष व्रत के दिन भगवान शिव की साथ साथ शनिदेव की भी पूजा अर्चना की जाएगी.


इस महीने में दोनों प्रदोष पड़ रहे हैं दोनों ही शनिवार को पड़ रहे हैं. जिसके कारण इसका महत्व और अधिक बढ़ जाता है. यदि आपकी कुंडली में शनि दोष, साढ़े साती, शनि की लघु कल्याणी ढैय्या आदि है तो 18 जुलाई और 1 अगस्त को जरूर पूजन करें. ऐसा करने से शनि संबंधी दोष दूर होते हैं.

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प्रदोष व्रत करने की विधि-
प्रदोष व्रत करने के लिए त्रयोदशी वाले दिन प्रात: सूर्योदय से पूर्व उठकर स्नानादि से निर्वित हो. इस व्रत में व्रती का सफेद कपड़े पहनना शुभ माना जाता है. निराहार व्रत रखा जाता है. सांयकाल के वक्त शिवालय जाये या फिर घर पर ही पूजास्थान पर बैठे.

महादेव शंकर का ध्यान करते हुए व्रत कथा और आरती पढ़नी चाहिए. शिव का दूध और जल से अभिषेक करें. महादेव को शिवजी जी को फल, फूल, धतूरा, बिल्वपत्र और ऋतुफल अर्पित करें. इसके बाद आप संध्याकाल के पूजन के बाद सात्विक भोजन या फलाहार ले सकते हैं.

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First published: 18 July 2020, 9:29 IST
 
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