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सावधान! करवाचौथ व्रत में भूलकर भी न करें इन पांच चीजों को अनदेखा, वरना हो जाएगा बहुत बड़ा अपशकुन

कैच ब्यूरो | Updated on: 17 October 2019, 12:50 IST

सुहागिन महिलाएं करवा चौथ के व्रत का इंतजार बेसबरी से करती हैं. ये व्रत कार्तिक महीने की कृष्ण पक्ष की तृतीया तिथि को मनाई जाती है. इस बार 17 अक्टूबर को सुहागिन महिलाएं करवा चौथ का व्रत रखेंगी.

इस दिन सुहागिन महिलाएं निर्जला व्रत का पालन करती है.शाम में चांद का दीदार करने के बाद पत्नी पति के हाथ से जल पीती हैं और इसके बाद वो अपना व्रत खोलती है. महिलाएं करवा माता की पूजा और कथा सुनती हैं. करवा पूजा के दौरान कुछ खास चीजों की जरूरत होती है.

सरगी करवा चौथ का व्रत रखने वाली महिला को उसकी सास द्वारा दी जाती है. कहा जाता है कि सरगी से ही करवाचौथ का व्रत शुरू होता है. इस सरगी में मिठाई, फल, और मेवे आदि होते हैं. जिसे सूर्योदय के वक्त व्रत से पहले बहु खाती है.करवा चौथ के व्रत में व्रती महिलाएं माता गौरी और भोलनाथ की पूजा करती हैं. इसके लिए वो करवा चौथ का व्रत निर्जला रखती हैं.

करवा चौथ के व्रत में भगवान गणेश, भगवान शिव और माता गौरी की पूजा की जाती है, ताकी उन्हें अखंड सौभाग्य, यश और कीर्ति प्राप्त हो सके. पूजा में भगवान शिव और माता गौरी की विधिवत पूजा करनी होती है.करवा चौथ में पूजा के लिए मिट्टी से शिव, गौरी और गणेश की मूर्ती बनाई जाती है. माता गौरी का सिंदूर, बिंदी, चुन्नी और भगवान शिव को चंदन, पुष्प. कपड़े आदि पहनाते हैं.

करवाचौथ की शाम को महिलाएं एक जगह एकत्र होती हैं. जहां वो अन्य महिलाओं से करवा चौथ की कथा सुनाती हैं. फिर चांद के निकलने पर अर्ध्य देती हैं. और चांद के सामने हाथ जोड़कर उनका आशीर्वाद लेती हैं. इसके बाद पति के हाथ से पानी पीकर अपना व्रत खोलती हैं.

First published: 15 October 2019, 14:26 IST
 
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