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'भोजपुरी सिनेमा से बाहर आकर देखिए तो हॉल-मॉल में भी संस्कार दिखेंगे राबड़ी जी'

ऋचा मिश्रा | Updated on: 12 June 2017, 13:00 IST

बिहार की पूर्व मुख्यमंत्री राबड़ी देवी अपने मंत्री बेटों के लिए 'देसी' बहू ढूंढ़ रही हैं. रविवार (11 जून) को लालू यादव के जन्मदिन के दौरान यादव दंपति के आवास पर आयोजित समारोह में राबड़ी देवी ने कहा कि उन्हें 'सिनेमा हॉल और मॉल जाने वाली' बहू नहीं चाहिए.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक राबड़ी देवी ने कहा कि उन्हें अपने बेटों के लिए 'अच्छे संस्कार वाली' बहू चाहिए. राबड़ी देवी ने खास तौर पर अपने बड़े बेटे लिए 'संस्कारी' बहू खोजने की बात कही क्योंकि 'वो काफी धार्मिक है.' राबड़ी देवी ने कहा, "घर चलाने वाली, बड़े बुजुर्ग का आदर करने वाली, जैसे की हम हैं, वैसी लड़की चाहिए."

बेशक ये राबड़ी देवी जी के निजी विचार हैं, लेकिन ये विचार कर्इ सवाल उठाते हैं- मसलन संस्कारी बहू की परिभाषा, सिनेमा हॉल और मॉल जाने वाली बहू नहीं चाहिए से आख़िर उनका क्या मतलब है?

एकबारगी तो ये विचार बेहद दकियानूसी दिखते हैं. लेकिन इसमें राबड़ी जी का कोर्इ दोष नहीं है. जिसने सिनेमा के नाम पर भोजपुरी के अश्लील सिनेमा की दुनिया देखी है, उसके लिए बेशक सिनेमा देखना असंस्कारी होगा. इन फिल्मों को बनाने वाले भी अपनी ही फिल्मों को अपने परिवार के साथ कभी नहीं देखते. इन सिनेमा में महिलाआें को मनोरंजन का सामान बनाकर परोसा जाता है. गानों के हर एक शब्द में अश्लीलता की सारी हदों को किया जाता है. एेसे में राबड़ी जी आख़िर आपने संस्कारी की बात किस लिहाज से की है? 

रही बात माॅल जाने की तो माॅल जाने के नाम आप शायद ये सोच बैठी हैं कि वहां मिनी स्कर्ट पहनें लड़कियां, लड़कों के साथ घूमती हैं. तो कभी माॅल आकर तो देखिए...वहां घर संभालने वाली महिलाएं पूरे घर का राशन लेने बिग बाज़ार भी आती हैं. पूरी फैमिली के साथ लोग रेस्टोरेंट में खाना खाने आते हैं. 

रही बात संस्कारों की तो इनकी कोर्इ स्पेशल क्लास तो बिहार में चलती नहीं है. याद रहे...संस्कार जींस पहनकर माॅल में जाने वाली लड़कियों में भी होते हैं आैर गांवों में चार पर्दों के पीछे रहने वाली महिलाआें में भी.

बस फर्क है तो सोच का. अगर आप सोचते हैं कि शराबबंदी करने से बिहार में शराब नहीं बिकेगी तो भूल जाइए. एेसा ही मामला है संस्कारों के साथ जो सिनेमा हाॅल आैर माॅल में जाने से खत्म नहीं हो जाते. पीढ़ी दर पीढ़ी साथ चलते हैं. राबड़ी जी बुरा मत मानिएगा. भोजपुरी सिनेमा से ज़रा बाहर आकर देखिए तो सिनेमा हॉल और मॉल में भी आपको संस्कार दिखाई देंगे. 

First published: 12 June 2017, 12:54 IST
 
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