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रंगपंचमी 2018: जानिए क्यों मनाई जाती है रंगपंचमी और क्या है इसका महत्व?

कैच ब्यूरो | Updated on: 6 March 2018, 16:19 IST

आज रंगपंचमी का पर्व मनाया जा रहा है. रंगपंचमी को होलिका दहन और रंगों की होली के 5 दिन बाद मनाया जाता है. रंगपचमी के दिन लोग एक-दूसरे को रंग लगाते हैं और आसमान में भी रंग-गुलाल उड़ाकर आसमान को रंगीन कर देते हैं. कहा जाता है कि इस दिन एक-दूसरे के साथ नहीं बल्कि भगवान के साथ होली खेली जाती है. इस दिन आसमान पर रंग फेंककर सकारात्मक माहौल बनाया जाता है, जिसे भगवान के आशार्वाद के तौर पर देखा जाता है.

क्यों मनाई जाती है रंगपंचमी और क्या है इसका महत्व?

होली के पांच दिन बाद रंगपंचमी का पर्व मनाया जाता है. इसीलिए इसे रंगपंचमी के नाम जाना जाता है. क्योंकि रंगों के होली के बाद इसे मनाने वाला दिन पांचवां होता है. इस पर्व को लोग बड़ी धूमधाम से मनाते हैं. लोगों की टोलियां गली-गली घूमकर एक दूसरे के गले मिलकर बधाई देती हैं. इस दिन सड़कों पर जुलूस जैसा माहौल होता हैं.

कहां-कहां मनाया जाता है रंगपंचमी का पर्व

होली का पर्व तो पूरे देश में मनाया जाता है, लेकिन रंगपंचमी का पर्व देश के कुछ राज्यों में ही मनाया जाता है. रंगों के इस पर्व को मध्य प्रदेश, महाराष्ट्र और गुजरात में धूमधाम से मनाते देखा जा सकता है. इस दिन इन तीनों शहरों में जुलूस निकलता है, जहां लोग पूरे रास्ते एक-दूसरे को गुलाल लगाते और उड़ाते हुए आगे बढ़ते हैं. इस दिन घरों में खास पकवान भी बनाया जाता है जिसे पूरनपोली कहा जाता है.

क्या है रंगपंचमी की पौराणिक मान्यता

रंगपंचमी का पर्व चैत्र मास की कृष्ण पक्ष की पंचमी तिथि को मनाया जाता है. इसलिए इसे रंगपंचमी कहा जाता है. होली की तरह ही रंगपंचमी को मनाने की भी पौराणिक मान्यता है. ऐसा माना जाता है कि इस दिन रंगों के जरिए रज-तम के प्रभावों को कम कर सात्विक स्वरूप निखरता है.

इस दिन आसमान में उड़ाए जाने वाले रंग से सभी देवी-देवता प्रसन्न होते हैं, क्योंकि हरेक कण में सकारात्मक तरंगे पूरे माहौल में ऊर्जा उत्पन्न करती हैं. साथ ही यह भी मान्यता है कि आसमान से उड़ते रंग के जरिए भगवान भक्तों को आशीर्वाद भी देते हैं.

First published: 6 March 2018, 16:13 IST
 
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