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‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’..जब दिनकर की इस पंक्ति ने इंदिरा का तख्ता-पलट कर दिया

दीपक कुमार सिंह | Updated on: 23 September 2018, 13:12 IST

कविताओं से भारतीय समाज और संस्कृति का अटूट रिश्ता है. हमारे देश में कवियों ने आजादी की लड़ाई से लेकर, समाज की कुरीतियों के खिलाफ अपनी लेखनी से लड़ाई लड़ी है और देशवाशियों को प्रेरित किया है. हिंदी साहित्य के ऐसे ही महान कवी थे "रामधारी सिंह दिनकर".

आज राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर की 110 वीं जयंती है. उन्होंने ‘परशुराम की प्रतीक्षा’, ‘हुंकार’ और ‘उर्वशी’ "कुरुक्षेत्र", "रश्मिरथी'' जैसी अमर रचनाएं की है. दिनकर ने अपनी लेखनी से जनता को उसके अधिकारों के प्रति हमेशा जागरूक किया है. उन्हें वर्ष 1959 में साहित्य अकादमी पुरस्कार से नवाजा गया.

रामधारी सिंह दिनकर का जन्म 23 सितंबर 1908 को बिहार के बेगुसराय जिले में स्थित सिमरिया गांव में हुआ था. महज तीन साल की उम्र में उनके पिता का देहांत हो गया था और उनका बचपन अभावों में गुजरा. दिनकर के घर में प्रतिदिन रामचरितमानस का पाठ होता था इससे दिनकर के मन में कविता और साहित्य के प्रति रुचि उत्पन्न हो गई.राष्ट्रकवि रामधारी सिंह दिनकर ने हिंदी साहित्य में वीर रस को एक नई ऊंचाई दी है. अपनी प्रेरणादायक रचनाओं से राष्ट्रीय चेतना और राष्ट्र भावना का भी सृजन किया.

साल 1975 में जब इंदिरा गाँधी ने देश में आपातकाल की घोषणा की और अपने विरोधियों का दमन शुरू कर दिया. दिल्ली के रामलीला मैदान में जयप्रकाश नारायण ने लाखों लोगों के सामने राष्ट्रकवि दिनकर की पंक्ति ‘सिंहासन खाली करो कि जनता आती है’ का उद्घोष करके तत्कालीन सरकार के खिलाफ विद्रोह का आवाह्न किया था. दिनकर की पंक्ति ने भारतीय जनता में ऐसा आक्रोश और जोश भरा कि जनता ने इंदिरा गांधी की तख्ता-पलट कर देश को लोकतंत्र की शक्ति का अहसास कराया था.  

दिनकर की पहली रचना 1928 में लिखी 'प्राणभंग' मानी जाती है. इसके बाद राष्ट्रकवि ने कुरुक्षेत्र, बापू, रेणुका, हुंकार, रश्मिरथी लिखा. 'रेणुका' और 'हुंकार' में देशभक्ति की भावना से इतनी ओत-प्रोत थी कि घबराकर अंग्रेजों ने इन किताबों पर प्रतिबंध लगा दिया था. दिनकर ने डटकर अंग्रेजों के खिलाफ तो लिखा ही, लेकिन आजादी के बाद सत्ता की खामियों को उजागर करने से भी नहीं चूके. दिनकर जवाहर लाल नेहरू के कार्यों की हमेशा प्रशंसा  करते थे लेकिन 1962 के युद्ध में सैनिकों की शहादत पर उन्होंने नेहरू की जमकर आलोचना की.

First published: 23 September 2018, 13:12 IST
 
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