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सआदत हसन मंटो: मशहूर कहानीकार, जिसकी 5 कहानियों पर मुकदमे भी चले

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 May 2017, 14:23 IST

"मैं क्यों लिखता हूं? यह एक ऐसा सवाल है कि मैं क्यों खाता हूं. मैं क्यों पीता हूं. लोकिन लिखना इस मायने में अलग है कि खाने और पीने के लिए मुझे रुपये खर्च करने पड़ते हैं और जब मैं लिखता हूं तो नकदी की सूरत में मुझे कुछ नहीं खर्च करना पड़ता."

सआदत हसन मंटो की क़लम से निकले हैं ये शब्द. मंटो का जन्म 11 मई 1912 को लुधियाना जिले के पपरौड़ी गांव में पुश्तैनी बैरिस्टरों के परिवार में हुआ था. उनकी 42 साल, आठ महीने और 7 दिन की छोटी सी ज़िंदगी रही. मंटो को बदनाम कहानियों का लेखक कहा जाता है. एेसा भी कह सकते हैं कि जिस तरह वो सच को कागज़ पर कलम से उतारते थे, उसे सुनना आसान नहीं था.

राजेंद्र यादव ने कहा कि चेख़व के बाद मंटो ही थे, जिन्होंने अपनी कहानियों के दम पर अपनी जगह बना ली यानी उन्होंने कोई उपन्यास नहीं लिखा.कमलेश्वर ने उन्हें दुनिया का सर्वश्रेष्ठ कहानीकार करार दिया. अपनी कहानियों में विभाजन, दंगों और सांप्रदायिकता पर जितने तीखे कटाक्ष मंटो ने किए, उसे देखकर हैरानी होती है कि कोई कहानीकार इतना साहसी और सच को सामने लाने के लिए इतना निर्मम भी हो सकता है. उनकी पांच कहानियों पर मुकदमे भी चले.

पेश है सआदत हसन मंटो की चुनिंदा कहानियां:

घाटे का सौदा

दो दोस्तों ने मिलकर दस-बीस लड़कियों में से एक चुनी और 42 रुपये देकर उसे खरीद लिया. जवान औरत की खुशबू ही मदमस्त कर देती है और वो तो एक ख़रीदी हुई लड़की थी. उसका पूरा शरीर कसा हुआ था.
रात गुजारकर एक दोस्त ने उस लड़की से पुछा, "तुम्हारा नाम क्या है'?"
लड़की ने अपना नाम बताया तो वह भिन्ना गया, "हमसे तो कहा गया था कि तुम दूसरे मजहब की हो."
लड़की ने जवाब दिया, "उसने झूठ बोला था."
यह सुनकर वह दौड़ा-दौड़ा अपने दोस्त के पास गया और कहने लगा, "उस हरामजादे ने हमारे साथ धोखा किया है. हमारे ही महजब की लड़की थमा दी. चलो, वापस कर आएं."

करामात

लूटा हुआ माल बरामद करने के लिए पुलिस ने छापे मारने शुरू किए. लोग डर के मारे लूटा हुआ माल रात के अंधेरे में बाहर फेंकने लगे, कुछ ऐसे भी थे जिन्होंने अपना माल भी मौका पाकर अपने से अलहदा कर दिया, ताकि क़ानूनी गिरफ़्त से बचे रहें. एक आदमी को बहुत दिक़्क़त पेश आई. उसके पास शक्कर की दो बोरियां थीं, जो उसने पंसारी की दूकान से लूटी थीं. एक तो वह जूं-तूं रात के अंधेरे में पास वाले कुएं में फेंक आया, लेकिन जब दूसरी उसमें डालने लगा ख़ुद भी साथ चला गया. शोर सुनकर लोग इकट्ठे हो गये. कुएं में रस्सियां डाली गईं. जवान नीचे उतरे और उस आदमी को बाहर निकाल लिया गया. लेकिन वह चंद घंटों के बाद मर गया. दूसरे दिन जब लोगों ने इस्तेमाल के लिए उस कुएं में से पानी निकाला तो वह मीठा था. उसी रात उस आदमी की क़ब्र पर दीए जल रहे थे.

हलाल और झटका  

'मैंने उसकी शहरग पर छुरी रखी, हौले-हौले फेरी और उसको हलाल कर दिया.' 'यह तुमने क्या किया?' 'क्यों?' 'इसको हलाल क्यों किया?' 'मज़ा आता है इस तरह.' 'मज़ा आता है के बच्चे.....तुझे झटका करना चाहिए था....इस तरह.' और हलाल करने वाले की गर्दन का झटका हो गया.
(शहरग - शरीर की सबसे बड़ी शिरा जो हृदय में मिलती है)

First published: 11 May 2017, 14:18 IST
 
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