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साहित्य अकादेमी पुरस्कारों का एलान, हिंदी में नासिरा शर्मा को 'पारिजात' के लिए अवॉर्ड

कैच ब्यूरो | Updated on: 21 December 2016, 15:50 IST
(फाइल फोटो)

हिंदी की चर्चित लेखिका नासिरा शर्मा को 2016 का प्रतिष्ठित साहित्य अकादेमी पुरस्कार दिया जाएगा. हर साल साहित्य अकादेमी इस पुरस्कार का एलान करता है. कुल 24 भारतीय भाषाओं में उत्कृष्ट रचनाओं के लिए इस अवॉर्ड को दिया जाता है.

नासिरा को उनके उपन्यास ‘पारिजात’ के लिए इस सम्मान से नवाजा जाएगा. 1954 में अपनी स्थापना के समय से ही साहित्य अकादेमी प्रमुख भाषाओं में से प्रत्येक में प्रकाशित सर्वोत्कृष्ट साहित्यिक कृति को यह पुरस्कार प्रदान करती है. पहली बार ये पुरस्कार 1955 में दिए गए थे.

2016 का साहित्य अकादेमी सम्मान पाने वाले 24 लेखकों की सूची

24 साहित्यकारों को साहित्य अकादेमी सम्मान

जिन 24 भाषाओं में साहित्य अकादेमी अवॉर्ड के लिए लेखकों के नाम का एलान हुआ है, उसमें असमिया के लिए ज्ञान पुजारी (मेघमालार भ्रमण कविता), डोगरी के लिए छत्रपाल (चेता कहानी) के साथ ही अंग्रेज़ी के लिए जेरी पिंटो (एम एंड द बिग हूम उपन्यास) को 2016 का साहित्य अकादेमी सम्मान मिलेगा.

उर्दू भाषा में निज़ाम सिद्दीकी को उनकी समालोचना 'माबाद-ए-जदिदिआत से नए अहेद की तखलिकियात तक' के लिए साहित्य सम्मान से नवाज़ा जाएगा. 

कश्मीरी भाषा में 'आने खाने' समालोचना के लिए अज़ीज़ हाजिनी और मैथिली में 'बड़की काकी एट हॉटमेल डॉट कॉम' कहानी के लिए श्याम दरिहरे को यह अवॉर्ड मिलेगा.

इसके अलावा मराठी में आसाराम लोमटे को उनकी कहानी 'आलोक', पंजाबी में स्वराजबीर को उनके नाटक 'मसिआ दी रात' और राजस्थानी में बुलाकी शर्मा को कहानी 'मरदजात अर दूजी कहाणियां' के लिए साहित्य सम्मान दिया जाएगा.

नासिरा शर्मा को हिंदी में 2016 का साहित्य अकादेमी अवॉर्ड पारिजात उपन्यास के लिए दिया जाएगा.

उर्दू, अंग्रेजी और पश्तो पर भी पकड़

1948 में इलाहाबाद में जन्मी नासिरा शर्मा को साहित्य विरासत में मिला है. नासिरा शर्मा ने फारसी भाषा और साहित्य में एमए किया. उर्दू, अंग्रेज़ी और पश्तो भाषाओं पर उनकी गहरी पकड़ है. उनके समृद्ध रचना संसार में दबदबा हिंदी का ही है. ईरानी समाज और राजनीति के साथ-साथ उन्हें साहित्य, कला और सांस्कृतिक विषयों का भी जानकार माना जाता है.

अब तक उनके दस से ज्यादा कहानी संकलन, छह उपन्यास, तीन लेख-संकलन, सात पुस्तकों के फ़ारसी से अनुवाद प्रकाशित हो चुके हैं. जहां फव्वारे लहू रोते हैं' के नाम से रिपोर्ताजों का एक संग्रह भी प्रकाशित हो चुका है.

उनकी कहानियों 'वापसी', 'सरज़मीन' और 'शाल्मली' के नाम से तीन टीवी सीरियल के अलावा दूरदर्शन के लिए कई टेलीफ़िल्में भी बन चुकी हैं.

प्रमुख रचनाएं

कहानी संग्रह

    'शामी कागज'

    'पत्थर गली'

    'इब्ने मरियम'

    'संगसार'

    'ख़ुदा की वापसी'

    'इंसानी नस्ल'

    'बुतखाना'

    'दूसरा ताजमहल'

   'सबीना के चालीस चोर'

उपन्यास

    'सात नदियां एक समंदर'

    'ठीकरे की मंगनी'

    'जिंदा मुहावरे'

    'अक्षयवट'

    'कुइयांजान'

    'जीरो रोड'

    'पारिजात'

    'शाल्मली'

    'बहिश्ते ज़हरा'

2008 में उपन्यास 'कुइयांजान' के लिए उन्हें यूके कथा सम्मान से नवाजा जा चुका है. इसके साथ ही अफगानिस्तान पर उनका कहानी संग्रह 'बुजकशी का मैदान' और 'मरजीना का देश इराक' नाम से प्रकाशित हो चुका है.

First published: 21 December 2016, 15:50 IST
 
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