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अब आपके घर कुरियर डिलीवरी करेंगी लड़कियां

अमित कुमार बाजपेयी | Updated on: 10 February 2017, 1:37 IST

महिलाएं हर क्षेत्र में पुरुषों को कड़ी टक्कर दे रही हैं. अब ई-कॉमर्स और कुरियर कंपनियां भी प्रोडक्ट डिलीवरी के लिए गर्ल कैंडीडेट्स को रखने के बारे में विचार कर रही हैं. दिल्ली की एक स्टार्टअप ने इस दिशा में शुरुआत करते हुए डिलीवरी गर्ल्स की सेवाएं शुरू कर दी हैं.

इवेन कार्गो नाम की एक कंपनी ने राजधानी दिल्ली में वंचित पृष्ठभूमि वाली महिलाओं को नियुक्त कर उन्हें प्रशिक्षित करना शुरू कर दिया है ताकि वे दिल्ली और आसपास के इलाकों में स्कूटर से प्रोडक्ट्स की डिलीवरी करें. मई 2016 में शुरू की गई इस मुहिम के बाद कंपनी अब तक दिल्ली के कई इलाकों में 19 से 24 साल की 100 युवतियों को प्रशिक्षित कर चुकी है.

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इनमें से अधिकांश युवतियों ने हाईस्कूल तक की ही पढ़ाई की हुई है और ऐसे परिवारों से हैं जिनकी औसत सालाना आय 1 लाख रुपये से कम है. ऐसी महिलाओं के लिए कुछ करने की चाह रखने वाले कंपनी के संस्थापक योगेश कुमार के मुताबिक, "मैंने सोचा कि उनके लिए सबसे पहले यह जरूरी है कि उनके पास कोई आय का स्रोत हो और फिर संभवता हम लैंगिंग जागरूकता के बारे में विचार कर सकते हैं."

इलेक्ट्रिकल इंजीनियर से सोशल एंटरप्रेन्योर बने 28 वर्षीय योगेश कुमार ने मुंबई के टाटा इंस्टीट्यूट ऑफ सोशल साइंसेज से पढ़ाई की और कुछ वर्षों तक लैंगिक समानता और लिंग आधारित हिंसा के बारे में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से विभिन्न उपक्रमों की कोशिश की. इस काम के लिए उन्होंने जर्मन मल्टीनेशनल कंपनी में अपनी नौकरी छोड़ दी.

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हालांकि कई कार्यशालाएं करने के बाद उन्हें पता चला कि भारत में लैंगिक समानता के सामने सबसे बड़ी बाधा महिलाओं के बीच आर्थिक माध्यमों की कमी है. इसकी वजह से श्रमिकों में महिलाओं की भागीदारी काफी कम है.

योगेश का पहला विचार महिला ड्राइवरों के साथ कैब लाना था. लेकिन 20 महिलाओं को प्रशिक्षित करने के बावजूद यह आइडिया असफल हो गया क्योंकि यह महिलाएं कार खरीदने के लिए जरूरी रकम का निवेश नहीं कर सकती थीं. इसलिए उन्होंने डिलीवरी बिजनेस में स्विच किया और लक्षय स्कूटर पर साधा.

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2015 में सिंगापुर इंटरनेशनल फाउंडेशन यंग सोशल एंटरप्रेेन्योर्स कंपटीशन जीतने पर मिली धनराशि से योगेश ने इवेन कार्गो की शुरुआत की. कंपनी की प्रशिक्षण प्रक्रिया चार चरणों में पूरी होती है. 

इसमें सबसे पहले दिल्ली ट्रैफिक पुलिस और हॉन्डा के सहयोग से टू-व्हीलर चलाने का पाठ, फिर आत्मरक्षा की सीख, फिर सॉफ्ट स्किल्स का प्रशिक्षण और सबसे अंत में लॉजिस्टिक्स इंडस्ट्री आधारित विशेष प्रशिक्षण शामिल है. 

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हालांकि इवेन कार्गो द्वारा प्रशिक्षित सबी महिलाओ में से केवल 20 ने ही इस कोर्स के चारों चरण पूरे किए और अंतिम रूप से 10 ने कंपनी को ज्वाइन किया. इसके बाद तमाम परेशानियों और रोजमर्रा की दिक्कतों से जूझने के बाद आज कंपनी के पास इनमें से 6 युवतियां काम कर रही हैं.

फिलहाल कंपनी केवल दिन के वक्त ही डिलीवरी करती है और उन कंपनियों के साथ जुड़ी है जो महिलाओं के कपड़े और एक्सेसरीज में डील करती हैं, ताकि इन डिलीवरी गर्ल्स का पुरुषों से संपर्क सीमित किया जा सके. इससे इन डिलीवरी गर्ल्स का आत्मविश्वास बढ़ेगा और इन युवतियों के रूढ़िवादी सोच वाले परिवारों को भी तसल्ली मिलेगी. 

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फिलहाल सभी दिक्कतों के बावजूद अपने इरादे पर टिके योगेश इस दिशा में अभी भी कड़ी मेहनत किए जाने की संभावना से इनकार नहीं करते. वे कहते हैं कि भारत में लैंगिक असमानता को दूर करना काफी मुश्किल है क्योंकि इसकी जड़ें काफी गहरी हैं.

First published: 15 December 2016, 1:51 IST
 
अमित कुमार बाजपेयी @amit_bajpai2000

पत्रकारिता में एक दशक से ज्यादा का अनुभव. ऑनलाइन और ऑफलाइन कारोबार, गैज़ेट वर्ल्ड, डिजिटल टेक्नोलॉजी, ऑटोमोबाइल, एजुकेशन पर पैनी नज़र रखते हैं. ग्रेटर नोएडा में हुई फार्मूला वन रेसिंग को लगातार दो साल कवर किया. एक्सपो मार्ट की शुरुआत से लेकर वहां होने वाली अंतरराष्ट्रीय प्रदर्शनियोंं-संगोष्ठियों की रिपोर्टिंग.

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