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होली के कुछ स्थानीय, कुछ क्लासिकल, कुछ अनसुने गीत

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 March 2016, 23:31 IST

हिंदी फिल्मों में सबसे ज्यादा लोकप्रिय त्योहार होली है. आज की होली फ़िल्मी गीतों के बिना शायद नहीं पूरी होती. लेकिन होली पर गीत गाने की परंपरा फ़िल्मों के आविष्कार से काफ़ी पुरानी है. परंपरागत होरी, फगुआ या जोगिरा का फिल्मों में जमकर प्रयोग होता रहा है. 

होली से जुड़ा शायद ही ऐसा कोई फ़िल्मी गाना होगा जो आपने एकाध बार पहले नहीं  सुना होगा. इसलिए हम पेश कर रहे हैं कुछ उप-शास्त्रीय या परंपरागत लोक गीत जो समय के साथ शायद बिसरते जा रहे हैं.

आम तौर पर होली को कृष्ण और राधा के संग जोड़ा जाता है. लेकिन इस गीत में पंडित छन्नूलाल मिश्रा बता रहे हैं कि काशी में बाबा भोलेनाथ किस तरह होली खेलते हैं.

खेलैं मसाने में होली दिगंबर, खेलैं मसाने में होलीः छन्नूलाल मिश्रा

होली दक्षिण एशिया में लगभग सभी धर्मों और संप्रदायों में लोकप्रिय है. मुस्लिम सूफियों से लेकर नजीर अकबराबादी तक कइयों ने होली पर गीत लिखे हैं. आबिदा परवीन यूं तो अपने सूफी गीतों के लिए मशहूर हैं लेकिन आज सुनिए उनका होली गीत.

होली खेलन आया पिया, होली खेलन आयाः आबिदा परवीन

होली के मौके पर गायी जाने वाली होरी ध्रुपद का एक प्रकार है. होरी के ज्यादातर गीत राधा और कृष्ण के बीच इस मौके पर होने वाली नोंक-झोंक के ईर्दगिर्द बुने होते हैं.  नीचे दिए गए गीत के केंद्र में भी ब्रज की होली ही है.

आज बिरज में होरी रे रसियाः शोभा गुर्टु

बेगम अख्तर को उनकी ग़ज़लों और ठुमरियों के लिए जाना जाता है. लेकिन आज हम आप को सुनवाना चाहेंगे उनकी आवाज़ में एक होरी गीत.

सखी, होली खेलन कैसे जाऊंः बेगम अख़्तर

होली विक्रम संवत के फाल्गुन पूर्णिमा को मनायी जाती है. होली दो दिनों का त्योहार है. पहले दिन होलिका दहन होता है और उसके अगले दिन रंग खेला जाता है.

मैं तो खेलूं उन्हीं के संग होली गोइंयाः सुरेंदर कुमार

भागवत पुराण के अनुसार असुरों के राजा हिरण्कश्यप का बेटा प्रह्लाद विष्णु का भक्त हो गया. जिसकी वजह से उसके पिता बहुत नाराज हो गए. उन्होंने प्रह्लाद को मारने की कोशिश की. सभी प्रयास विफल हो जानने के बाद हिरण्यकश्यप ने अपनी बहन होलिका को प्रह्लाद को गोद में रखकर चिता में बैठने के लिए कहा. होलिका अग्नि में न जलने का वरदान था. लेकिन विष्णु के प्रभाव से प्रह्लाद चिता से जीवित निकला और होलिका की मृत्यु हो गयी.

उड़त अबीर गुलालः गिरिजा देवी

होली की बात हो और बरसाना की लट्ठ मार होली का जिक्र न हो ये संभव नहीं. मान्यता है कि होली के दिन कृष्ण के नंदगांव के लोग राधा के गांव बरसाना में होली खेलने जाते थे. बरसाना की महिलाएं नंदगांव के लोगों का लट्ठ के स्वागत करती थीं. मथुरा में ये परंपरा आज भी जारी है.

आज रंग है री मां, रंग है रीः नुसरत फतेह अली खान

होरी गीत को शास्त्रीय और उप-शास्त्रीय दोनों तरीकों से गाया जाता है. 'इंडियन राग' के अनुसार उप-शास्त्रीय ढंग से गायी जानी वाली होरी में खमाज और कैफी जैसे राग काफी लोकप्रिय हैं. वहीं 14 मात्राओं वाले ताल दीपचंडी का होरी गीत में अत्यधिक प्रयोग होता है.

रंगी सारी चुनरियाः कौशिकी चक्रवर्ती

क्षेत्रीय विशेषताओं और परंपराओं में  रसे-पगे होली गीतों की अलग ही पहचान होती है. ब्रज की होली की तरह अवध की होली का अपना ही अंदाज होता है.

अगर काशी में भोलेनाथ, ब्रज में कृष्ण होली गीतों के नायक होते हैं तो अवध में राजा रामचंद्र. होली खेलै रघुबीरा अवध में सर्वाधिक लोकप्रिय होली गीतों में एक है.

भरत शर्मा व्यास अपने भोजपुरी निर्गुण गीतों के लिए प्रसिद्ध हैं. इस एल्बम में आप उनके गाए होली गीतों के रंग महसूस कर सकते हैं.

होरी खेलत रघुबीरः भरत शर्मा व्यास

इस समय भोजपुरी होली गीत अश्लीलता के पर्याय बन चुके हैं. यौनिक इशारेबाजियों से लदे-फदे इन गीतों को सुनकर शायद आप झेंप जाएं. लेकिन भोजपुरी होली गीतों की हालत हमेशा ऐसी नहीं थी.

भोजपुरी में कुछ उम्दा गीत सुनने में आपकी रुचि हो तो आप शारदा सिन्हा का ये एल्बम सुन सकते हैं.

भीजल मोरी चुनरियाः शारदा सिन्हा

First published: 23 March 2016, 23:31 IST
 
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