Home » कल्चर » Shivaji Jayanti 2020: When Shivaji Maharaj did not fight anyone for five years, know the reason
 

Shivaji Jayanti 2020: जब पांच साल तक शिवाजी महाराज ने नहीं किया था किसी से युद्ध, जानिए क्यों?

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 February 2020, 12:10 IST

Shivaji Jayanti 2020: पूरे दक्षिण भारत (South India) पर राज (Rule) करने वाले शिवाजी महाराज (Shivaji Maharaj) की आज जयंती है. शिवाजी महाराज का जन्म आज ही के दिन साल 1630 (19, फरवरी 1630) को महाराष्ट्र में स्थित शिवनेरी दुर्ग में हुआ था. उनके पिता का नाम शाहजी भोंसले (Shahaji Bhosale) था. उनकी माता का नाम जीजाबाई (Jijabai) था. शिवाजी महाराज को उनके पराक्रम के कारण 'छत्रपति' (Chhatrapati)की उपाधि मिली थी. इसलिए उन्हें छत्रपति शिवाजी महाराज (Chhatrapati Shivaji Maharaj) कहा जाता है. उनका पूरा नाम छत्रपति शिवाजी राजे भोंसले (Chhatrapati Shivaji Raje Bhosale) था. शिवाजी महाराज एक महान योद्धा और रणनीतिकार थे. शिवाजी महाराज ने ही भारत में मराठा साम्राज्य (Maratha Empire) की नीवं रखी थी.

शिवाजी महाराज ने कई सालों तक मुगलों के साथ युद्ध किया. साल 1674 ई. में रायगढ़ महाराष्ट्र में शिवाजी महाराज का राज्याभिषेक किया गया था, तब उन्हें छत्रपति की उपाधि प्रदान की गयी थी. इनका पूरा नाम शिवाजी राजे भोसलें था. शिवाजी महाराज ने अपनी सेना, सुसंगठित प्रशासन इकाईयों की सहायता से एक योग्य एवं प्रगतिशील प्रशासन प्रदान किया था.

इसके साथ ही शिवाजी महाराज ने भारतीय सामाज के प्राचीन हिन्दू राजनैतिक प्रथाओं और मराठी एवं संस्कृत को राजाओं की भाषा शैली बनाया था. शिवाजी महाराज अपने शासनकाल में बहुत ही ठोस और चतुर किस्म के राजा थे. लोगों ने शिवाजी महाराज के जीवन से प्रेरणा लेकर भारत की आजादी में भाग लिया और हंसते-हंसते बलिदान दे दिया.

शिवाजी महाराज की चार रानियां थीं जिनसे उनके आठ बच्चे हुए. इनमें दो पुत्र और छह पुत्रियां थी. शिवाजी महाराज की पहली शादी सईबाई निम्बालकर के साथ पुणे के लाल महल में 14 मई 1640 को हुई थी. शिवाजी ने अपना ज्यादा जीवन अपनी माता जीजाबाई के साथ बिताया. शिवाजी महाराज बचपन से ही काफी तेज और चालाक थे. उन्हें बचपन से ही युद्ध कला और राजनीति की शिक्षा प्राप्त कर ली थी.

शिवाजी के पिता भी काफी तेज और शूरवीर थे. इसलिए शिवाजी महाराज के लालन-पालन और शिक्षा में उनके माता और पिता का बहुत ज्यादा प्रभाव रहा. उनके माता और पिता शिवाजी को बचपन से ही युद्ध की कहानियां तथा उस युग की घटनाओं के बारे में बताते थे. खासकर उनकी मां उन्हें रामायण और महाभारत की प्रमुख कहानियां सुनाती थी, जिन्हें सुनकर शिवाजी के ऊपर बहुत ही गहरा असर पड़ा था.

साल 1640 और 1641 के समय बीजापुर महाराष्ट्र पर विदेशियों और राजाओं के आक्रमण हो रहे थे. शिवाजी महाराज मावलों को बीजापुर के विरुद्ध इकट्ठा करने लगे. मावल राज्य में सभी जाति के लोग रहा करते थे. बाद में शिवाजी महाराज ने इन मावलो को एक साथ आपस में मिलाया और मावला नाम दिया. इन मावलों ने कई सारे दुर्ग और महलों का निर्माण करवाया था. बीजापुर उस समय आपसी संघर्ष और मुगलों के युद्ध से परेशान था, जिसके चलते उस समय के बीजापुर के सुल्तान आदिलशाह ने बहुत से दुर्गों से अपनी सेना हटाकर उन्हें स्थानीय शासकों के हाथों में सौंप दी दिया.

उसी दौरान बीजापुर के सुल्तान बीमार पड़ गए थे, इसी का फायदा उठाकर शिवाजी महाराज ने उनके किले पर अपना अधिकार जमा लिया था. शिवाजी ने बीजापुर के दुर्गों को हथियाने की नीति अपनायी और पहला दुर्ग तोरण का दुर्ग को अपने कब्जे में ले लिया. शिवाजी महाराज ने सुल्तान आदिलशाह के पास अपना एक दूत भेजकर खबर भिजवाई की अगर आपको किला चाहिए तो अच्छी रकम देनी होगी, किले के साथ-साथ उनका क्षेत्र भी उनको सौंप दिया जायेगा.

शिवाजी महाराज इतने तेज और चालाक थे की आदिलशाह के दरबारियों को पहले से ही खरीद लिया. शिवाजी जी के साम्राज्य विस्तार नीति की भनक जब आदिलशाह को मिली थी तब वह देखते रह गया. उसने शाहजी राजे को अपने पुत्र को नियंत्रण में रखने के लिये कहा, लेकिन शिवाजी महाराज ने अपने पिता की परवाह किये बिना अपने पिता के क्षेत्र का प्रबन्ध अपने हाथों में ले लिया था और लगान देना भी बंद कर दिया.

साल 1647 तक चाकन से लेकर निरा तक के भू-भाग पर शिवाजी महाराज का कब्जा हो गया. अब शिवाजी महाराज ने पहाड़ी इलाकों से मैदानी इलाकों की और चलना शुरू कर दिया था. शिवाजी जी ने कोंकण और कोंकण के 9 अन्य दुर्गों पर अपना अधिकार जमा लिया था. शिवाजी महाराज को जीवनभर कई देशी और कई विदेशियों राजाओं के साथ युद्ध करना पड़ा. 3 अप्रैल 1680 को शिवाजी महाराज का रायगढ़ के किले में निधन हो गया.

रोजाना सूर्यदेव को तांबे के लोटे से करें जल अर्पित, मिट जाएगा जीवन का अंधेरा, घर में आएगी सुख-समृद्धि

Mahashivratri 2020: 117 साल बाद बन रहा शुक्र और शनि का दुर्लभ योग, ये काम करने की न करें गलती

महाशिवरात्रि पर ऐसे करें भोलेनाथ का जलाभिषेक, बनेंगे हर बिगड़े काम मनोकामना होगी पूरी

First published: 19 February 2020, 12:10 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी