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#JLF2016: 'हर बहस या मुद्दे को जातिवाद का रंग नहीं देना चाहिए'

दुर्गा एम सेनगुप्ता | Updated on: 25 January 2016, 8:46 IST

ऐसे समय में जब राजीतिक माहौल गर्म है और कुछ लोग अपनी बात रखने के अधिकार के लिए आवाज बुलंद कर रहे हैं तब कुछ लोग ऐसे भी हैं जो इसे चिंता का विषय मानने से इंकार कर रहे हैं. लोग रुक कर पूरी बात सुनना भूल चुके है, वे सुनते भी हैं तो सिर्फ इसलिए ताकि सामने वाले कि बात का मुंहतोड़ जवाब दे सकें.

इस अंतर को मिटाने के लिए जयपुर साहित्य महोत्सव ने 'द नीड टू लिसन: डॉयलॉग वर्सेस रेटरिक' विषय पर अपने विचार रखने  के लिए राजनितिक और सामाजिक क्षेत्र से पांच सामाजिक हस्तियों को चुना.

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इस पैनल में सुधींद्र कुलकर्णी, सैयद सलमान चिश्ती, पी शिवाकमी, पिंकी आनंद और शशि थरूर शामिल हुए. बातचीत के लिए सकारात्मक अवसर पैदा करने की चुनौतियों पर एक बहस की. लेकिन उनमें से एक वक्ता ऐसी रहीं जिन्होंने बात का रुख ही मोड़ दिया.

सीनियर वकील पिंकी आनंद जब भारत की युवा पीढ़ी की चर्चा कर रही थी तो उन्होंने रोहित वेमुला खुदकुशी का उदाहरण दिया. उनके अनुसार भारत की युवा पीढ़ी संघर्ष के लिए कोई गुंजाइश ही नहीं छोड़ता.

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उनका जोर इस बात पर था कि हमारी युवा पीढ़ी साठ फीसदी से ज्यादा है, और हर बहस या मुद्दे को जातिवाद का रंग नहीं देना चाहिए. उनका तर्क है कि वेमुला की मौत विश्वविद्यालय शिक्षा के दबाव को देखते हुए किसी भी अन्य छात्र के आत्महत्या के जैसा ही था. उनके अनुसार हर खबर में मुस्लिम और दलित का लाना अनावश्यक है.

इस चर्चा में हिस्सा लेने वाली पी शिवकामी ने इस बात पर जोर दिया कि दोनों पक्षों को एक-दूसरे की बात सुनने और बोलने की जरूरत है. सरकार कुछ लोगों की बातें नहीं सुनती है. आईएएस अफसर सिर्फ राजनीतिक दबाव में हर बात को मानने के लिए बाध्य होते हैं.

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प्रख्यात दलित लेखक शिवकामी 28 सालों तक तमिलनाडु में आईपीएस अफसर रही हैं. उनका कहना है कि वो आईएएस होते हुए कुछ नहीं कर सकती हैं.

First published: 25 January 2016, 8:46 IST
 
दुर्गा एम सेनगुप्ता @the_bongrel

Feminist and culturally displaced, Durga tries her best to live up to her overpowering name. She speaks four languages, by default, and has an unhealthy love for cheesy foods. Assistant Editor at Catch, Durga hopes to bring in a focus on gender politics and the role in plays in all our interactions.

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