Home » कल्चर » Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 : Know the Love Story of Netaji Subhash Chandra Bose
 

सुभाष चंद्र बोस इलाज के लिए गए थे विदेश, इस लड़की को दे बैठे थे दिल

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 January 2020, 13:07 IST
(File Photo)

Subhash Chandra Bose Jayanti 2020 : भारत को आजाद कराने के लिए हजारों भारतीयों ने कुर्बानियां दीं. नेताजी सुभाष चंद्र बोस की कुर्बानी को भी भुलाया नहीं जा सकता. सुभाष चंद्र बोस (Netaji Subhash Chandra Bose) का जन्म 23 जनवरी 1897 को ओडिशा के कटक (Cuttack) में हुआ था. 18 अगस्त 1945 को एक विमान हादसे (Plane Crash) में ताइवान (Taiwan) की राजधानी ताइपे (Taipei) में उनका निधन हो गया. उनकी जयंती के अवसर पर आज हम आपको उनकी जिंदगी के उन पहलुओं के बारे में बताने जा रहे हैं जिनके बारे में बहुत कम लोग जानते हैं.

नेताजी सुभाष चंद्र बोस ने आजाद हिंद फौज (Azad Hind Fauj) की स्थापना की. जिसने अंग्रेजों के खिलाफ बिगुल फूंका. आजाद हिंद फौज ने अंग्रेजों हुकूमत की की नींद हिलाकर रख दी थी. बोस की जयंती पर हम आपको उनकी प्रेम कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं. बता दें कि नेताजी सुभाष चंद्र बोस साल 1934 में अपना इलाज कराने के लिए ऑस्ट्रिया गए थे.

उस समय उन्हें अपनी पुस्तक लिखने के लिए एक अंग्रेजी जानने वाले टाइपिस्ट की जरूरत थी. उसके बाद बोस के एक मित्र ने एमिली शेंकल नाम की एक ऑस्ट्रियन महिला से उनकी मुलाकात कराई. एमिली एक प्रसिद्ध पशु चिकित्सक की बेटी थीं. एमिली ने सुभाष के टाइपिस्ट के तौर पर काम करना शुरु कर दिया.

रोजाना होने वाली मुलाकातों की बदौलत सुभाष एमिली को दिल दे बैठे. एमिली भी उन्हें बहुत पसंद करती थीं. उसके बाद दोनों ने साल 1942 में बाड गास्टिन स्थान पर हिंदू रीति-रिवाज से विवाह कर लिया. उसके बाद ऑस्ट्रिया की राजधानी विएना में एमिली ने एक बच्ची को जन्म दिया.

बोस ने अपनी बेटी को पहली बार तब देखा जब वह एक महीने से भी कम की थी. बोस ने अपनी बेटी का नाम अनिता बोस रखा. अगस्त 1945 में ताइवान में हुई एक विमान दुर्घटना में सुभाष चंद्र बोस की मौत हो गई. उस वक्त अनिता केवल दो साल नौ महीने की थीं. आज भी अनिता बोस फाफ अपने पिता के परिवारजनों से मिलने कभी-कभी भारत आती हैं.

बोस ने अपनी प्रारंभिक शिक्षा कटक में ही हासिल की थी. उसके बाद आगे की पढ़ाई के लिए उन्हें कलकत्ता यूनिवर्सिटी भेज दिया गया. जहां उन्होंने यूनिवर्सिटी में दूसरा स्थान हासिल किया था. सुभाष के पिता उन्हें आईएएस बनाना चाहते थे, लेकिन बोस को अंग्रेजों की गुलामी पसंद नहीं थी. इसलिए चयनित होने के बाद भी उन्होंने अधिकारी बनने से इनकार कर दिया. साल 1921 में बोस पहली बार महात्मा गांधी से मिले. उसके बाद उन्होंने भारत की आजादी के लिए खुद को समर्पित करने का फैसला लिया था. सुभाष चंद्र बोस का देशप्रेम देखकर गांधी जी उन्हें देशभक्तों का देशभक्त कहा करते थे.

स्वामी विवेकानंद जन्मदिन: धर्म संसद में नहीं दिया जा रहा था बोलने का मौका, जब वे बोले तो दुनिया सुनती रह गई

जब अपने पसंदीदा वैज्ञानिकों को हटा कर आइंस्टीन ने अपने घर में लगाई महात्मा गांधी की तस्वीर

First published: 23 January 2020, 13:07 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी