Home » कल्चर » Teacher's Day 2020: 5 great teachers of India who gave inspiration to countless youth to move forward
 

Teacher's Day 2020: भारत के वो 5 महान शिक्षक जिन्होंने असंख्य युवाओं को दी आगे बढ़ने की प्रेरणा

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 September 2020, 15:18 IST

हमारे जीवन में शिक्षकों का सबसे बड़ा योगदान होता है क्यों कि वो ही हमें सही राह दिखाते हैं और जीवन में हमारा मार्गदर्शन करते हैं. एक शिक्षक बिना किसी स्वार्थ के अपने छात्रों को सही रास्ता दिखाते हैं और लक्ष्य को प्राप्त करने सबसे बड़ा योगदान देते हैं. यही कारण है कि हम शिक्षक दिवस को बड़े सम्मान के साथ मनाते हैं. भारत में हम हर साल 5 सितंबर को शिक्षक दिवस मनाते हैं जो भारत के दूसरे राष्ट्रपति डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन की जयंती भी है. यहां हम एक नज़र भारतीय इतिहास के कुछ महानतम शिक्षकों पर डाल रहे है.

डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम


डॉ. एपीजे अब्दुल कलाम भारत के 11वें राष्ट्रपति और इसरो के पूर्व प्रमुख थे. डॉ. कलाम ने भारत को अंतरिक्ष प्रौद्योगिकी (space technology) और ऐरोनॉटिकल (aeronautical) में सर्वोच्च दृष्टि प्रदान की. कलाम को मिसाइल मैन के रूप में जाना जाता है. डॉ. कलाम बच्चों के बहुत करीब थे और उन्होंने अपनी आत्मकथा सहित छात्रों को प्रेरित करने के लिए कई किताबें लिखीं. उन्होंने एक बार लिखा था "शिक्षण एक बहुत ही महान पेशा है जो व्यक्ति के चरित्र और भविष्य को आकार देता है. अगर लोग मुझे एक अच्छे शिक्षक के रूप में याद करते हैं, तो यह मेरे लिए सबसे बड़ा सम्मान होगा.”

चाणक्य

जब भारत के महान शिक्षकों की बात आती है, तो चाणक्य का नाम इस सूची में सबसे ऊपर आता है. भारतीय शास्त्रों में चाणक्य की शिक्षाओं को बड़े महत्व के रूप में देखा जाता है. उन्होंने पाटलिपुत्र के राजा को पाटलिपुत्र को विदेशी षड्यंत्रकारियों से बचाने के लिए प्रशिक्षित किया. चाणक्य ने लिखा “शिक्षा व्यक्ति की सबसे अच्छी मित्र है. एक शिक्षित व्यक्ति का हर जगह सम्मान किया जाता है. शिक्षा सुंदरता और जवानी को हरा देती है.”

स्वामी विवेकानंद

स्वामी विवेकानंद अपने अनुकरणीय लेखन, शिक्षाओं और उनके चित्रण के लिए जाने जाते हैं. कई बार स्वामी जी ने विदेशों में भारत का प्रतिनिधित्व किया. उन्होंने गुरुकुल प्रणाली का प्रचार किया, जहां घरों में बच्चों को बेहतर परवरिश देने के लिए स्कूलों में बदल दिया गया. उन्होंने छोटे बच्चों की जीवन शैली को बदल दिया और भारत में नियोजित शिक्षा का आंदोलन (movement of planned education) शुरू किया. स्वामी जी ने एक बार कहा था “आपको अंदर से बाहर की तरफ बढ़ना होगा. तुम्हें कोई नहीं सिखा सकता, कोई तुम्हें आध्यात्मिक नहीं बना सकता. कोई और शिक्षक नहीं है, बल्कि आपकी अपनी आत्मा है.”

 

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन

डॉ. सर्वपल्ली राधाकृष्णन मद्रास प्रेसिडेंसी कोलेज में प्रोफेसर थे और आध्यात्मिक शिक्षा पर जोर देते थे. उन्हें प्रशिक्षण प्राप्त करने वाले छात्र बहुत पसंद थे और वह उन्हें अपने घर पर मुफ्त व्याख्यान के लिए बुलाते थे. जब लोगों ने पूछा कि वे अपना जन्मदिन कैसे मनाना पसंद करेंगे तो उन्होंने जवाब दिया "मेरे जन्मदिन का जश्न मनाने के बजाय 5 सितंबर को शिक्षक दिवस के रूप में मनाया जाए तो मुझे गर्व होगा."

 

सावित्रीबाई फुले

सावित्रीबाई फुले भारत की पहली महिला शिक्षिका थीं जिन्होंने पहला महिला विद्यालय खोला. वह एक ऐसे समय में अछूत लड़कियों के लिए एक स्कूल खोलने के लिए लड़ीं, जब लड़कियों को ढकने के लिए मजबूर किया जाता था और उन्हें कम उम्र में शादी करने के लिए मजबूर किया जाता था. वह 'आधुनिक मराठी कविता' (modern Marathi poetry) की संस्थापक भी थीं. सावित्रीबाई फुले को ब्रिटिश सरकार ने शिक्षा में उनके योगदान के लिए सम्मानित भी किया था.

 

First published: 5 September 2020, 14:59 IST
 
अगली कहानी