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सैयद हैदर रजा: बिंदु से ब्रह्मांड रचने वाले रंगों के जादूगर

पाणिनि आनंद | Updated on: 10 February 2017, 1:48 IST
QUICK PILL
स्मृतिशेष

एक पूर्णविराम लग गया है, सांसों ने लय में चलना छोड़ दिया है और चेहरे पर एक शांति आ गई है. कैनवास पर कोई हलचल नहीं है. अपने मास्‍टर के इंतजार में ब्रश छूट गया है क्‍योंकि अब इनका फिर कभी इस्‍तेमाल नहीं होगा, रंग बॉटल में सूख रहे हैं. रजा साहेब ने दुनिया को अलविदा कह दिया है.

94 साल के रजा पिछले दो महीने से दिल्ली के एक अस्पताल में भर्ती थे. उन्‍हें 23 जुलाई से आईसीयू में रखा गया था, जहां आज थोड़े अंतराल में उन्‍हें दो बार दिल का दौरा पड़ा. मशहूर कवि और रजा साहेब के करीबी दोस्‍त अशोक वाजपेयी ने बताया कि जब उन्‍हें दूसरी बार दिल का दौरा सुबह 11 बजे पड़ा, तब मैं उनके साथ था. वाजेपयी ने संवेदना व्‍यक्‍त करते हुए कहा कि यह मेरे लिए व्यक्तिगत क्षति है.

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रजा साहेब का जन्‍म 22 मार्च, 1922 को हुआ था. रजा अमूर्त चित्रकार थे. उन्‍होंने रंगों और विचारों, दर्शन और हेलिक्स का साथ प्रयोग किया. गौर से देखें तो उनके चेहरे पर हमेशा समंदर की गहराई की तरह शांति रहती और उनकी आंखे हमेशा ऐसी लगती जैसे मनन में लीन हों. ये सारे भाव उनके काम में भी दिखाई देते थे.

दुनिया के बेहतरीन चित्रकारों में से एक रजा साहेब की ताकत रंगों में छिपी थी. उनके बारे में बात करते हुए उनके दोस्‍त वरिष्‍ठ कलाकार अखिलेश वर्मा कहते हैं कि मैंने उनकी तरह रंगों का बेहतरीन प्रयोग करते हुए किसी चित्रकार को नहीं देखा. वह अद्वितीय है. रजा की तरह रंगों का प्रयोग करने की कला अपने आप में अनूठी है.

रजा का दुनिया से अलविदा कहना प्रगतिशील कलाकारों के समूह के आखिरी स्‍तंभ की क्षति है. 1950 में रजा फ्रांस एक सूटकेस के साथ गए थे. उन्‍होंने वहां काम किया और उस दौर के बेहतरीन कलाकारों में से एक बने. रजा की पत्‍नी का इंतकाल 2002 में हुआ, जिसके बाद से वे मानसिक तौर पर संतुलन बनाने में असफल रहने लगे. रजा साहेब ने अपनी बीवी से वादा किया था कि फ्रांस में उन्‍होंने जो भी कमाया है वो सब छोड़ देंगे.

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आखिरकार 2010 में रजा ने अपना सारी संपत्ति, बैंक बैलेंस, तीन मकान अपनी नर्स को दे दिए, जिसने फ्रांस में उनकी मदद की थी. इसके बाद उन्‍‍होंने भारत में वापसी एक सूटकेस के साथ की.

उन्‍होंने अपने दोस्‍तों से अपनी आखिरी ख्‍वाहिश बताई थी कि उन्‍हें मरने के बाद मध्‍य प्रदेश के मंडला में दफनाया जाए, जहां उनके पिता को दफनाया गया था. उनकी अंतिम इच्छा को पूरा किया जा चुका है.

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हाल के दिनों तक रजा हर सुबह स्‍टूडियो पहुंच जाते थे. उनका पेंटिग के प्रति प्‍यार अविश्‍वसनीय था. रजा सारे युवाओं के लिए हमेशा एक प्रेरणा बने रहेंगे. उनके कठिन परिश्रम और कला के प्रति भावनाओं जैसा दूसरा कलाकार होना मुश्किल है.

रजा ने अपनी आंखें हमेशा के लिए बंद कर ली है. लेकिन उनकी बनाई पेंटिंग में वो हमेशा जिंदा रहेंगे. यहां उनकी पेंटिंग में बने कई बिंदु, सर्कल उन्‍हें हमेशा जिंदा रखेंगे, और उनके जीवन को उनकी आंखों के जरिए कैनवार पर दिखाते रहेंगे.

First published: 26 July 2016, 8:13 IST
 
पाणिनि आनंद @paninianand

सीनियर असिस्टेंट एडिटर, कैच न्यूज़. बीबीसी हिन्दी, आउटलुक, राज्य सभा टीवी, सहारा समय इत्यादि संस्थानों में एक दशक से अधिक समय तक काम कर चुके हैं.

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