Home » कल्चर » Tirupati trouble: Four crores cash in demonetised notes of Rs. 500 and Rs. 1,000
 

4 करोड़ का ये कैसा दान, जिससे तिरुपति मंदिर है परेशान

कैच ब्यूरो | Updated on: 3 March 2017, 12:59 IST

तिरुपति मंदिर जिसकी गिनती हिंदुओं के सबसे अमीर मंदिरों में होती है, इन दिनों एक अजीबोग़रीब मुश्किल से जूझ रहा है. हिॆंदुओं का वेटिकन कहे जाने वाले आंध्र प्रदेश के इस मंदिर को करोड़ों के चढ़ावे और दान के लिए जाना जाता है, लेकिन अब यही पैसा मंदिर प्रशासन के लिए मुसीबत का सबब बन गया है.  

दरअसल प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 8 नवंबर को पांच सौ और एक हजार रुपये के नोट को प्रचलन से बंद करने की घोषणा की थी. इन पुराने नोटों को 30 दिसंबर तक जमा किया जा सकता था. लेकिन तिरुपति मंदिर में 30 दिसंबर के बाद हुंडियों (दानपात्र) में भक्तों ने पांच सौ और एक हजार रुपये के पुराने नोट डाल दिए. 

500-1000 के पुराने नोट का चढ़ावा

आंध्र प्रदेश में भगवान वेंकटेश्वर के मशहूर मंदिर में पिछले दो महीनों के दौरान भक्तों और श्रद्धालुओं ने तकरीबन चार करोड़ रुपये मूल्य के बंद हो चुके 500 और 1000 रुपये के नोट दान किए हैं. अब मुश्किल ये है कि इन पैसों को न तो जमा किया जा सकता है और न ही बदलवाया जा सकता है.

यह मुश्किल इसलिए भी ज्यादा बड़ी है क्योंकि सरकार के ताज़ा कानून के तहत 10 से ज़्यादा संख्या में बंद किए जा नोटों को रखना अपराध है, जिसके लिए कम से कम जुर्माना 10,000 रुपये निर्धारित किया गया है.

तिरुमला तिरुपति देवस्थानम के कार्यकारी अधिकारी डी संबाशिवा राव का कहना है, "पुरानी मुद्रा में चार करोड़ रुपये से अधिक की राशि मंदिर में चढ़ाई गई है. मंदिर प्रशासन ने सरकार और भारतीय रिजर्व बैंक को इस सिलसिले में चिट्ठी लिखी है."

क्यों ख़ास है तिरुपति

आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में स्थित वेंकटेश्वर मंदिर भारत के बड़े तीर्थस्थलों में से एक है. हर साल यहां लाखों की तादाद में श्रद्धालु दर्शन के लिए आते हैं. एक अनुमान के मुताबिक यहां सामान्य दिनों में रोज़ाना 60 हज़ार से ज़्यादा भक्त पहुंचते हैं. वहीं किसी ख़ास उत्सव के मौके पर ये संख्या कहीं ज्यादा होती है.

समुद्र तल से 3200 फीट की ऊंचाई पर स्थिम तिरुमला की पहाड़ियों पर बना वेंकटेश्वर मंदिर आकर्षण का केंद्र है. तिरुमला तेलुगू शब्द है, जिसका मतलब होता है सात पहाड़ियां. सात पहाड़ियों को पार करके मंदिर तक पहुंचा जाता है. यह मंदिर दक्षिण भारतीय वास्तुकला और शिल्प कला की अनूठी मिसाल है. तमिल के शुरुआती साहित्य में से एक संगम साहित्य में तिरुपति को त्रिवेंगदम कहा गया है.

First published: 3 March 2017, 13:19 IST
 
अगली कहानी