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Valentine's Day : पति की कब्र के साथ दफन होना चाहती थी ये महिला, 38 साल तक किया था इंतजार

कैच ब्यूरो | Updated on: 14 February 2019, 14:12 IST
(प्रतीकात्मक फोटो)

दुनियाभर में 14 फरवरी का दिन वैलेंटाइन डे के रूप में मनाया जाता है. इस दिन को प्यार के प्रतीक के रूप में मनाया जाता है. इस दिन प्रेमी युगल एक-दूसरे को उपहार देते हैं और जीवन भर साथ रहने का वादा करते हैं. वैलेंटाइन डे के मौके पर आज हम आपको एक ऐसी कहानी बताने जा रहे हैं जिसे बेमिसाल प्यार के रूप में देखा जाता है. हम बात कर रहे हैं हिमाचल प्रदेश के सिरमौर जिले में स्थित एक कब्र की.

इस कब्र की कहानी रियासतकाल के दौर की है. ये कब्र एक ब्रिटिश दंपति की है. इस दंपति की कहानी आज भी यहां सुनाई जाती है. दरअसल, ये कहानी सिरमौर के नाहन कस्बे के ऐतिहासिक विला राउंड स्थित कैथोलिक कब्रगाह में ब्रिटिश मेम की प्रेम कहानी से जुड़ी है. महाराजा शमशेर प्रकाश के शासनकाल के दौरान सिरमौर के चीफ मेडिकल ऑफीसर डॉ. इडविन पियरसाल की पत्नी मैडम लूसिया पिसरसाल पति के निधन के बाद भी वापस वतन नहीं लौटीं.

बताया जाता है कि मैडम लूसिया पिसरसाल अपने पति की कब्र के साथ ही दफन होना चाहती थी. इसीलिए वो वापस अपने वतन नहीं गईं. बता दें कि डॉ. इडविन पियरसाल की कब्र नाहन शहर के ऐतिहासिक विला राउंड में ही स्थित हैबताया जाता है कि ब्रिटिश मैम करीब 38 साल तक यहीं पर रहीं. इतिहासकारों के मुताबिक डॉ. पियरसाल ने 11 साल तक महाराजा को अपनी सेवाएं दीं. इसी दौरान 19 नवंबर, 1883 में उनकी मृत्य हो गई. उस समय उनकी उम्र 50 साल थी. महाराजा ने डॉ. पियरसाल को पूरे सैनिक सम्मान के साथ नाहन के ऐतिहासिक विला राउंड में दफन किया.

 

हिस्ट्री ऑफ सिरमौर में भी डॉ. पियरसाल का जिक्र आता है. इतिहासकारों के मुताबिक, जब उनका निधन हुआ, उस समय लेडी लूसिया 49 साल की थीं. 1885 में लूसिया ने अपने पति की कब्र को पक्का करवाने के लिए बहुत पैसा खर्च किया. उसके बाद वो कभी इंग्लैंड लौटकर नहीं गईं. वो चाहतीं थीं कि जब उन्हें मौत आए तो वे पति की कब्र के साथ ही दफन हों.

अपनी इस इच्छा को पूरा करने के लिए लेडी लूसिया ने करीब 38 साल तक अपनी मौत का इंतजार किया. 19 अक्तूबर 1921 को उनकी मृत्यु हो गई. उसके बाद उनकी अंतिम इच्छा को पूरा करते हुए महाराजा ने सम्मान सहित लूसिया को भी उनके पति डॉ. पियरसाल की कब्र की बगल में दफनाया. इतिहास की कई किताबों में उनकी इस कहानी का जिक्र मिलता है.

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First published: 14 February 2019, 14:12 IST
 
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