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नहीं रहा पंडित नेहरू का 'उत्साही' शायर

सुधाकर सिंह | Updated on: 10 February 2017, 1:38 IST
(रेख्ता)

मशहूर शायर और पूर्व राज्यसभा सदस्य पद्मश्री बेकल उत्साही का निधन हो गया है. दिल्ली के राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज के दौरान वे नहीं रहे. 88 साल के बेकल उत्साही दिल्ली के साउथ एवेन्यू स्थित आवास में अपने बाथरूम में गिर गए थे.

उनकी बेटी डॉक्टर सूफिया के मुताबिक बेकल उत्साही को आरएमएल अस्पताल में भर्ती कराया गया. बेटी सूफिया के मुताबिक उनको ब्रेन हैमरेज हो गया था. बेकल उत्साही को राजीव गांधी के कार्यकाल में साल 1986 में राज्यसभा भेजा गया था.

मोहम्मद शफी खान से बेकल उत्साही तक

एक जून 1928 को बेकल उत्साही का जन्म उत्तर प्रदेश के बलरामपुर (तत्कालीन गोंडा) जिले के उतरौला कस्बे के रमवापुर गांव में हुआ था. उनके पिता का नाम लोदी मोहम्मद जफर खान था. 

परिवार के लोगों ने उनका नाम मोहम्मद शफी खान रखा, लेकिन बाद में एक सभा के दौरान उनकी काव्य शैली से प्रभावित होकर देश के पहले प्रधानमंत्री पंडित जवाहर लाल नेहरू ने उनके नाम के साथ उत्साही जोड़ दिया.

अपनी अवधी शायरी के लिए बेकल उत्साही ख़ासे मशहूर रहे हैं. इसके अलावा वे दूरदर्शन के कार्यक्रमों में बतौर होस्ट की भूमिका भी निभा चुके हैं. शेरो-शायरी से जुड़े बज्म नाम के डीडी के कार्यक्रम में वे होस्ट रहे.

देशभर में साहित्य और कवि सम्मेलनों क हिस्सा बनने के साथ ही अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी वे कवि सम्मेलन में शिरकत करते रहे. 1976 में साहित्य के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें पद्मश्री अवॉर्ड से नवाजा गया.

First published: 3 December 2016, 12:23 IST
 
सुधाकर सिंह @sudhakarsingh10

कैच हिंदी, अवध के बलरामपुर से ज़िंदगी के सफ़र की शुरुआत. पत्रकारिता की यात्रा दिल्ली में जारी.

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