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स्मृति ईरानीजी सिसरो ने भावुकता और क्रोध से बचने की भी सलाह दी थी

रंगनाथ सिंह | Updated on: 5 May 2016, 19:18 IST

बुधवार को केंद्रीय मानव संसाधन मंत्री स्मृति ईरानी ने संसद में रौद्र और वीर रस से ओतप्रोत भाषण दिया. उनके समर्थकों में उनके भाषण से खुशी की लहर दौड़ पड़ी. गृहमंत्री राजनाथ सिंह से उम्मीद की जा रही थी कि वो बताएंगे कि उन्हें हाफिज सईद के जेएनयू एंगल के बारे में कहां से जानकारी मिली थी,  लेकिन उन्होंने ये कहकर किनारा कर लिया कि स्मृति ईरानी की स्पीच के बाद उनके पास कहने के लिए कुछ नहीं बचा है, और अगर कुछ बचा भी है तो उन्होंने गोपनीयता के शपथ ले रखी है.

ईरानी के भाषण से साधारण के अलावा असाधारण जन भी काफी प्रभावित हुुए. फिल्म स्टार ऋषि कपूर और बीजेपी सांसद परेश रावल तो उनके भाषण से परम आह्लादित हुए ही, भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को भी लगा कि ईरानी के भाषण से 'सत्य की जीत' हुई है. उन्होंने ईरानी के भाषण को ट्विटर पर सत्यमेव जयते कहते हुए ट्वीट किया.

बुधवार को संसद में तृणमूल कांग्रेस के नेता सुगत बोस के भाषण की भी काफी प्रशंसा हुई. हैरत की बात ये है कि सुगत बोस ने सरकार की आलोचना में राष्ट्रगान के रचयिता हिंदुस्तानी विचारक रबींद्रनाथ टैगोर को कोट किया तो राष्ट्रवादी स्मृति ईरानी ने रोमन विद्वान मार्कस सिसरो (106 ईपू से 43 ईपू) को.

हमें क्रोध से कोसों दूर रहना चाहिए, क्योंकि क्रोध में कुछ भी उचित या न्यायपूर्ण नहीं किया जा सकता

स्मृति ईरानी ने सिसरो का जो कोट भारतीय संसद में उद्धृत किया वो कुछ यूं है, "एक राष्ट्र मूर्खों और महत्वाकांक्षियों को सहन कर सकता है. लेकिन वो आंतरिक विद्रोह नहीं सह सकता. सीमा पर मौजूद दुश्मन कम खतरनाक होता है, क्योंकि उसके बारे में हमें पता होता है और वो खुलकर सामने आता है. लेकिन हमारे बीच मौजूद गद्दार हमारी सीमा के भीतर खुला घूमता है, उसकी मक्कारी भरी साजिशें हमारे आस-पास होती है, जिन्हें राजप्रसादों में भी सुना जा सकता है. वो गद्दार, गद्दार जैसा नहीं दिखता, वो उन लोगों की भाषा में बात करता है जिन्हें वो शिकार बनाने वाला है, वो अपने शिकार के जैसा ही चेहरा और तर्क अख्तियार कर लेता है. वो उन क्षुद्रताओं को जगाने की कोशिश करता है जो हर मनुष्य के मन की गहराइयों में दबी होती हैं. वो देश की आत्मा में सड़ांध पैदा कर देता है, वो गुप्त और अज्ञात तरीके से काम करता है, जिसका शहर की इमारतों को भी पता नहीं चलता, वो देश की राजनीति में इस तरह घुस जाता है कि उसका विरोध करना संभव नहीं रह जाता. किसी हत्यारे से भी ज्यादा हमें उससे डरना चाहिए."

इसके बाद ईरानी ने कहा, "मैं चाणक्य का वर्णन करती तो लोग कहते कि सैफरन है, इसलिए आज एक रोमन फिलासफर को कोट किया."

सिसरो के बारे में यहां ये बताना जरूरी है कि उन्होंने जूलियस सीजर की हत्या का सर्मथन किया था. सीजर की हत्या के बाद सीजर के समर्थक मार्क एंटनी को अभयदान दिलवाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभायी थी. उसके बाद भी दोनों के बीच राजनीतिक प्रतिद्वंद्विता बदस्तूर जारी रही. सिसरो ने एंटनी के खिलाफ रोमन संसद में लगातार 14 भाषण दिए थे. सत्ता संघर्ष में आखिरकार एंटनी समर्थकों की जीत हुई और सिसरो का सिर और हाथ काटकर एंटनी के दरबार में लाया गया था.

भावनाओं में वही बहता है जो तर्क का बिल्कुल प्रयोग नहीं करता

ईरानी द्वारा उद्धृत ये कोट हमें इंटरनेट पर हूूबहू मिल गया. समयाभाव के कारण मंत्रीजी उनके दूसरे वचनों को शायद न देख पाई हों, इसलिए हमने सिसरो के कुछ और कोट खास उनके लिए चुने हैं. 

  • उन लोगों की बात नहीं सुननी चाहिए जिन्हें लगता है कि हमें अपने शत्रुओं के संग गुस्से से पेश आना चाहिए, और उन्हें लगता है कि ये महान और पुरुषोचित तरीका है. दया और क्षमा से ज्यादा प्रशंसनीय कुछ भी नहीं, ये गुण किसी महान और श्रेष्ठ आत्मा की सबसे बड़ी पहचान हैं.
  • हमें क्रोध से कोसों दूर रहना चाहिए, क्योंकि क्रोध में कुछ भी उचित या न्यायपूर्ण नहीं किया जा सकता.
  • भावनाओं में वही बहता है जो तर्क का बिल्कुल प्रयोग नहीं करता.
  • वैचारिक प्रतिस्पर्धा के दो तरीके होते हैं, एक संवाद और दूसरा ताकत. इनमें पहला तरीका सभ्य इंसान का है, दूसरा जानवरों का.
  • अंध-विश्वासों को मिटाना धर्म को मिटाना नहीं है.
  • मैं दूसरों की कमी निकाल कर नहीं, बल्कि कुछ रचनात्मक करके आलोचना करता हूं.
  • बुद्धिमान लोग तर्क से संचालित होते हैं, साधारण लोग अनुभव से, मूर्ख अपनी जरूरत से और क्रूर लोग आदिम वृत्तियों से.
  • कभी अतिवादी न बनें, उदारता को ही अपना पथप्रदर्शक बनाएं.
  • जो नैतिक रूप से गलत है वह कभी भी लाभदायक नहीं हो सकता. भले ही इससे आपको बढ़त मिल जाए और आप उसे अपना फायदा समझने लगें. ये सोचना भी घातक है कि किसी गलत काम से हमें फायदा मिल सकता है.
  • जिन लोगों ने हमारे साथ गलत किया उनके प्रति भी हमारा कुछ दायित्व होता है. आखिरकार, बदले और सजा की भी एक सीमा होती है.
First published: 5 May 2016, 19:18 IST
 
रंगनाथ सिंह @singhrangnath

पेशा लिखना, शौक़ पढ़ना, ख़्वाब सिनेमा, सुख-संपत्ति यार-दोस्त.

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