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साल 2016: देशभक्तों के नाम रहा पूरा साल

श्रिया मोहन | Updated on: 10 February 2017, 1:38 IST

वसुधैव कुटुंबकम की अवधारणा में विश्वास करने के नाते हम इस बात पर सहमत हो सकते हैं कि 2016 का साल किसी का भी वर्ष नहीं रहा. बिल्कुल ठीक, सिवाय तीन लोगों के- डोनाल्ड ट्रम्प, नाइजेल फराज (ब्रिटेन के यूरोपीय संघ छोडऩे के लिए सफ़ल अभियान चलाने वाले यूनाइटेड किंगडम इंडिपेन्डेंट पार्टी के पूर्व नेता) और नरेन्द्र मोदी.

हालांकि, भारत के लिहाज से 2016 एक ऐसा साल भी रहा है जब कुछ लोगों ने कुछ लोगों को उनकी विविधिताओं और उनके भिन्न विचारों के कारण निजी और राजनीतिक वजहों से घृणा भरी नजर से देखा गया.

पिछले साल सितम्बर में दादरी में गौमांस रखने के आरोप में मोहम्मद एखलाक की पीट-पीटकर की गई हत्या के बाद से यह संक्रमण तेजी से बढ़ा. देशभक्ति की परिभाषा क्या है, देशभक्ति को लेकर स्वीकार्य अभिव्यक्ति की परिभाषा और एक देश के प्रति प्रेम की भावना परस्पर आपस में टकराते रहे. इसकी कल्पना और आलोचना के लिए कोई जगह ही नहीं बची.

राष्ट्रवाद की अभिव्यक्ति

वर्ष 2016 में देशभक्त कौन है, कौन ज्यादा स्याह और कौन ज्यादा स्वच्छ, इसे कभी परिभाषित नहीं किया गया. भारतीय देशभक्त पाकिस्तान के खिलाफ की गई सर्जिकल स्ट्राइक की ऊंचे स्वर से तारीफ करते हैं, नोटबंदी के बाद बैंकों के सामने लम्बी कतारों में लगने को देश के लिए सीमा पर गोली खाने के समान मानते हैं और सुप्रीम कोर्ट के यह महत्वपूर्ण आदेश कि देशभर के सभी सिनेमाघरों में फिल्म शुरू होने से पहले राष्ट्रीय गान ज़रूर बजेगा, की सराहना करते हैं, साथ ही इस बात की भी निन्दा करते हैं कि करीना कपूर और सैफ अली खान ने अपने नवजात शिशु का नाम तैमूर क्यों रखा?

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी को मिल रहे भारी समर्थन और उनके विचारों का समर्थन पाकर सालों पुराने मुद्दे एक बार फिर धरातल पर नए अवतार में प्रकट हो गए हैं. देशभक्त सोचते हैं कि सब कुछ के बावजूद भारत एक हिन्दू राष्ट्र है जिसकी रामजन्मभूमि पर मजबूत दावेदारी होनी चाहिए. वे आपस की बातचीत में कहते हैं कि हम मुस्लिमों और दलितों को अपने में समाहित करने के लिए हमेशा ही क्यों झुकते रहें. अब बहुत हो गया.

ऐसे लोगों का मानना है कि जेएनयू पर होने वाला खर्च करदाताओं के धन का बेजा इस्तेमाल है. इसे बंद कर देना चाहिए. दलितों का आक्रोश मीडिया की देन है. असंतुष्ट किसान और दिहाड़ी मजदूर नोटबंदी के पीछे के विज्ञान को समझ पाने में असफल हैं. जब आप देश के प्रति अपने कर्तव्यों का निर्वहन करने में विफल हैं तो आपको अपने अधिकारों के बारे में बातें क्यों करनी चाहिए. स्वच्छ भारत इंडिया को सिंगापुर में बदल देगा और नरेन्द्र मोदी हमारे मसीहा होंगे.

ऐसे लोगों का कहना है कि एक ऐसा आदमी आया है जिसने भारत को फिर से महान बनाने के लिए अपना सब कुछ न्यौछावर कर दिया है और आप सब लोग मिलकर उनकी आलोचना कर रहे हैं. क्या आज कोई ऐसा है जो प्रधानमंत्री के रूप में उनकी जगह बैठाया जा सकता है? नहीं ना? उनका यह अटूट विश्वास राष्ट्र को सवालों से बुलेट प्रूफ कवच प्रदान करता है.

भक्त से बढ़कर हैं देशभक्त

भक्त और देशभक्त के बीच बहुत ही सूक्ष्म अंतर है. भक्त अंधभक्ति के कारण अपने नेता के कार्यों का बचाव करता है और देशभक्त किसी से भी ऊपर है और देश को डिफेन्ड करता है. दोनों में कभी भी ज्यादा सहजीवी सम्बंध नहीं रहा है.

यदि वर्ष 2016 की घटनाओं पर नजर डालें तो देश के खास विचारों की नक्काशी करने में ये भक्त सबसे आगे रहे हैं. भक्तों ने जन नीतियों और गवर्नेन्स से जुड़ी सभी चीजों में राष्ट्रवाद को आगे किया है, उसे आकार देने में महती भूमिका निभाई है. चाहे वह स्वच्छ भारत हो, जनधन खाते हों, नोटबंदी हो, भारत को डिजिटल बनाना हो अथवा सर्जिकल स्ट्राइक हो या भारत की विदेश नीति का मामला हो. जन नीतियों को बनाने या क्रियान्वित करने में इनकी राष्ट्रवाद की भावना इतनी भावनात्मक रूप से कभी नहीं उभरी.

राष्ट्र में इस तरह के खास विचारों को न तो कभी नीतिबद्ध किया गया और न ही प्रसारित किया गया. देशभक्त, जिनमें से ज्यादातर गैर भक्त हैं, भारत को महान बनाने के वादे को स्वीकार करने में असहज से दिखते हैं, उन्हें इस तरह के वादे सहन करने में परेशानी होती है. दूसरी तरफ लोगों की भारी भीड़ के सामने सरकार के दाढ़ीधारी सुप्रीमो अपनी ऊंची होती आवाज में हर चीज को देश प्रेम और देशद्रोह के चश्मे से दिखाने की कोशिश करते हैं.

राष्ट्रगान लिखने के बाद रवीन्द्र नाथ टैगोर ने कहा था, 'जब तक मेरी सांस है, मैं कभी देशभक्ति को मानवता के ऊपर हावी नहीं होने दूंगा.' 2016 में, टैगोर का डर सच होता दिखाई देता है. देशभक्त तो बने रहेंगे और बाहुबल उसका एक तरीका होगा जो कि ऐसे लोगों को चुप करने के काम आएगा जो मानवता के पक्ष में बोलते हैं न कि राष्ट्र के.

First published: 24 December 2016, 8:13 IST
 
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