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जाकिर नाइक वह नेतृत्व नहीं हैं जिसकी मुसलमानों को दरकार है, अल्लाह का शुक्र है!

लमत आर हसन | Updated on: 10 February 2017, 1:49 IST

पिछले एक सप्ताह से मेरे इनबाॅक्स में संदेशों की बाढ़ सी आ गई है. मुझे ऐसा लगा था कि यह तमाम संदेश मेरे मित्रों और परिजनों ने मुझे ईद की मुकारकबाद देनेे के लिये किये थे, लेकिन ऐसा नहीं था. मेरे मोबाइल से लगातार आ रही बीप-बीप इस्लाम के स्वयंभू उपदेशक जाकिर नाइक के लिये समर्थन की गुजारिश करने वालों के संदेश थे.

जी हां, इसी व्यक्ति के बारे में मैंने करीब एक वर्ष पहले एक लेख लिखा था जिसमें मैंने इसे विरोधाभासों का पुलिंदा कहा था. मुझे सबसे बड़ा ताज्जुब इस बात पर हुआ कि आखिर क्यों यह व्यक्ति उदारवादी मुसलमानों को पीछे की ओर ले जा रहा है. और कैसे उसकी यह तकरीरें मुसलमानों और उसके शब्दों में कहें तो, ‘‘गैर-मुसलमानों’’ के बीच की खाई को चौड़ी कर रही हैं.

मैंने उसे विरोधाभासों का पुलिंदा इसलिये कहा था क्योंकि वह एक डिग्रीधारी डाॅक्टर है जो बेहद सहजता के साथ कुरान, बाइबल और गीता को उद्धत करते हुए इस्लाम के उपदेश देता है. वह धाराप्रवाह अंग्रेजी बोलते हुए अपने दृष्टिकोण को दुनिया के सामने रखता है और साथ ही पश्चिमी सूट के साथ गोल टोपी पहनता है ताकि प्रतीकवाद न खोने पाए. 

वह वैज्ञानिक तथ्यों और तर्कों के साथ इस्लाम से संबंधित गलत धारणाओं को स्पष्ट करने का प्रयास करते हैं. लेकिन अंतिम परिणाम अक्सर विकृत संदेश के रूप में सामने आता है. विरोधाभासी और भ्रमित करने वाला संदेश. ऐसे संदेश जो सुनने में तो प्रगतिशील लग सकते हैं लेकिन रूढ़ीवादी और अवसरवाद से भरे होते हैं.

यह बेहद दुर्भाग्यपूर्ण है कि बीते 16 वर्षों से नाइक इस्लाम के वंडर ब्वाॅय के रूप में खुद को स्थापित करते हुए कई पुरस्कार जीतने के साथ दुनियाभर की सैर कर रहा है और व्याख्यान देता आ रहा है और भारत और दुनिया भर के अधिकतर शिक्षित मुसलमानों के लिये इस्लाम के उदारवादी चेहरे के रूप में स्थापित होने में सफल हुआ है. इस्लाम पर अंतिम शब्द, एक ऐसा इस्लाम जिसे मुसलमान गले लगाना चाहते हैं और यह काफी चिंताजनक है.

समर्थन की आवाजें

यह वह वर्ग है जो पूरी तरह से खुलकर उसके समर्थन में आ गया है. तीन दिन पूर्व मुझे अपने एक सहपाठी से यह संदेश मिलाः

‘‘मुंबई की एक पाॅश आवासीय सोसाइटी में दो किशोरवय लड़कों ने पूरे दिन क्रिकेट खेलकर लोगों को परेशान कर दिया. उन्होंने कई खिड़कियों के शीशे तोड़ दिये और शांति को भंग किया. सोसाइटी के उपाध्यक्ष ने इस उपद्रव के लिये विराट कोहली के खिलाफ पुलिस में मामला दर्ज करवाया है.

अपनी शिकायत में उसने कहा है, ‘‘ऐसा लगता है कि ये किशोर सोशल मीडिया पर विराट को फाॅलो करते हैं और इस प्रसिद्ध क्रिकेटर के बल्लेबाजी कौशल से काफी प्रभावित हैं. कोहली ही इन्हें क्रिकेट खेलने के लिये प्रेरित कर रहा है जो पड़ोसियों की परेशानी का सबब बनता जा रहा है.’’ सोशल मीडिया पर सैंकड़ों की संख्या में शांति प्रेमी इस आवासीय सोसाइटी के समर्थन में सामने आए हैं. 

#RIPLOGIC #IStandwithZakir’’

और यह खासा लंबा-चौड़ा संदेश एक खासे प्रगतिशील मित्र की जानिब से आया था.

उसने दुनिया में अल्लाह के कहे का प्रचार-प्रसार करने के लिये अपने मेडिकल करियर का बलिदान कर दिया.

एक वृहद जनसमूह तक पहुंचने के लिये

उसने अल्लाह के कहे का का प्रसार करने के लिये केबल आॅपरेटरों को इस्लामी व्याख्यानों को प्रसारित करने का अनुरोध किया

एक वृहद जनसमूह तक पहुंचने के लिये

उन्होंने स्पष्ट इंकार कर दिया और उसने अल्लाह के कहे का प्रसार करने के लिये केबल आॅपरेटरों को भुगतान किया

एक वृहद जनसमूह तक पहुंचने के लिये

उन्होंने केबल आॅपरेटरों को धमकाया और प्रसारण बंद करवा दिया. इसके बाद उसे अल्लाह के कहे को दुनिया तक पहुंचाने के लिये अपना टीवी चैनल (पीस टीवी) शुरू करना पड़ा

एक वृहद जनसमूह तक पहुंचने के लिये

उन्होंने पीस टीवी पर प्रतिबंध लगाते हुए उसका प्रसारण बंद कर दिया. इसके बाद उसे अल्लाह के कहे का प्रसार करने के लिये अपना सेट टाॅप बाॅक्स और लाइव स्ट्रीमिंग वाली एक वेबसाइट प्रारंभ करनी पड़ी और अब उसकी पहुंच अधिक लोगों तक हो गई.

अब वे उसे रोकने के लिये कुछ नहीं कर सकते थे क्योंकि वह इंटरनेट पर राज कर रहा है. तो अब वे उसके खिलाफ अपशब्द बोलने, मानहानि करने, बदनामी करने और ‘‘आतंकवाद को बढ़ावा देने’’ के झूठे आरोप मढ़ रहे हैं. ऐसा करते हुए वे यह भूल रहे हैं कि उन्होंने उसे हर राष्ट्रीय चैनल की सुर्खी बना दिया है और इस बार भी एक वृहद जनसमूह तक पहुंचने के लिये.

एक बड़ी संख्या में ऐसे लोग जो अभी तक उसके बारे में जानते तक नहीं थे अब उसके बारे में सच्चाई तलाशने का प्रयास करेंगे जिसमें सिर्फ उसकी बेगुनाही ही सामने आएगी और साथ ही वे इस्लाम को भी उसी तरह पाएंगे जैसे और लोग पूर्व में पाते आए हैं.

इंशा-अल्लाह

इसके बाद चेंजडाॅटओआरजी पर उसके पक्ष में याचिका पर दस्तखत करने के लिये अनुरोध जारी हुआ- ‘‘भारतीय मीडियाः डाॅ. जाकिर नाइक के खिलाफ चलाया जा रहा निंदा अभियान बंद करो’’

दस्तखत अभियान पर आई प्रमुख टिप्पणियां

मैं डाॅ. नाइक कि टिप्पणी ‘‘प्रत्येक मुसलमान को आतंकवादी बनना चाहिये’’ की व्याख्या की कोई परवाह नहीं करता. या फिर किस तरह से इसे संदर्भ से हटाकर प्रस्तुत किया गया. साथ ही मैं इस्लाम के प्रसार के लिये उनके द्वारा किये गए बलिदानों से इंकार कर रहा हूं.

मेरी सबसे बड़ी दिक्कत यह है कि वह ऐसा टिप्पणियां कर देश के मुसलमानों को भ्रमित क्यों कर रहा है. उम्माह को यह बताना कि अगर कोई उन्हें आतंकी कहे तो शर्मिंदा न महसूस करें एक अलग बात है और इस बात को कहना एक बिल्कुल अलग बात है कि जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ लड़ाई लड़ी थी वे उनके लिये आतंकी थे, लेकिन भारतीयों के लिये वे स्वतंत्रता सेनानी या देशभक्त हैं.

क्या वह अपनी बात को समझाने के लिये दूसरे समझदारी भरे शब्द नहीं इस्तेमाल कर सकते थे. क्या उन्हें अपने शक्तिशाली प्रभाव का प्रयोग मुसलमानों को आतंक से दूर रहने के लिये समझाने में नहीं करना चाहिये था?

‘‘इस्लाम, आतंकवाद और जिहाद’’ पर उनके व्याख्यानों के कुछ और अंश

  1. 9/11 के बाद इस्लाम को बदनाम करने के लिये हजारों किताबों का प्रकाशन किया गया है
  2. मुसलमानों को कट्टरपंथी के रूप में पेश किया गया है. इस शब्द की उत्पत्ति मूल रूप से प्रोटेस्टेंट इसाइयों को वर्णित करने के लिये हुई थी. बाद में आॅक्सफोर्ड शब्दकोश ने इसका मतलब संशोधित कर उन लोगों के रूप में कर दिया जो किसी एक धर्म की अवधारणा में यकीन करते हैं, विशेषकर इस्लाम.
  3. मैं एक कट्टरपंथी मुसलमान हूं और मुझे इसपर गर्व है. क्योंकि मुझे पता है कि मैं इस्लाम की बुनियादी बातों का पालन करने का प्रयास करता हूं और ऐसा करता रहूंगा.
  4. मुसलमानों को चरमपंथी कहा जाता है. आखिर मुसलमान बचाव की मुद्रा क्यों अपनाएं? मैं एक उग्रवादी हूं. बेहद ईमानदार और उदार.
  5. मुसलमानों को आतंकवादी कहा जा रहा है. एक चोर के लिये पुलिसकर्मी आतंकी है. जिन्होंने अंग्रेजों के खिलाफ युद्ध किया वे आतंकी थे लेकिन भारतीयों के लिये वे देशप्रेमी और स्वतंत्रता सेनानी थे.
  6. भगत सिंह अंग्रेजों के लिये आतंकी थे और हमारे लिये देशभक्त. हम अंग्रेजों से तो सहमत नहीं हो सकते. तो फिर हम मुसलमानों को आतंकवादी कहकर उनके साथ क्यों सहमत हो रहे हैं?
  7. जब अंग्रेज अमरीका पर राज करते थे तो वे जाॅर्ज वाॅशिंगटन को आतंकी नं. 1 कहते थे. आगे चलकर वे अमरीका के पहले राष्ट्रपति बने.
  8. नेल्सन मंडेला भी आतंकी नं. 1 थे. आगे जाकर उन्हें शांति के लिये नोबेल पुरस्कार से नवाजा गया.
  9. दुनिया में जिहाद शब्द को सबसे अधिक गलत तरीके से परिभाषित और समझा गया है. इस शब्द की उत्पत्ति ‘‘जहादा’’ शब्द से हुई है जिसका मतलब संघर्ष होता है. समाज को बेहतर बनाने का संघर्ष.
  10. सबसे बेहतर जिहाद वह है जिसमें इस्लाम पर विश्वास न करने वालों के बीच कुरान के संदेश को फैलाने के लिये संघर्ष किया जाता है.

अपराधबोध का इस्लाम

कुरान के सबसे महत्वपूर्ण सुराह में से एक, जो अधिकतर मुसलमान दिल से जानते हैं का अनुवाद है, ‘‘आप अपने धर्म को मानो और मुझे मेरे धर्म को मानने दो.’’

डाॅ. नाइक जानते-बूझते अपनी तकरीरों में इस सुराह को उद्धत करना भूल जाते हैं. इसके बजाय वे निम्नलिखित तकरीर करते हुए मुसलमानों के बीच अपराध बोध फैलाने का प्रयास करते हैं कि वे इस्लाम के प्रसार के लिये पर्याप्त नहीं कर रहे हैंः

  • इस्लाम का संदेश फैलाना सभी मुसलमानों के लिये फर्द (अनिवार्य) है.
  • सुराह अस्र मानवजाति के लिये पर्याप्त मार्गदर्शन है और यह कहता है कि अगर मुसलमान गैर-मुसलमानों के बीच इस्लाम के संदेश का प्रसार नहीं करेंगे तो वे जन्नत (स्वर्ग) नहीं जाएंगे.
  • इस्लाम अमरीका में सबसे तेजी से फैलता धर्म है.
  • 9/11 के बाद 34 हजार अमरीकियों और 20 हजार यूरोपीयों ने इस्लाम स्वीकार किया है और धर्मांतरण करने वालों में अधिकांश महिलाएं हैं.
  • पैगंबर मोहम्मद की पहली पत्नी एक व्यवसायी थीं और पैगंबर उनके कर्मचारी थे. 1400 सालों के बाद डाॅ. नाइक असंभव की उम्मीद करते हैं; उनका कहना है कि विपरीत लिंगों का आपस में मिलना पाप है. वे कहते हैं कि महिलाएं, पुरुषों से बात नहीं कर सकतीं. उन्हें आंखों, जीभ और कपड़ों का पर्दा करना चाहिये.

यूट्यूब पर पोस्ट किये गए एक व्याख्यान में वे एक लड़के और लड़की के बीच के वार्तालाप की नकल करते हैं जिसमें लड़की, लड़के को लुभा रही है. लड़की लड़के को अपने साथ सोने के लिये कहती है. लड़की शैतान बन जाती है. वे पूछते हैं, ‘‘तुम्हें खुद को दूसरों को अपना फायदा उठाने से रोकना है. अगर कोई गहरी गर्दन और शाॅर्ट स्कर्ट पहन कर बाहर निकलता है तो इसमें किसका दोष है?’’

विनम्रता एक ऐसी नेमत है जो डाॅ. नाइक इस्लाम से सीखना भूल गए हैं हालांकि यह धर्म इसे बेहद मूल्यवान मानता है. 

वे लाॅस एंजल्स हवाई अड्डे पर उतरते समय एक कस्टम अधिकारी के साथ हुई बातचीत का हवाला देते हुए बताते हैं कि कैसे उन्होंने अपने ‘‘लाजवाब तर्कों’’ से उस अधिकरी को चुप होने पर मजबूर कर दिया. वे नियमित रूप से अपनी ‘‘लोकप्रियता’’ और कितनी अच्छ तरह से वे ’’दावाह’’ (इस्लाम का प्रचार) कर रहे हैं इस बारे में प्रचार करते रहते हैं.

परंपरागत रूप से इस्लाम कहता है कि उल्टे हाथ द्वारा किये गए किसी भी अच्छे काम के बारे में सीधे हाथ को भी पता नही चलना चाहिये. लेकिन नाइक जिसका पालन करते हैं या अपने अनुयाइयों को करवाना चाहते हैं, वह इस्लाम तो कतई नहीं है. 

हो सकता है कि डाॅ. नाइक वह नेतृत्व हों जिसकी मुसलमानों को बेहद दरकार हो. लेकिन उन्हें ऐसा करने से पहले बहुत कुछ सीखना और बहुत कुछ भूलना भी होगा.

First published: 13 July 2016, 7:44 IST
 
लमत आर हसन @LamatAyub

संवाददाता, कैच न्यूज़

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