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क्यों शिवजी अपने गले में रखते हैं मुंडमाला, ये है रहस्य

कैच ब्यूरो | Updated on: 4 March 2021, 12:54 IST

महादेव की लीलाओं की तरह उनका रूप भी रहस्यमय माना जाता है. शिव के इस स्वरूप के खास मायने हैं. कहते हैं भोलेनाथ इतने भोले हैं कि भक्तों की श्रद्धा देखकर प्रसन्न हो जाते हैं. शिव त्रिशूल, नाग, चंद्रमा और मुंडमाला धारण करते हैं. आज हम आपको इनके अंपरमपार रूप के बारे में ही बताने वाले हैं कि आखिर ये अपने गले में मुंडमाला क्यों धारण करते हैं.भगवान भोलेनाथ के गले में धारण मुंडमाला इस बात की प्रतीक है कि भगवान भोलेनाथ मृत्यु को भी अपने वश में किए हुए हैं. अन्य किंवदंतियों की मानें तो भगवान शिव के गले की यह मुंडमाला भगलान शिव और माता सती के प्रेम का प्रतीक भी है.

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मान्यता है कि एक बार नारद मुनि के उकसाने पर माता सती ने भगवान भोलेनाथ से 108 शिरों वाली इस मुंडमाला के रहस्य के बारे में हठ करके पूछा, भोलेनाथ के लाख मनाने पर भी जब माता सती नहीं मानी तब भोलेनाथ ने इसके रहस्य को माता सती से बताया.उन्होंने बताया कि मुंडमाला के ये सभी सिर यानि 109 सिर आप ही के हैं. इससे पहले आप 107 जन्म लेकर अपना शरीर त्याग चुकी हैं, यह आपका 108वां जन्म है.

ये सुनने के बाद देवी सती ने अपने शरीर को बार बार त्यागने का कारण पूछा कि केवल मैं ही अपने शरीर का त्याग करती हूं, आप क्यों नहीं. इस पर भोलेनाथ ने कहा कि मुझे अमरकथा का ज्ञान है इसलिए मुझे बार-बार शरीर का त्याग नहीं करना पड़ा. इस पर देवी सती ने भगवान शंकर से अमरकथा सुनने की इच्छा प्रकट की.

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First published: 4 March 2021, 12:54 IST
 
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