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स्वच्छ भारत: अब गूगल बताएगा मुसीबत में हल्का होने का पता

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 December 2016, 7:48 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज)

जीवन में ऐसा मौका अवश्य आया होगा जब हम कहीं बाहर फंस जाते हैं और सिर्फ यही सोचते हैं कि पता नहीं टॉयलेट पहुंचने के लिए कितनी देर तक रोकना होगा. ऐसी स्थितियों में गूगल हमारे लिए एक राहत की योजना लेकर आया है. इस राहत की योजना की खबर खुद केंद्रीय मंत्री वैंकेया नायडू ने कुछ दिनों पहले हमें दी है.

अब ऐसी 'आपात' स्थिति आने पर आपको सिर्फ अपना स्मार्टफोन निकालकर गूगल मैप तक जाना होगा. यहां जाकर टॉयलेट टाइप करिए और जवाब हाजिर हो जाएगा. आपके चारों तरफ लाल निशान के रूप में गूगल मैप पर वो स्थल दर्ज हो जाएंगे जहां टॉयलेट उपलब्ध हैं! इनमें किसी एक लाल स्थान पर क्लिक कीजिए आपके पास ठीक वह जानकारी होगी जो आप चाह रहे थे- उस स्थान की दूरी, पहुंचने में लगने वाला समय, उस टॉयलेट स्थल की फोटो और बाद में लोगों की उस टॉयलेट से जुड़े अनुभव भी शामिल होंगे जब लोग इस सुविधा का इस्तेमाल शुरू कर देंगे.

यह सुविधा निश्चित रूप से उपयोगी है. विशेषकर एक ऐसे देश में जहां प्रधानमंत्री ने स्वच्छता को राष्ट्रीय एजेंडा बना दिया है. यह विशेष रूप से उन महिला यात्रियों के लिए उपयोगी है जिनको वह सांस्कृतिक छूट हासिल नहीं है कि वे रोड के किसी किनारे खड़े होकर, पेड़ या चारदीवारी की आड़ में हल्के हो लें.

पिछले साल महसूस की गई थी जरूरत

टॉयलेट की खोज के लिए डिजिटल सर्च की जरूरत पिछले साल महसूस की गई थी. तथ्य तो यह है कि सरकार के स्वच्छ भारत एप में टॉयलेट खोज की सुविधा उपलब्ध है, जो कि यह भी दिखाता है कि आपके आस—पास जो टॉयलेट उपलब्ध हैं उनमें से कौन से पेड हैं और कौन से फ्री, वे वेस्टर्न हैं या इंडियन या फिर उनमें विकलांगों के लिए जरूरी सुविधा उपलब्ध है या नहीं और उनमें सैनिटरी नैपकीन्स की स्थिति क्या है.

लेकिन अब तक इस एप के उपयोगकर्ता बहुत कम ही बन सके हैं. इसके पीछे कारण यह बताया जा रहा है कि लोगों के मोबाइल्स पहले ही एप से भरे हुए हैं और वे टॉयलेट की खोज के लिए एक और एप डाउनलोड करने में अपना डाटा और मोबाइल स्पेस नहीं भरना चाहते.

दरअसल गूगल टायलेट खोजी एप एक अलग एप नहीं है. यह तो पहले से ही मौजूद गूगल मैप में दी जा रही एक और सुविधा है. जिस तरह से अब तक आप इस मैप में पेट्रोल पंप, अस्पताल और एटीएम खोजने की सुविधा का उपयोग कर रहे थे उसी तरह से अब इस एप में आप टॉयलेट भी खोज सकेंगे. यही वजह है कि इस एप के अधिक उपयोग की जाने की संभावना है, बजाय स्वच्छ भारत एप के.

अभी तक दो लाख टॉयलेट की भौगोलिक स्थिति के जानकारी एकत्र की जा चुकी है और इसमें सभी जन सुविधाओं का डाटा शामिल करने की दिशा में काम किया जा रहा है. इसमें वे टॉयलेट भी शामिल हैं जो कि निजी इमारतों में हैं.

जब यह सुविधा पूरी तरह से आकार लेगी तो इसमें टॉयलेट की स्वच्छता रेटिंग से लेकर, वेस्टर्न अथवा भारतीय और पेड आदि का विवरण भी उपलब्ध होगा. फिलहाल गूगल मैप के टॉयलेट लोकेटर में सिर्फ एनसीआर अर्थात दिल्ली, गुरुग्राम, फरीदाबाद, गाजियाबाद, नोएडा और मध्यप्रदेश के टॉयलेट का विवरण ही होगा. इसके बाद अन्य राज्यों में भी यह डाटा एकत्र किया जाएगा.

कितना सहायक होगा यह

डाटा दिखाता है कि भारत में मोबाइल उपयोग करने वाले लोगों में से सिर्फ एक तिहाई लोगों के पास ही स्मार्टफोन है. इस तरह से भारत में करीब 25 करोड़ लोगों के पास ही स्मार्टफोन है. लेकिन सरकार जिस तरह से डिजिटाइजेशन को बढ़ावा दे रही है, उससे उम्मीद की जा रही है कि यह संख्या तेजी से बढ़ेगी. इससे गूगल टॉयलेट खोज सुविधा का उपयोग करने वालों की संख्या भी बढ़ना तय है.

इस मौके पर स्वच्छ भारत मिशन के बारे में बोलते हुए नायडू ने बताया कि शहरी क्षेत्र में 2014 अक्टूबर में लॉन्च होने के बाद इस मिशन को 2016 में जाकर गति मिली है. अब जाकर नई दिल्ली नगर निगम सहित 502 शहरों ने खुद को खुले शौच से मुक्त घोषित किया है तथा अगले साल मार्च तक 237 शहर और खुले में शौच से मुक्त घोषित किए जाएंगे.

नायडू ने बताया कि 66 लाख घरों में टॉयलेट बनाने का लक्ष्य रखा गया था. जिसमें से 27,81,883 टॉयलेट बन चुके हैं और 21,43,222 टॉयलेट के निर्माण का कार्य तेजी से चल रहा है. इसी तरह से 5 लाख से अधिक सामुदायिक टायलेट बनाने का लक्ष्य रखा गया था जिसमें से 1.07 लाख टॉयलेट बन चुके हैं और 1.30 टॉयलेट निर्माणाधीन हैं.

गूगल मैप की टॉयलेट खोजी सुविधा भारत की स्वच्छता समस्या की दिशा में एक महत्वपूर्णण पहल होगी. चूंकि इन टॉयलेट का प्रयोग अंतत: भारत के संभ्रांत वर्ग द्वारा किया जाएगा, इसलिए स्वच्छता अध्याय में एक नए चैप्टर साबित हो सकता है. लेकिन अगर जन सुविधाओं को केंद्र में रखा जाए और उनका उपयोगकर्ताओं द्वारा सीधा रिव्यू हो तो निश्चित रूप से उनके हालात सुधारने में भी मदद मिलेगी.

लेकिन यह तथ्य अपनी जगह है कि जब तक कि भारत में साक्षरता और डिजिटाइजेशन हकीकत नहीं बन जाते हैं तब तक गूगल की टॉयलेट खोजी सुविधा सिर्फ एक अच्छे यंत्र के रूप में रहेगी जिसके उपयोग के लिए अभी उचित माहौल उपलब्ध नहीं है.

First published: 27 December 2016, 7:48 IST
 
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