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विश्व महिला दिवस: फैशन का नया चेहरा लक्ष्मी सा

विशाख उन्नीकृष्णन | Updated on: 8 March 2016, 9:08 IST

अक्सर हमें किसी नए विकल्प के अभाव में दूसरों की नकल करने के लिए कहा जाता है. लेकिन यह कहना जितना आसान है, करना उतना ही मुश्किल. तब यह और भी मुश्किल हो जाता है जब वह 'कोई' तेजाब हमले की पीड़िता हो.

लक्ष्मी सा तब 15 साल की थीं, जब एक 32 साल की उम्र के आदमी ने अपने दो साथियों के साथ उनके ऊपर तेजाब फेंक दिया था, क्योंकि लक्ष्मी ने उसका शादी का प्रस्ताव ठुकरा दिया था. लक्ष्मी पर तेजाबी हमला केंद्रीय दिल्ली में स्थित तुगलक रोड पर हुआ था.

लेकिन लक्ष्मी जो कहानी कहना चाहती हैं, जिसे दूसरों से साझा करना चाहती है, वह तेजाब हमले की व्यथा या उसके बाद उनके साथ हुई घटनाएं नहीं है. लक्ष्मी उन क्षणों को बांटना चाहती हैं जब उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला द्वारा सबसे साहसी महिला का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया.

उन्हें संयुक्त राज्य अमेरिका की प्रथम महिला द्वारा सबसे साहसी महिला का अंतरराष्ट्रीय पुरस्कार प्रदान किया गया


कैच से बात करते हुए लक्ष्मी पूरी कहानी सुनाती हैं, उस जघन्य अपराध के पहले से लेकर महिलाओं के वस्त्रों का नया चेहरा बनने तक की कहानी.

लक्ष्मी आज एक मॉडल हैं. उसकी कहानी से अनेक लोगों ने प्रेरणा ली है. लेकिन वे दावा करती हैं कि समाज में पनप रही संकीर्ण मानसिकता को बदलने की लड़ाई अभी पूरी होने से दूर है.

जब लक्ष्मी को विवा एन दिवा की ओर से अपना ब्रांड एम्बेसडर यानी 'विवा एन दिवा का चेहरा' बनने का मौका दिया गया तो उन्हें हैरानी नहीं हुई. इस ब्रांड के होर्डिंग्स और बिलबोर्ड के विज्ञापनों में लक्ष्मी नजर आती हैं.

लक्ष्मी का अब तक का जीवन मौजूदा रूढ़ियों से लड़ने में ही बीता है. इसलिए नहीं कि लक्ष्मी ने खुद ने ऐसा कोई फैसला लिया था, बल्कि इसलिए कि परिस्थितियों ने ऐसा करने को मजबूर किया.

अब वो विवाह जैसे सामाजिक बंधन में विश्वास नहीं करती. उनका यह भरोसा उस समय उठा जब उनहें पता चला कि उन पर तेजाब से हमला करने वाले व्यक्ति की जेल से छूटने के बाद शादी हो गई. वह जोर देकर कहती हैं, “यदि उस जैसे आदमी की भी शादी हो सकती है तो फिर इस शादी का कोई मतलब नहीं है.”

laxmi shaw

लक्ष्मी फिलहाल आलोक दीक्षित के साथ लिव-इन रिलेशनशिप में रह रही हैं. आलोक पत्रकार और सामाजिक कार्यकर्ता हैं, जो स्टॉप एसिड अटैक कैम्पेन के साथ काम कर रहे हैं.

विश्व महिला दिवस की पूर्व संध्या पर, लक्ष्मी अपने पुराने दर्द भरे अनुभवों के बारे में बात नहीं करना चाहती हैं. वो बात करना चाहती हैं एक मॉडल के रूप में अपनी प्रोफेशनल लाइफ के बारे में. हालांकि वह बहुत अच्छी तरह जानती हैं कि इन दोनों को अलग नहीं किया जा सकता.

लक्ष्मी अपना कॅरियर मॉडल के रूप में क्यों बना पाईं, क्योंकि लक्ष्मी ने उस दर्दनाक हादसे आघात के बाद भी अपना चेहरा न छुपाने का निर्णय लिया. "खुद को इस बात के लिए तैयार करने की ताकत हासिल करने में समय लगा कि अपना चेहरा छिपाने का कोई कारण नहीं है, कि मैं अकेली ऐसी लड़की नहीं हूं जो तिरस्कृत होने का दर्द झेल रही हूं. लोगों की घूरती निगाहें मेरे अंदर दृढ़ विश्वास का कारण बनी, जिन्होंने मुझे चेहरा और शरीर छिपाने से रोकने की ताकत दी.”

लक्ष्मी के लिए यह एक चौंकाने वाली बात थी कि उनको एक मेकअप आर्टिस्ट के रूप में नौकरी मिल गई. इससे भी अधिक चौंकाने वाली बात थी फोटोग्राफर राहुल सहारण द्वारा तेजाब पीडि़तों का फोटोशूट कराने का विचार. सहारण के इस विचार ने लक्ष्मी को ऐसा अवसर उपलब्ध कराया जिसके बारे में वे कल्पना भी नहीं कर सकती थीं.

लक्ष्मी ने उस दर्दनाक हादसे आघात के बाद भी अपना चेहरा न छुपाने का निर्णय लिया

सहारण के फोटोशूट को बड़ा सकारात्मक नतीजा रहा. इस फोटोशूट के बाद लक्ष्मी के पास अनेक कंपनियों से मॉडलिंग के ऑफर आने लगे कि वह इसे अपना कॅरियर बना लें. यद्यपि ये ऑफर फुल-टाइम नहीं थे.

पूरे भरोसे के साथ लक्ष्मी आश्वासन देती हैं कि “एक मॉडल के तौर पर मेरे साथ उन बाकी मॉडल्स की तुलना में कुछ अलग तरह का बर्ताव नहीं होता, जिनके साथ मैं काम करती हूं. मुझे एक पीडि़ता की तरह नहीं समझा जाता, ना ही मैं खुद को पीडि़त के तौर पर देखती हूं.”

वह कहती हैं, “15 साल की लड़की के तौर पर मेरा सपना टीवी पर आने का था. और यह इतनी तेजी से पूरा हुआ कि मैं उम्मीद भी नहीं कर सकती थी.”

लक्ष्मी समाज में सुंदरता के लिए तय किए गए प्रचलित पैमानों को दरकिनार करना चाहती हैं


लक्ष्मी सिर्फ अपने किशोरवय का सपना पूरा कर खुश नहीं है. वह उस नजरिए को बदलना चाहती हैं, जिस नजरिए से जवान और बुजुर्ग औरतों की खूबसूरती देखी जाती है. वह समाज में सुंदरता के लिए तय किए गए पैमानों को दरकिनार करना चाहती हैं, जिनके अनुसार त्वचा का रंग, ऊंचाई और वजन आदि को सुंदरता का पैमाना बना दिया गया है. वह उम्मीद जताती हैं कि एक मॉडल के रूप में उनका कॅरियर इस दिशा में मील का पत्थर है.

लक्ष्मी कहती हैं कि “ये वे विचार हैं जो आपके अंदर तब रोपित किए जाते हैं जब आप एक किशोरी होती हैं और इनसे लड़ना बहुत मुश्किल हाेता है. परन्तु मेरा भरोसा है कि मेरा संघर्ष उन लड़कियों की सहायता करेगा, जिनको इस तरह के शारीरिक मुद्दों का सामना करना पड़ता है. साथ ही यह समाज और ऐसे प्रतिबंधात्मक मानकों पर लगाम लगाएगा जो ऐसी लड़कियों को नीचा दिखाने के लिए उपयोग में लाए जाते हैं.”

लक्ष्मी दोबारा से सुनिश्चित करती हैं कि यदि वह खुद ऐसी इंडस्ट्री में एक चेहरा हो सकती हैं, जिसे उथला माना जाता है, तो निश्चित रूप से वह इंडस्ट्री शर्तें बदलने को तैयार है. यही पैमाना बाकी जगह भी लागू हो सकता है, बिना इस बात कि वह इंडस्ट्री कौन-सी है या वहां किस तरह का काम होता है.

अंतरराष्ट्रीय महिला दिवस के अवसर पर लक्ष्मी की एक ही इच्छा है कि वे महिलाएं जो उसे एक प्रेरणा की तरह देखती हैं, वे अपने शरीर में सहजता महसूस करें, चाहे वह जैसा भी हो.

लक्ष्मी अपनी भविष्य की आकांक्षाओं के बारे में और बात करने की इच्छा जताती हैं, लेकिन अपनी मजबूरी बता देती हैं कि उन्हें अपने दो साल के बेटे की देखभाल करनी है.

First published: 8 March 2016, 9:08 IST
 
विशाख उन्नीकृष्णन @sparksofvishdom

A graduate of the Asian College of Journalism, Vishakh tracks stories on public policy, environment and culture. Previously at Mint, he enjoys bringing in a touch of humour to the darkest of times and hardest of stories. One word self-description: Quipster

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