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दिल्ली के दो अस्पतालों में इस बीमारी से दो हफ्तों में 14 बच्चों की मौत, अस्पताल ने दी ये सफाई

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 September 2018, 11:17 IST

पिछले दो हफ्तों में दिल्ली के दो अस्पतालों में डिप्थीरिया से कम से कम 14 बच्चों की मौत हो गई है. इनमे से महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल में 13 और लोक नायक अस्पताल में एक बच्चे की मौत हुई है. विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार डिप्थीरिया एक संक्रामक बीमारी है जो मुख्य रूप से गले और ऊपरी वायुमार्ग को संक्रमित करती है और अन्य अंगों को प्रभावित करने वाले टोक्सिन को उत्पन्न करती है. हालांकि इसको रोकने के लिए टीका मौजूद है. भारत में पिछले साल विश्व स्तर पर कुल डिप्थीरिया मामलों में से 60% प्रभावित थे.

पिछले तीन हफ्तों में डिप्थीरिया से पीड़ित दो से 14 वर्ष की आयु के कम से कम 141 बच्चों को महर्षि वाल्मीकि संक्रामक रोग अस्पताल मे भर्ती कराया गया था. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार अस्पताल के एक अधिकारी ने कहा कि लगभग 120 बच्चे उत्तर प्रदेश से हैं. जबकि हरियाणा के मेवात जिले और दिल्ली से 10 बच्चे शामिल हैं.

अधिकारी ने कहा, "डिप्थीरिया से पीड़ित अधिकांश बच्चों को निवारक टीकाकरण नहीं मिला." अस्पताल के मेडिकल अधीक्षक सुनील गुप्ता ने कहा कि अस्पताल में ऐसे मामलों का इलाज करने के लिए सभी सुविधाएं हैं. उन्होंने कहा अधिकतर मरीजों को एडवांस स्टेज में अस्पताल में भर्ती करवाया गया था, इसलिए उन्हें बचाया नहीं जा सका.

 

गुप्ता ने अख़बार इंडियन एक्सप्रेस को बताया कि एंटी-डिप्थीरिया सीरम की कमी थी. उन्होंने कहा, "पिछले साल नवंबर से हमारे पास यह सीरम नहीं है.मैं सेंट्रल रिसर्च इंस्टीट्यूट, कसौली के प्रशासन के संपर्क में रहा हूं, जो कि एकमात्र एजेंसी है जो इसे आपूर्ति करती है, लेकिन उन्होंने अपनी प्रयोगशाला बंद कर दी है क्योंकि वहां कुछ अपग्रेडेशन चल रहा है''. उन्होंने कहा ''मैं मार्च में कसौली भी गया, लेकिन उन्होंने कहा कि उन्होंने अब उत्पादन बंद कर दिया है."

अस्पताल निजी दुकानों से सीरम क्यों नहीं खरीद रहा है, इस पर गुप्ता ने कहा कि वह गंभीर रूप से बेचे जाने वाले सीरम के उपयोग को प्रोत्साहित नहीं करता है क्योंकि गंभीर प्रतिक्रिया हो सकती है. यहां तक कि निजी लोगों के पास वर्तमान में यह नहीं है और हम केमिस्टों के संपर्क में रहने की कोशिश कर रहे हैं जो हमें थोक में सीरम दे सकते हैं."

सेंट्रल रिसर्च इंस्टिट्यूट के निदेशक अजय कुमार ताहलान ने गुप्ता के दावों को खारिज कर दिया. तहलान ने कहा ''डिप्थीरिया एंटीटॉक्सिन के 150 वायल्स पिछले 15 दिनों से तैयार हैं, लेकिन अस्पताल से कोई उन्हें सूचना के बावजूद लेने नहीं आया.''

तहलान ने कहा, "हमें अस्पताल से एडीएस [एंटी-डिप्थीरिया सीरम] के लिए अनुरोध मिल रहे थे, इसलिए हम 15 शीशे बनाने में कामयाब रहे और 15 दिन पहले अस्पताल प्रशासन को सूचित किया था." उन्होंने कहा ''अब मुझे जानकारी मिली है कि कोई इसे आज लेने के लिए [शनिवार] आ रहा है."

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First published: 23 September 2018, 11:15 IST
 
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