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चाय-नाश्ता नहीं देने वाली पत्नी से कोर्ट ने दिलाया छुटकारा

कैच ब्यूरो | Updated on: 11 August 2017, 15:36 IST

दिल्ली हाईकोर्ट ने पति की अर्जी पर तलाक को मंज़ूरी इसलिए दे दी, क्योंकि अपने पति के कहने पर पत्नी चाय-नाश्ता बनाकर नहीं देती थी. कोर्ट ने इस बात को क्रूरता माना और इसे तलाक का आधार बनाया.

एनडीटीवी की खबर के अनुसार, दिल्ली हाईकोर्ट ने गुरुवार को पति की याचिका पर सुनवाई की और तलाक की अर्जी पर पति के पक्ष में फैसला सुनाया. दिल्ली हाईकोर्ट की जस्टिस दीपा शर्मा और जस्टिस हीमा कोहली की बेंच ने यह फैसला सुनाया.

क्या है पूरा मामला?

हाईकोर्ट में दायर अपनी याचिका में पति ने आरोप लगाया था कि उसकी पत्नी उसे चाय, नाश्ता और खाना बनाकर नहीं देती थी और इस वजह से उसे पत्नी से अलग होने की अनुमति दी जाए. दरअसल इस मामले में निचली अदालत ने पति के पक्ष में फैसला सुनाया था. पत्नी ने निचली अदालत के फैसले को दिल्ली हाईकोर्ट में चुनौती दी थी, जहां कोर्ट ने निचली अदालत के फैसले को बरकरार रखा.

जस्टिस दीपा शर्मा जस्टिस हीमा कोहली की बेंच ने सुनवाई के दौरान कहा कि पति-पत्नी पिछले 10 साल से एक दूसरे से अलग रह रहे हैं और उनका साथ रहना अब मुमकिन नहीं है. 

महिला जजों की बेंच ने कहा, "शारीरिक क्रूरता का प्रमाण तो दिया जा सकता है, लेकिन मानसिक क्रूरता को साबित करना मुश्किल है. पति-पत्नी में से जब किसी एक का व्यवहार दूसरे के लिए परेशानी बनने लगे. किसी एक के व्यवहार से जब दूसरा असहज होने लगे, अपमानित होने लगे, दुखी रहने लगे तो यह क्रूरता का आधार है."

First published: 11 August 2017, 15:36 IST
 
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