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आप विधायक ने विधानसभा में दिखाया- ऐसे होती है EVM में गड़बड़ी

कैच ब्यूरो | Updated on: 9 May 2017, 16:38 IST
दिल्ली विधानसभा/ ट्विटर

दिल्ली विधानसभा के विशेष सत्र में आम आदमी पार्टी के विधायक सौरभ भारद्वाज ने ईवीएम से छेड़छाड़ का लाइव डेमो करके दिखाया है. आप विधायक ने इस दौरान मॉक पोलिंग के बाद खुफिया कोड के जरिए ईवीएम हैकिंग का दावा किया. 

सौरभ भारद्वाज ने दावा किया है कि सीक्रेट कोड के ज़रिए ईवीएम मशीन में छेड़छाड़ की जा सकती है. आप विधायक ने कहा कि बाक़ायदा यह तय किया जा सकता है कि कब किस पार्टी को वोट देना है और कब किस पार्टी को जिताना है. 

'दुनिया की कोई मशीन हैक प्रूफ नहीं'

सौरभ भारद्वाज ने इस दौरान कहा कि दुनिया में ऐसी कोई मशीन नहीं बनी जिसके साथ छेड़छाड़ नहीं की जा सकती. इसके लिए उन्हें महज़ तीन घंटे का वक़्त चाहिए. पोलिंग बूथ में मतदान के वक़्त भी इस तरह की छेड़छाड़ की जा सकती है. 

पूर्व मुख्य चुनाव आयुक्त एन गोपाल स्वामी ने एक टीवी चैनल से आप के दावे पर सवाल उठाते हुए कहा कि फालतू की मशीनों को हैक करने का कोई मतलब नहीं है.

12 मई को EVM पर ऑल पार्टी मीटिंग

वहीं चुनाव आयोग ने 12 मई को ईवीएम पर ऑल पार्टी मीटिंग बुलाई है. इस मीटिंग में चुनाव आयोग की ईवीएम मशीनों को सामने रखा जाएगा और कहा जाएगा कि आयोग की मशीनों को हैक करके दिखाएं.

इससे पहले चुनाव आयोग ने सभी पार्टियों से अपील की है कि अगर हैकिंग करके दिखाना ही है तो चुनाव आयोग की मशीनों में करके दिखाएं. 12 मई को होने वाली मीटिंग के माध्यम से आयोग ईवीएम के साथ छेड़छाड़ पर सभी पार्टियों की शंकाएं दूर करने की कोशिश करेगा.

इससे पहले विधानसभा का सत्र शुरू होते ही आप विधायक अलका लांबा ने कहा था कि जब चुनाव आयोग के पास पर्याप्त मशीनें मौजूद थीं तो दिल्ली नगर निगम में मतदान के लिए राजस्थान से मशीनें क्यों मंगवाई गईं? वहीं भाजपा विधायक विजेंद्र गुप्ता ने कहा है कि ईवीएम का डेमो मुद्दे को भटकाने के लिए किया गया है.

दिल्ली विधानसभा/ ट्विटर

EVM से जुड़ी ज़रूरी जानकारी

ईवीएम क्या है ?

इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीन पांच-मीटर केबल द्वारा जुड़ी दो यूनिटों-एक कंट्रोल यूनिट एवं एक बैलेटिंग यूनिट-से बनी होती है. कंट्रोल यूनिट मतदान अधिकारी के पास होती है तथा बैलेटिंग यूनिट वोटिंग कम्पार्टमेंट के अंदर रखी होती है. बैलेट पेपर जारी करने के बजाए, कंट्रोल यूनिट का प्रभारी मतदान अधिकारी बैलेट बटन को दबाएगा. यह मतदाता को बैलेटिंग यूनिट पर अपनी पसंद के अभ्यर्थी एवं प्रतीक के सामने नीले बटन को दबाकर अपना मत डालने के लिए सक्षम बनाएगा.

ईवीएम का पहली बार चलन कब शुरू किया गया?

वर्ष 1989-90 में इलेक्ट्रॉनिक वोटिंग मशीनों का प्रयोगात्मक आधार पर पहली बार नवम्बर, 1998 में आयोजित 16 विधान सभाओं के साधारण निर्वाचनों में इस्तेमाल किया गया. इन 16 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्रों में से मध्य प्रदेश में 5, राजस्थान में 5, राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र, दिल्ली में 6 विधान सभा निर्वाचन-क्षेत्र थे.

कहां बनती है यह मशीन

ईवीएम भारत इलेक्ट्रॉनिक्स लिमिटेड, बेंगलुरु एवं इलेक्ट्रॉनिक कॉर्पोरेशन ऑफ इण्डिया लिमिटेड, हैदराबाद द्वारा विनिर्मित 6 वोल्ट की एल्कलाइन साधारण बैटरी पर चलती है. ईवीएम का ऐसे क्षेत्रों में भी इस्तेमाल किया जा सकता है जहां पर बिजली कनेक्शन नहीं हैं.

 

दिल्ली विधानसभा/ ट्विटर

मॉक पोल

वोटिंग के दिन सुबह मतदान शुरू करने से पहले मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी द्वारा सभी उम्मीदवारों के मतदान केन्द्र प्रभारी या पोलिंग एजेंट के सामने मतदान शुरू करने से पहले मॉक पोलिंग की जाती है और सभी पोलिंग एजेंट से मशीन में वोट डालने को कहा जाता है ताकि ये जांचा जा सके कि सभी उम्मीदवारों के पक्ष में वोट गिर रहा है कि नहीं. ऐसे में यदि किसी मशीन में टेंपरिंग या तकनीकी गड़बड़ी होगी तो मतदान के शुरू होने के पहले ही पकड़ ली जायेगी. 

सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट

मॉक पोल के बाद सभी उम्मीदवारों के पोलिंग एजेंट मतदान केन्द्र की पोलिंग पार्टी के प्रभारी को सही मॉक पोल का सर्टिफिकेट देते है. इस सर्टिफिकेट के मिलने के बाद ही संबंधित मतदान केन्द्र में वोटिंग शुरू की जाती है. ऐसे में जो उम्मीदवार ईवीएम में टैंपरिंग की बात कर रहे हैं वे अपने पोलिंग एजेंट से इस बारे में बात कर आश्वस्त हो सकते हैं. 

हर मतदान केंद्र में रजिस्टर

मतदान शुरू होने के बाद मतदान केन्द्र में मशीन के पास मतदाताओं के अलावा मतदान कर्मियों के जाने की मनाही होती है, वे ईवीएम के पास तभी जा सकते है जब मशीन की बैट्री डाउन या कोई अन्य तकनीकी समस्या होने पर मतदाता द्वारा सूचित किया जाता है. हर मतदान केन्द्र में एक रजिस्टर बनाया जाता है, इस रजिस्टर में मतदान करने वाले मतदाताओं की डिटेल अंकित रहती है और रजिस्टर में जितने मतदाता की डिटेल अंकित होती है, उतने ही मतदाताओं की संख्या ईवीएम में भी होती है. काउंटिंग वाले दिन इनका आपस मे मिलान मतदान केंद्र प्रभारी (presiding officer) की रिपोर्ट के आधार पर होता है. 

साबित नहीं हुई EVM हैकिंग

सुप्रीम कोर्ट में ईवीएम टैंपरिंग से संबंधित जितने भी मामले पहले आये उनमें से किसी भी मामले में ईवीएम में टैंपरिंग सिद्व नहीं हो पाई है. स्वयं चुनाव आयोग आम लोगों को आंमत्रित करता है कि वे लोग आयोग जाकर ईवीएम की तकनीक को गलत सिद्व करने हेतु अपने दावे प्रस्तुत करें. लेकिन आज तक कोई भी दावा सही सिद्व नहीं हुआ है.

First published: 9 May 2017, 16:38 IST
 
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