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'लोकतंत्र में आखिरी फैसला लेने का अधिकार किसके पास?'

कैच ब्यूरो | Updated on: 27 December 2017, 17:01 IST

दिल्ली में काबिज आम आदमी पार्टी की सरकार और दिल्ली के उपराज्यपाल के बीच एक बार फिर मतभेद शुरू हो गया है. दिल्ली सरकार की एक महात्वाकांक्षी योजना को दिल्ली के उपराज्यपाल ने वापस लौटा दिया है. इसके बाद दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने ट्विटर पर दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल पर निशाना साधा है. 

केजरीवाल सरकार की दिल्ली के लोगों को मिलने वाली सरकारी सेवाओं की होम डिलीवरी संबंधी प्रस्ताव लौटाने के एक दिन बाद केजरीवाल ने ट्वीट कर कहा कि दिल्ली के फैसले लेने का आखिरी अधिकार किसके पास होना चाहिए?

केजरीवाल ने ट्वीट कर लिखा, "एलजी कहते हैं कि काफ़ी डिजिटाइज़ेशन हुआ है. चुनी हुई सरकार कहती है कि डिजिटाइज़ेशन को घर-घर डिलीवरी से जोड़ना होगा. एलजी सहमत नहीं हैं. तो सवाल है कि लोकतंत्र में ऐसे हालात में किसकी बात अंतिम होनी चाहिए- एलजी की या चुनी हुई सरकार की?"

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल इस ट्वीट के साथ एक न्यूज़ रिपोर्ट भी साझा की है, जिसका शीर्षक है, 'डोरस्टेप डिलीवरी : गवर्मेट सेज बैजल रिजेक्टेड प्लान, एलजी सेज डिजिटाइज इट'

दरअसल, दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने जाति, जन्म और निवासी सर्टिफ़िकेट, लाइसेंस, सामाजिक कल्याण योजनाओं और पेंशन जैसी 40 सरकारी सेवाओं को लोगों के घर तक पहुंचाने के प्रस्ताव को ख़ारिज कर दिया है. उपराज्यपाल ने इसे वापस दिल्ली सरकार के पास विचार के लिए भेजा है.

दिल्ली के उपराज्यपाल अनिल बैजल ने बयान जारी कर कहा, "मैंने प्रस्ताव पर दोबारा विचार करने की सलाह के साथ दूसरा विकल्प का सुझाव मांगा है"

गौरतलब है कि ये सब मंगलवार से शुरु हुआ जब दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने दावा किया कि दिल्ली के उपराज्यपाल ने जमीनी हकीकत को नजरअंदाज करते हुए ये फैसला लिया है. इसके बाद मनीष सिसोदिया ने इस मुद्दे पर एक के बाद एक ट्वीट किये.

मनीष सिसोदिया ने ट्वीट कर कहा, "सार्वजनिक हित के ऐसे गंभीर मामलों पर चुनी हुई सरकार के साथ उप राज्यपाल को अपने वैचारिक मतभेद को जाहिर करने की शक्ति है क्या? इसकी वजह से दिल्ली की आम जनता पिस रही है."

उपराज्यपाल के साथ इस ताजा विवाद को एक बार फिर से केंद्र सरकार और दिल्ली सरकार के बीच बढ़ते मतभेद के तौर पर देखा जा रहा है. दिल्ली सरकार उपराज्यपाल के साथ बढ़ते मतभेद पर अदालत भी जा चुकी है. उसने आरोप लगाया कि केंद्र सरकार के दवाब में दिल्ली सरकार के प्रस्तावों और योजनाओं पर एलजी बैठे हुए हैं.

First published: 27 December 2017, 17:01 IST
 
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