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बुराड़ी कांड में सबस बड़ा खुलासा: भाटिया परिवार ने 6 दिन की थी फंदे पर लटकने की प्रैक्टिस

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2018, 12:25 IST
(File Photo )

दिल्ली के बुराड़ी में एक ही परिवार के 11 लोगों की मौत के मामले में हर दिन नए नए खुलासे हो रहे हैं. इस पूरे मामले के मास्टरमाइंड मृतक ललित की डायरी से कई चौकाने वाली बातें सामने आई है. डायरी से ताजा खुलासा मौत से पहले रिहर्सल को लेकर हुआ है. पता चला है कि भाटिया परिवार ने आत्महत्या वाली रात से पहले करीब 6 दिन तक फांसी पर लटकने की रिहर्सल की थी. रिहर्सल के दौरान सभी के हाथ खुले रहते थे, जबकि सातवें दिन यानी 30 जून की रात को सिर्फ ललित और उसकी पत्नी टीना के हाथ खुले थे और बाकि सबके हांथ बंधे हुए थे.

डायरी में लिखी बात के बातों के अनुसार, भाटिया परिवार ने 24 जून से फंदे पर लटकने की प्रैक्टिस शुरू कर दी थी. ललित ने घर वालों को ये यकीन दिला रखा था कि 10 साल पहले मर चुके पिता भोपाल सिंह राठी अब भी घर आते हैं और उससे बाते करते हैं. पुलिस को संदेह है कि ललित और उसकी पत्नी परिवार के बाकी सदस्यों के हाथ बांधे होंगे और सबके लटकने के बाद खुद भी फांसी पर लटक गए होंगे.

डायरी में लिखी बातों से यह भी खुलासा हुआ है कि फांसी पर लटकने से पहले पूरा परिवार हवन करता था. डायरी में लिखी बातों के अनुसार फंदे पर लटक जाता था. रिहर्सल के दौरान किसी के हाथ पैर नहीं बंधे होने के कारण सभी बच जाते थे. डायरी में 30 जून को पिता के निर्देश पर ललित ने कई बातें लिखी थीं. इससे पता चलता है कि ललित ने पूरे परिवार को यकीन दिला रखा था कि उन्हें बचा लिया जाएगा.

डायरी के अनुसार, पिता का निर्देश था कि कप में पानी रखना, जब पानी अपना रंग बदलेगा तो मैं प्रकट होऊंगा और सबको बचा लूंगा. इसके साथ ही यह भी निर्देश दिया था कि जाल पर 9 बंदे हों, बेबी अलग स्टूल पर, मां अलग, बंधन बांधने का काम एक व्यक्ति करे, मंदिर के पास स्टूल पर बेबी चढ़ेगी, मां रोटी खिलाएगी, मुंह में गीला कपड़ा रखना है, हाथ बंधे होंगे और मुंह पर पट्टी, कानों को बंद रखने के लिए रूई डाल लेना, ललित छड़ी से इशारा करे, शनिवार रविवार रात एक बजे क्रिया होगी. कप का पानी रंग बदलेगा. मैं प्रकट होऊंगा.सबको बचा लूंगा.

यह भी पता चला है कि आमतौर पर पूरा परिवार रात 12 बजे तक सो जाया करता था, लेकिन 30 जून को परिवार के सभी सदस्य जाग रहे थे. ललित ने डॉगी को बाहर घुमाया. घर लौटने के बाद पूजा शुरू कर दी. 12 बजे से एक बजे तक घर में पूजा चली. पूजा के दौरान ललित ने परिवार को डायरी में लिखी बातें सुनाई.

ललित ने परिवार के सदस्यों से कहा था कि मोक्ष की प्राप्ति के लिए हवन के बाद सभी अपने कानों में रूई डाल लेना.आंखें बांध लेना, ताकि एक दूसरे को सुन और देख नां सकें. अंतिम समय में आसमान हिलेगा और धरती कांपेगी. लेकिन तुम घबराना मत. इस स्थिति में मंत्रों का जाप बढ़ा देना. जब कप में रखा पानी अपना रंग बदलेगा तो सभी नीचे उतर जाना. नीचे उतरने में एक दूसरे की मदद करना. तुम मरोगे नहीं. कुछ बड़ा हासिल करोगे. जब तुम फंदे में गला डालकर क्रिया करोगे तो मैं प्रकट होऊंगा. आपको दर्शन दूंगा. सबको बचा लूंगा. आपकी आत्मा पहले बाहर निकलेगी. फिर वापस आ आ जाएगी. आपको मोक्ष की प्राप्ति हो जाएगी. 

डायरी में लिखे निर्देश के अनुसार, 10 लोगों के लिए चुन्नी लटकाई गई. वहीं, बेब्बे यानी नारायणी देवी को चलने में दिक्कत होने के चलते उनको अपने ही कमरे में वट तपस्या करनी थी. ललित और टीना बेब्बे के कमरे में गए. इसके बाद बेब्बे के फंदे के लिए वो बेल्ट का इस्तेमाल किया. जिसके बाद घर के अंदर इस रात की पहली मौत बेब्बे की हो गई. इसके बाद ललित और टीना ने बाकी 8 सदस्यों के पैरों के नीचे से स्टूल और कुर्सियां खिसका देते हैं. चूंकि सभी के मुंह पर टेप और रुमाल बंधे थे कोई चीख भी नहीं पाया. हाथ बंधे थे इसलिए फंदा नहीं खोल पाया. 2 मिनट के अंदर सभी की मौत हो गई. इसके बाद ललित और टीना भी फांसी के फंदे पर झूल गए.

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First published: 5 July 2018, 12:25 IST
 
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