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केंद्र का केजरीवाल को जवाब- सुप्रीम कोर्ट के फैसले में सर्विसेज का अधिकार LG के पास

कैच ब्यूरो | Updated on: 7 July 2018, 8:41 IST

दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद शुक्रवार को केंद्र की मोदी सरकार पर आरोप लगाया था कि वह सुप्रीम कोर्ट के आदेश की खुलेआम अवमानना कर रही है. इसे लेकर केंद्र सरकार ने केजरीवाल को जवाब दिया है. केंद्र सरकार ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट ने जो फैसला दिया है उसमें सर्विसेज दिल्ली के उपराज्यपाल के अधिकारों के अंतर्गत आता है.

इसी को लेकर कल (6 जुलाई) को केजरीवाल ने उपराज्यपाल से मुलाकात की थी. एलजी अनिल बैजल से मुलाकात के बाद खुद केजरीवाल ने बताया था कि एलजी ने ट्रांसफर पोस्टिंग का अधिकार देने से इनकार कर दिया है.

उपराज्यपाल के साथ 25 मिनट तक हुई बैठक के बाद केजरीवाल ने मीडिया को संबोधित करते हुए कहा कि बैजल ने गृह मंत्रालय से सलाह मांगी थी और उन्हें बताया गया कि सेवाओं को दिल्ली सरकार को नहीं दिया जाना चाहिए. 

केजरीवाल ने कहा कि उप राज्यपाल इस बात से सहमत नहीं हैं कि सेवा विभाग का नियंत्रण दिल्ली सरकार को सौंपा जाना चाहिए. केजरीवाल ने कहा कि भारत के इतिहास में ऐसा पहली बार हुआ है कि केन्द्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेश का पालन करने से खुले तौर पर मना कर दिया हो.

इस संबंध में उपराज्यपाल की तरफ से बताया गया कि सेवाओं से जुड़े मामले पर अभी सुप्रीम कोर्ट का फैसला नहीं आया है. इसकी सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की नियमित बेंच करेगी. अदालत का फैसला आने तक केंद्रीय गृह मंत्रालय का वह नोटिफिकेशन प्रभावी रहेगा, जिसमें सेवाओं को उपराज्यपाल के अधीन किया गया था. केंद्रीय गृह मंत्रालय ने 21 मई 2015 को एक अधिसूचना जारी की थी.

उपराज्यपाल की तरफ से कहा गया कि संविधान के अनुच्छेद 239 एवं 239ए के तहत सर्विसेज से जड़े मामले दिल्ली विधानसभा के दायरे में नहीं आते. लिहाजा दिल्ली सरकार के पास इस बारे में कोई कार्यकारी ताकत नहीं होगी.

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बताया गया कि बीतेे साल हाईकोर्ट के फैसले में भी इसे कायम रखा गया था. वहीं, सर्वोच्च न्यायालय की संवैधानिक पीठ के फैसले में केंद्र सरकार को सलाह दी गई है कि नौ दूसरी अपीलें, जिनमें सेवा भी शामिल है, को नियमित संवैधानिक पीठ में सुना जाएगा. पीठ का फैसला आने तक मई 2015 की अधिसूचना वैध रहेगी.

First published: 7 July 2018, 8:40 IST
 
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