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चांदनी चौक के जौहरियों पर नोटबंदी के बाद छापेमारी की गाज

सादिक़ नक़वी | Updated on: 20 November 2016, 8:13 IST
(एएफपी )
QUICK PILL
  • नोटबंदी के एलान होने के बाद दिल्ली के सबसे बड़े सर्राफ़ा बाज़ार कूचा महाजनी और दरीबा कलां के कारोबारियों में दहशत है. 
  • उनके मुहल्लों में राजस्व खुफिया विभाग की टीमें तैनात हैं और कारोबारियों को लगता है कि उन्हें निशाना बनाया जा रहा है.

चांदनी चौक में कूचा महाजनी की गंदी और अंधियारी गली में बीते कई दिनों से दहशत है. यह वही गली है जहां शहर के बड़े-बड़े जौहरियों की दुकानें हैं. 9 नवंबर के बाद से ही यहां के ज़्यादातर बाज़ार बंद हैं. गली के बाहर, छापामारों की एक सफेद जीप खड़ी है. कुछ लोगों का कहना है कि हाल में भी एक छापा पड़ चुका है. 

गली में मौजूद एक शख़्स ने बताया, 'ये लोग राजस्व खुफिया निदेशालय के कर्मचारी हैं.' 8 नवंबर की रात 12 बजे 500 और 1,000 के नोटों को बंद करने की प्रधानमंत्री की घोषणा के बाद से ही यहां राजस्व खुफिया निदेशालय, आयकर विभाग और वैट अधिकारियों के रोज छापे पड़ रहे हैं.

भुगतान तो करना ही है

सर्राफा व्यापारियों को डर है कि सोने का व्यवसाय सरकार का अगला निशाना बन सकता है. अंदरूनी सूत्रों का कहना है कि 8 नवंबर की रात और इसके एक दिन बाद से इन बड़े व्यवसायियों के कारोबार में तेज़ी आई है. बाज़ार के एक वर्कर ने बताया, 'उस रात लोगों ने सोना 70 हजार रुपए प्रति दस ग्राम के भाव तक खरीदा, जबकि उसकी कीमत सिर्फ 30 हजार रुपए थी.' 

कूजा महाजनी हवाला कारोबारियों के कारण बदनाम रहा है. पहले भी प्रवर्तन निदेशालय सहित तमाम खुफिया एजेंसियों ने वहां छापे डाले हैं और कारोबारियों को हवाला और सोना-चांदी सहित महंगे धातुओं की तस्करी में शामिल पाया है. एक वर्कर ने कहा, 'इस तरह गैरकानूनी गतिविधियों में शामिल होने के कारण ही इन व्यवसायियों पर गाज गिरी है. एजेंसियां सतर्क हो गई हैं और वे कड़ी कार्रवाई कर रही हैं.'

लोगों को दबी आवाज में यह भी कहते सुना गया कि एक जौहरी को आज पड़े छापे में गिरफ्तार किया गया है. हालांकि रिपोर्टर इसकी पुष्टि नहीं कर सका. छापों के बारे में कोई भी व्यवसायी मुंह नहीं खोलना चाहता था. गैरकानूनी रूप से काफी पैसा बना रहे इन व्यवसायियों पर आरोप लगाते हुए एक पानवाले ने कहा, 'भुगतान तो करना ही होगा.'

दुकानें बंद

यहां से कुछ सौ मीटर दूर दरीबा की ओर जाने वाली संकरी गली है, जहां आमतौर पर गहने खरीदने वालों की भीड़ रहती है लेकिन अभी ज्यादातर खाली पड़ी हैं. इनकी दुकानें बंद हैं या फिर शटर्स आधे खुले हैं. गहने बेचने वाले अखिल बताते हैं, 'यहां 8 नवंबर से धंधा नहीं हुआ है. खरीद-फरोख्त के लिए हमारे पास नकदी नहीं है.' चांदी के बर्तन बेचने वाले मंटु कहते हैं, 'पैसों के लिए सडक़ों पर मारामारी है. कुछ गड़बड़ हुई तो क्या होगा? हमारी दुकान और गहनों को कौन बचाएगा?' ये व्यापारी अधिकतर नकद का कारोबार करते हैं, पर अक्सर सही बिल नहीं बनाते. 

सर्राफा व्यापारी अधिकतर नकद का धंधा करते हैं और सही बिल नहीं बनाते. यह धंधा ऐसे ही चलता है, जिसे अब सरकार ने निशाना बनाया है और दुकानें नहीं खोलने की यही मुख्य वजह है. उच्च करेंसी नोटों को बंद करने से उधार पर चलने वाले कारोबार को भी ठेस लगी है क्योंकि जिन छोटे व्यवसायियों ने गहने उधार लिए थे, वे पुरानी करेंसी में भुगतान करना चाहते हैं. इससे थोड़ा तनाव बना हुआ है.

हम खलनायक?

मार्केट एसोसिएशन में लगभग 250 सदस्य हैं. वे छापों से इतने घबरा गए हैं कि रोज आपस में मिल रहे हैं. अखिल कहते हैं, 'यहां अधिकारी नियमित आ रहे हैं.' एक व्यवसायी ने अफसोस से कहा, 'गहनों का बिजनेस करने वाले हम सभी को सबसे बड़ा मुजरिम बताया जाता है. क्या कोई सोचता है कि वे कौन हैं, जो नोटबंदी के बाद सोना दुगुने दाम में खरीद रहे हैं. जौहरियों ने अधिक मूल्य पर सोना इसलिए बेचा क्योंकि उसके ग्राहक थे.'

हालांकि इस बीच कारोबारियों ने बैठक कर एक-दूसरे की मदद का फैसला किया है. एक व्यापारी ने कहा, 'हमें एक दूसरे के लिए खड़े रहने की आवश्यकता है. हमें अपनी बुक्स के लिए सावधान रहने की जरूरत है.' मार्केट एसोसिएशन का वाट्सएप ग्रुप जरूरत के समय जानकारी शेयर करने के लिए उपयोग किया जाता है.

कौन कितना सोना रख सकता है

इस बीच सोशल मीडिया पर कई मैसेज आ रहे हैं कि हो सकता है कि सरकार तय करे कि कौन कितना सोना रख सकता है. इससे व्यापारी और भी ज्यादा घबरा रहे हैं. एक जौहरी ने कहा, 'आयकर विभाग ने केवल इस एक साल में 40 हजार से ज्यादा लोगों को काम पर रखा है. साथ ही सरकार लेन-देन की जांच के लिए प्रक्रिया को व्यवस्थित करने की कोशिश कर रही है. इसका मतलब है और भी ज्यादा छानबीन होगी.' एक अन्य जौहरी ने कहा कि नोटबंदी से इस व्यवसाय से सीधे जुड़े करीब 4 हजार लोग प्रभावित हुए हैं और '25 नवंबर तक बड़े फैसले हो सकते हैं.'

मार्केट एसोसिएशन के प्रमुख तरुण गुप्ता ने कहा, 'हमारी किताबों की स्थिति जब्त होने जैसी ही है, बुरे वक्त में हम कुछ नहीं कर पा रहे.' उन्होंने आगे कहा कि इसका यह भी मतलब होगा कि इनोवेशन के लिए कोई स्कोप नहीं है. सर्राफा व्यवसायी सरकार के इस फैसले से नाराज हैं, पर खुलकर विरोध नहीं कर रहे. 

दिलचस्प यह है कि सर्राफा व्यवसायी सरकार के इस फैसले से नाराज हैं, पर खुलकर विरोध नहीं कर रहे. उनमें से एक ने अपने फोन पर मैसेज दिखाते हुए कहा, 'वॉट्सएप पर 144 की धारा लागू कर दी गई है.' इससे लगता है कि सरकार के विरोध में कोई भी मैसेज होगा, तो उसके विरुद्ध कार्रवाई हो सकती है. 'नरेंद्र मोदी हमारे हृदय सम्राट है', पर यह भी कहा कि जिस तरह नोटबंदी लागू की गई है, उसने व्यापारियों को पंगु बना दिया है. 

उस जौहरी ने आगे कहा, 'काले धन की आड़ में हम व्यवसायियों को निशाना बनाया गया है. कुछ दिनों पहले गुरुपर्व था. गुरुद्वारा शीशगनी को फूलों से सजाया गया. इस साल बहुत कम फूल थे. यह तो एक उदाहरण है.' उसने यह भी कहा कि अर्थव्यवस्था की गाड़ी को फिर से शुरू करना बहुत मुश्किल होगा. 

  

First published: 20 November 2016, 8:13 IST
 
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