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DDA ने आशियाना छीना, सर्द रातों में खुले में सोने को मज़बूर हैं दिव्यांग

कैच ब्यूरो | Updated on: 23 December 2017, 18:13 IST

दिल्ली विकास प्राधिकरण (डीडीए) पर दिव्यांग छात्रों ने गंभीर आरोप लगाए हैं. दिल्ली के वीरेंद्र नगर इलाके में रहने वाले दिव्यांगों ने डीडीए पर उनके हॉस्टल को गिराने का आरोप लगाया है. छात्रों का आरोप है कि बिना किसी सूचना के ये एक्शन लिया गया. 

इस हॉस्टल में करीब 20 दिव्यांग छात्र रहते थे. इन छात्रों ने डीडीए पर आरोप लगाया कि 15 दिसंबर को डीडीए ने इनके हॉस्टल को ढहा दिया. इस हॉस्टल में रहने वाले छात्र दिल्ली विश्वविद्यालय और सर्वोदय स्कूल के छात्र है. ये हॉस्टल करीब 18 साल से दिव्यांगो का आसरा बना हुआ था.

डीडीए के इस एक्शन के बाद ये सभी 20 दिव्यांग छात्र खुले में रहने को मजबूर है. हॉस्टल में रहने वाले छात्रों का आरोप है कि जब डीडीए ने ये एक्शन लिया तब मात्र 3 छात्र यहां मौजूद थे. बाकी सभी छात्र उस समय क्लास गए हुए थे. डीडीए के कर्मचारी बड़ी चीजों को अपने साथ ले गए.

छात्र का कहना है कि हॉस्टल ढहाने के बाद वो सिर्फ उनके डॉक्यूमेंटस और खाने के सामान के बर्तन जैसे छोटे आइटम छोड़ गए. इनका कहना है कि वो हमारे लिए दूसरे हॉस्टल का इंतजाम कर देंगे. लेकिन हम साथ रहना चाहते हैं.

जनकपुरी के वीरेंद्र नगर इलाके बने 'लुई वेलफेयर प्रोग्रेसिव एसोसिएशन आॅफ द ब्लाइंड' हॉस्टल के केयरटेकर कमलेश कुमार ने कहा कि इस हॉस्टल में 8 कमरे थे और हम 20 लोग इसमें रहते थे. हम सभी अंधे हैं और एक दूसरे का सहारा हैं. दिल्ली में इस कड़ाके की ठंड में हमें बेघर कर दिया गया है. हम लोगों को एक दूसरे से अलग करना पूरी तरह से गलत है. 

वहीं, अंग्रेजी अखबार इंडियन एक्सप्रेस से बातचीत करते हुए डीडीए के अधिकारियों ने इन आरोपों से इनकार किया है. डीडीए के एक अधिकारी का कहना है कि इमारत ढहाने से पहले कई बार सूचना दी गई थी. 

उन्होंने कहा, "हम लोग हॉस्टल प्रबंधन के साथ अप्रैल महीने से संपर्क में थे, कार्रवाई से पहले हमनें प्रबंधन को चार बार सूचित किया था. इस कार्रवाई से एक दिन पहले भी हमनें मौखिक रूप से उन्हें बता दिया था. हमनें इस कार्रवाई की लिखित सूचना इसलिए नहीं दी थी क्योंकि लिखित सूचना पर हॉस्टल प्रबंधन कोर्ट से स्टे ऑर्डर ले आता और ऐसे में हमें हॉस्टल हटाने में फिर दिक्कत होती."

First published: 23 December 2017, 18:13 IST
 
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