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क्या 31 दिसंबर 2016 से दिल्ली महिला आयोग बंद हो जाएगा?

श्रिया मोहन | Updated on: 22 December 2016, 8:27 IST
(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)

स्वाति मालीवाल अपने मिशन पर हैं. वे उस संस्था को बचाने में जुटी हैं, जिससे पिछले डेढ़ साल से जुड़ी हैं. स्वाति दिल्ली महिला आयोग की प्रमुख हैं. इन दिनों मालीवाल स्थानीय, राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय प्रेस के साथ एक के बाद एक बैठकें रख रही हैं. बताना चाहती हैं कि दिल्ली के लेफ्टिनेंट जनरल नजीब जंग दिल्ली महिला आयोग के काम में बाधा डाल रहे हैं.

अगर 31 दिसंबर तक इस ओर ध्यान नहीं दिया गया, तो औरतों के संरक्षण के लिए बना यह आयोग बंद हो जाएगा. आयोग के नहीं रहने से ‘रेप केपिटल’ के नाम से कुख्यात इस शहर में अगले साल से महिलाओं की दुश्वारियां फिर बढ़ जाएंगी. यहां औसतन 6 औरतों का रोज बलात्कार होता है.

बर्बादी की कहानी

27 जुलाई को 14 साल की जिस किशोरी का अपहरण के बाद सीरियल रेप और तेजाब डाला गया, वह दिल्ली के बुराड़ी इलाके में मर गई. मरने से पहले दिल्ली महिला आयोग ने इस मामले को अपने हाथ में लिया था और एक निजी अस्पताल में उसका इलाज करवाने की कोशिश की थी.

उसके परिवार की बार-बार कोशिश के बावजूद बुराड़ी के एसएचओ ने बदमाशों के खिलाफ एफआईआर दर्ज नहीं की. इस संबंध में आयोग ने एसएचओ को एक नोटिस भी भेजा था.

दिल्ली महिला आयोग के वाट्सएप ग्रुप से मीडिया को उसकी मौत की खबर देते समय आयोग की मीडिया कोऑर्डिनेटर ने गलती से पीडि़ता का नाम बता दिया. ग्रुप में तुरंत इसकी माफी मांगी गई और अनुरोध किया कि उसका नाम नहीं छापें. हालांकि मालीवाल ने पीडि़ता का नाम मरणोपरांत इस्तेमाल करने की उसके परिवार से अनुमति ले ली थी. इसके बावजूद बुराड़ी के एसएचओ ने दिल्ली महिला आयोग के खिलाफ उसी दिन एफआईआर दर्ज की. 

कुछ ही हफ्तों में दिल्ली महिला आयोग की पूर्व अध्यक्ष बरखा सिंह शुक्ला ने भ्रष्टाचार विरोधी ब्यूरो (एसीबी) में दिल्ली महिला आयोग के खिलाफ भ्रष्टाचार का केस दर्ज करवाया, आरोप लगाते हुए कि आयोग में अवैध नियुक्तियां की गई हैं. 

मालीवाल के मुताबिक 'संविदात्मक स्टाफ की नियुक्ति की तुरंत आवश्यकता थी ताकि आयोग अपने बढ़े हुए दायित्वों को पूरा कर सके.  मसलन, जब दिल्ली सरकार ने 181 हेल्पलाइन आयोग को दिए, तो दिल्ली महिला आयोग को 16 और स्टाफ की नियुक्तियों की जरूरत महसूस हुई, ताकि कॉल्स में जो 35 फीसदी दर से कमी थी, और उसमें और कमी की जा सके. दर 35 प्रतिशत से घट कर तुरंत प्रभाव से 4 प्रतिशत रह गई'.

एसीबी ने अपनी जांच शुरू कर दी. ब्यूरो के आदमी कई दिन तक आयोग में रहे. स्टाफ के घर गए, जो तेजाब पीडि़ताएं, अनाथ और समाज के वंचित वर्गों से हैं. 

मालीवाल कहती हैं, ‘हमने जांच में सहयोग दिया और पुरानी सूचनाओं की जानकारी दी, पर ब्यूरो ने हमारे स्टाफ के पड़ोस में तमाशा खड़ा कर दिया. वे एसीबी को देखकर इतना घबरा गईं, मानो उनसे कोई अनर्थ हो गया हो'. मालीवाल कहती हैं कि आयोग ने उसी तरह नियुक्तियां की हैं, जिस तरह उसकी शुरुआत से होती रही हैं. विज्ञापन निकाले गए. कई संविदात्मक स्टाफ को एनजीओ की सिफारिश पर रखा गया, तो कुछ को किसी के कहने पर. 

इस बढ़ी हुई टीम ने एक साल में 12,000 मामले संभाले, 181 पर 2.16 लाख कॉल्स लिए, बलात्कार विरोधी सेल में 5,733 मामले और क्राइसिस इंटरवेंशन सेंटर पर सलाहकारों ने 1869 यौन उत्पीडऩ के मामले देखे, और 7500 बार फील्ड में गईं. 

मार्च में इस साल 22 कारें खरीदी गईं और महिला ड्राइवर और सलाहकार नियुक्त किए गए ताकि हिंसा और यौन उत्पीडऩ की शिकार पीडि़ताओं की मौके पर तुरंत मदद दी जा सके. 

आज दिल्ली महिला आयोग में 110 की टीम है, जिनमें 94 संविदात्मक स्टाफ है. यह राजधानी में दिल्ली सरकार और केंद्र सरकार की सभी संस्थाओं में कटी शक्तियों की मांग कर रहा है.

स्वायत्तता को खतरा

मालीवाल ने जांच में सहयोग दिया और एक एफआईआर का भी मुकाबला किया, पर दिल्ली आयोग की स्वयत्तता को वास्तविक खतरा अक्टूबर में आया, जब लेफ्टिनेंट जनरल ने मुख्यमंत्री के सदस्य सचिव नियुक्त करने के आदेश नहीं माने और आयकर विभाग की आईएएस अधिकारी अलका दीवान को पार्ट टाइम सचिव बना दिया.

सदस्य सचिव का मुख्य काम बजट को मंजूरी देना है, पर दीवान ने आयोग के 7 करोड़ के बजट में से एक रुपया नहीं लेने दिया. उन्होंने कहा, राशि के लिए पहले वित्त विभाग से मंजूरी लेनी चाहिए थी, और संविदात्मक स्टाफ के वेतन सहित अन्य किसी भी खर्चे पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया. 

मालीवाल ने बताया, ‘दिल्ली महिला आयोग अधिनियम के सेक्शन 9 (2) और 11 (2) के मुताबिक आयोग को अपने विवेक से राशि खर्च करने का अधिकार है. ऐसे कई प्रमाण हैं कि हम स्वायत्त हैं. आयोग एक ट्रांसफर्ड सब्जेक्ट है, और लेफ्टिनेंट जनरल सदस्य सचिव को नियुक्त करने के लिए दिल्ली सरकार की मदद और सलाह से बाध्य है. यह असंवैधानिक और अवैध है. हमने वित्त विभाग को फाइल्स देने से इनकार कर दिया क्योंकि आयोग ने कभी इस तरह काम नहीं किया था.’ 

दीवान का कार्यकाल तीन महीने में खत्म हो गया और 1 दिसंबर को लेफ्टिनेंट जनरल ने फिर से मुख्यमंत्री अरविंद केजरीवाल की नियुक्ति को दरकिनार कर दिया. उन्होंने दिल्ली सरकार के महिला एवं बाल विकास मंत्रालय और समाज कल्याण मंत्रालय से दिलराज कौर को नियुक्त कर दिया.

केजरीवाल ने इस नियुक्ति को मंजूरी नहीं दी. इसकी बजाय उन्होंने आयोग के लंबे समय से रहे कानूनी सलाहकार पी.पी. ढल को नियुक्त किया. दिल्ली सरकार की घोषणा के विरुद्ध कौर ने जॉइन किया. उन्होंने रैन बसेरे से लेकर, स्टाफ के लिए चाय और वेतन को मंजूरी देने तक के लिए हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया.

मालीवाल के अनुसार यह नियुक्ति अधिकारी के निजी हितों से प्रभावित है. दिल्ली महिला आयोग ने नारी निकेतन, आशा किरंस, मानव तस्करी की पीडि़ताओं का पुनर्वास और महिला एवं बाल विकास मंत्रालय के अधीन आने वाले अन्य कई मुद्दों पर उनकी स्थिति को लेकर उन्हें कई नोटिस भेजे थे. 

मालीवाल कहती हैं, ‘अगर मेरी फाइलें उनकी मंजूरी के लिए जानी है, तो मैं उनसे सवाल नहीं कर सकती. मेरे हाथ बंधे हैं. अगर आप आयोग की स्वायत्तता को कुचलते हैं, तो आप सालों से चल रहे महिला आंदोलनों की कोशिशों को कुचल रहे हैं'. 

तीन महीने हो गए हैं, दिल्ली महिला आयोग के संविदात्मक स्टाफ को वेतन दिए. 20 सालों से काम कर रहे लोगों तक को नहीं मिला. मालीवाल कहती हैं, ‘मेरा ड्राइवर आयोग में 20 सालों से है, और अब चूंकि वे मेरा चेहरा देखना पसंद नहीं करते, उन्होंने उनका भी वेतन रोक दिया.’ मालीवाल ने स्टाफ का साथ देने के लिए खुद का 30,000 रुपए का मासिक वेतन लेना बंद कर दिया. 

भ्रांतियां और बंद की तैयारी

मालीवाल कहती हैं, ‘हाल में बहुत ज्यादा भ्रांतियां और निराशा है. महिला पंचायत जैसे नए प्रोजेक्ट शुरू करने के लिए पैसा नहीं है. हम अपना काम जारी नहीं रख पा रहे हैं. स्टाफ को वेतन नहीं मिला है, तो उन्हें मॉनिटर करने का भी हमें कोई अधिकार नहीं है. लेफ्टिनेंट जरनरल ने स्थितियों का जायाजा लेने से इनकार कर दिया. यह लोकतंत्र का मजाक है.’ 

नोटबंदी के समय, कर्मचारियों के लिए इससे ज्यादा निराशाजनक खबर नहीं हो सकती. रोटी के लिए लोगों से पैसा उधार ले रहे कर्मचारी रोज संघर्ष कर रहे हैं. अगर नौकरशाही गतिरोध जारी रहा, तो 1 जनवरी 2017 से संविदात्मक स्टाफ काम पर आना बंद कर देगा. 

मालीवाल कहती हैं, ‘यह स्टाफ नहीं रहता है, तो हमारे पास दिल्ली महिला आयोग के सदस्यों के अलावा केवल तीन कर्मचारी हैं. एक साल में 12,000 मामले 8 लोग कैसे संभालेंगे?, रेप विरोधी सेल, 181, तस्करी पीडि़ताओं का पुनर्वास-ये सारे काम ठप हो जाएंगे.’ 

दिल्ली महिला आयोग ने पिछले डेढ़ सालों में मालीवाल के अधीन अपूर्व काम किया है. जिस आयोग ने पूरे साल महज एक केस हैंडल किया था, उसे मालीवाल ने एक प्रभावी और उत्साही महिला आयोग बनाया. उन्होंने स्व-प्रेरणा से काम किया. दिल्ली की महिलाओं को न्याय दिलाने और उनके पुनर्वास के लिए मिशन की तरह काम किया.

31 दिसंबर में अब 11 दिन बचे हैं. अगर आयोग को सच में बंद होने दिया, तो दिल्ली उस एकमात्र संस्था को खो देगी, जो उसकी महिलाओं के संरक्षण और पीडि़ताओं के पुनर्वास के लिए अथक काम करती है.

First published: 22 December 2016, 8:27 IST
 
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