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मुख्य सचिव मारपीट मामला: केजरीवाल और सिसोदिया की बढ़ सकती हैं मुश्किलें

कैच ब्यूरो | Updated on: 19 May 2018, 12:43 IST

दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में सीएम अरविंद केजरीवाल और उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया की मुश्किलें बढ़ सकती है. यही नहीं पार्टी के अन्य विधायकों के खिलाफ भी इस मामले में कार्रवाई हो सकती है. सिविल लाइंस थाना पुलिस ने जिन आठ धाराओं के तहत मुकदमा दर्ज किया है, उनमें अधिकतम सात साल तक की सजा का प्रावधान है.

वहीं पुलिस अधिकारी का कहना है कि मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री से पूछताछ के बाद तेज-तर्रार इंस्पेक्टरों की टीम चार्जशीट तैयार करेगी. बड़े सरकारी अधिकारी के साथ घटना होने के कारण कोर्ट में चार्जशीट दायर करने से पहले उपराज्यपाल या गृहमंत्रालय तीस हजारी कोर्ट के मुख्य महानगर दंडाधिकारी को मुकदमा चलाने की जरूरी अनुमति देंगे. बता दें कि अभी अंशु प्रकाश की शिकायत पर ही पुलिस मुकदमा दर्ज कर जांच कर रही है.

बता दें कि गृह मंत्रालय या उपराज्यपाल से मुकदमा चलाने की अनुमति मिलने के बाद शिकायतकर्ता अंशु प्रकाश अगर भविष्य में बयान से पटलकर केस में समझौता करना चाहेंगे, तो नहीं कर पाएंगे. मुख्य सचिव के साथ मारपीट हुई है, इसलिए गृहमंत्रालय व उपराज्यपाल से वह अनुमति न देने का अनुरोध नहीं करेंगे. अगर अनुरोध करते भी हैं तो माना नहीं जाएगा.

पुलिस अधिकारी का कहना है कि आम आदमी पार्टी के सरकार में आने के बाद मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री के खिलाफ जितने भी मुकदमे हुए हैं, उनमें मुख्य सचिव के साथ मारपीट का मामला सबसे भारी है. बता दें कि दिल्ली सरकार के मुख्य सचिव के साथ मुख्यमंत्री आवास पर मारपीट की यह घटना 19 फरवरी की है. बताया जाता है कि मुख्य सचिव ने पुलिस से कहा है कि वह इस मामले में गवाही देने के लिए भी तैयार हैं. वहीं पुलिस इस मामले में चार्जशीट दायर करने की तैयारी कर रही है.

इन धाराओं में दर्ज है मुकदमा

दिल्ली के मुख्य सचिव अंशु प्रकाश से मारपीट के मामले में केजरीवाल और सिसोदिया पर इन मामलों में मामला दर्ज है. जिनमें सीआरपीसी की धारा 186 (सरकारी कामकाज में बाधा पहुंचाना, सजा छह महीने, जमानती), 353(सरकारी कामकाज के दौरान सरकारी अधिकारी के साथ मारपीट, सजा 7 साल, गैर जमानती), 332 (सरकारी कामकाज के दौरान मारपीट करके साधारण चोट पहुंचाना, गैर जमानती, सजा सात साल), 120बी (आपराधिक साजिश रचना, अपराध के अनुरूप सजा
504: जान से मारने की धमकी), 342 (कमरे में बंधक बनाकर रखना, जमानती, सजा छह महीना)
506 (जान से मारने की धमकी, जमानती, अपराध के अनुरूप सजा) और 323 (34) (मारपीट करना) शामिल हैं.

मुख्यमंत्री और उपमुख्यमंत्री को बनाया जाएगा आरोपित

पुलिस अधिकारी के मुताबिक मुख्यमंत्री आवास पर मुख्यमंत्री के निर्देश पर उनके तत्कालीन सलाहकार वीके जैन ने अंशु प्रकाश को बार-बार फोन कर आने के लिए कहा था. घटना से कई घंटे पूर्व उपमुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया ने भी अंशु प्रकाश को फोन कर एक मामले में फाइल लेकर अपने घर आने को कहा था. बाद में उन्होंने मुख्यमंत्री के यहां ही रात में फाइल लेकर पहुंचने को कहा. आधी रात को जब अंशु प्रकाश मुख्यमंत्री के सिविल लाइंस स्थित कैंप कार्यालय पर पहुंचे तब उनके साथ मुख्यमंत्री व उपमुख्यमंत्री की मौजूदगी में विधायकों ने मारपीट की.

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First published: 19 May 2018, 12:43 IST
 
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