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दिल्ली: SC के फैसले का नहीं कोई असर, चंद घंटे के भीतर ही इस विभाग ने लौटाई सिसौदिया की फाइल

कैच ब्यूरो | Updated on: 5 July 2018, 9:48 IST

सुप्रीम कोर्ट ने केजरीवाल सरकार की याचिका पर अपना फैसला देते हुए बुधवार को कहा कि दिल्ली के लेफ्टिनेंट-गवर्नर के पास कोई स्वतंत्र निर्णय लेने की शक्ति नहीं है और उन्हें मंत्रियों की परिषद की सलाह सुननी चाहिए. लेकिन शीर्ष अदालत के फैसले के चंद घंटे के भीतर ही दिल्ली में एक बार फिर अधिकारों की लड़ाई शुरू हो गई है. 

सुप्रीम कोर्ट के फैसले के चंद घंटे के भीतर ही सर्विसेज विभाग ने डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया की भेजी गई फाइल को लौटा दिया है. देर रात दिल्ली के नौकरशाह के एक वरिष्ठ अफसर ने उप-मुख्यमंत्री मनीष सिसोदिया के आदेश पर जवाब देते हुए उसे मानने से साफ इनकार कर दिया.

दिल्ली के सर्विसेज डिपार्टमेंट के सचिव ने मनीष सिसोदिया का आदेश वापस लौटा दिया. यह विभाग अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग और सेवा से जुड़े मामलों को देखता है. इस विभाग ने सिसोदिया के आदेश को न मानने के पीछे दो तर्क दिए गए हैं. विभाग ने कहा है कि सुप्रीम कोर्ट के आदेश में कहीं भी अगस्त 2016 के नोटिफिकेशन को रद्द नहीं किया गया है और इस नोटिफिकेशन में अफसरों के ट्रांसफर और पोस्टिंग का अधिकार उपराज्यपाल या मुख्य सचिव के पास है.

 

इससे पहले सुप्रीम कोर्ट के फैसले से खुश केजरीवाल सरकार ने कैबिनेट की बैठक बुलाकर आईएएस समेत तमाम अफसरों के ट्रांसफर पोस्टिंग पर मुख्यमंत्री से अनुमति लेने का फरमान सुनाया था. बुधवार को सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद दिल्ली के डिप्टी सीएम मनीष सिसोदिया ने कहा था कि 2 साल पहले हाईकोर्ट के आदेश के बाद दिल्ली सरकार से ट्रांसफर-पोस्टिंग की ताकत छीनकर उपराज्यपाल और मुख्य सचिव को दे दी गई थी.

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इसके बाद बतौर सर्विसेज विभाग मंत्री सिसौदिया ने आदेश जारी किया है कि इस व्यवस्था को बदलकर आईएएस और दानिक्स समेत तमाम अधिकारियों की ट्रांसफर या पोस्टिंग के लिए अब मुख्यमंत्री से अनुमति लेनी होगी.

गौरतलब है कि सुप्रीम कोर्ट ने बुधवार को दिल्ली सरकार की अर्जी पर सुनवाई करते हुए एक अहम फैसले में कहा है कि कैबिनेट की सलाह पर ही राज्यपाल को फैसले लेने का अधिकार है. जस्टिस दीपक मिश्रा ने अपना फैसला पढ़ते हुए कहा कि सरकार को हर मामले में एलजी की इजाजत जरूरी नहीं है.

First published: 5 July 2018, 9:48 IST
 
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