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नोटबंदीः दिल्ली का थोक बाज़ार चरमराया, कारोबारी-मजदूर सब हताश

सुहास मुंशी | Updated on: 20 November 2016, 8:08 IST
(शम्स कादरी )
QUICK PILL
  • नोटबंदी ने दिल्ली के सब्ज़ी और फूल के थोक बाज़ारों को बुरी तरह प्रभावित किया है. 
  • कारोबारियों पर जहां उनकी ख़राब हो रही सब्ज़ियों और फूलों को बचाने का दबाव है, वहीं दिहाड़ी मज़दूरों को समझ नहीं आ रहा कि वह अपनी रोज़मर्रा की कमाई कहां से निकालें. 

सुबह के 9 बज गए और ओखला सब्जी मंडी में सब्जियों की गठरियां ज्यों की त्यों पड़ी हैं. ऐसा बमुश्किल होता है कि थोक बाजार में इतनी देर तक सामान न बिके. व्यापारियों का दावा है कि 8 नवम्बर को नोटबंदी के फैसले के बाद से उन्हें 70 से 90 फीसदी का नुकसान हुआ है. दिन-ब-दिन हालात बदतर होने की ही आशंका है. व्यापारी अब बाजार बंद करने और अलग-अलग सब्जी मंडियों में विरोध प्रदर्शन की बातें कर रहे हैं.

उनका दावा है कि बाजार में नकद की कमी है. किसानों के पास खेत में काम करने वाले मजदूरों को देने के लिए पैसे नहीं है और न ही माल बाजार में भेजने के लिए किराये-भाड़े के लिए नकद है. थोक बाजार में कैश की कमी से और माल न खरीद पाने से व्यापारी मायूस हैं. हालत यह है कि खेतों में फल-सब्जियां सड़ रही हैं और व्यापारी औने-पौने दामों में सब्जी बेचकर इनसे छुटकारा पा रहे हैं. कुछ जगह सब्जियां आधी रेट तक में बिकी हैं. 

सब्जियां सड़ रही हैं, खरीददार नहीं

ओखला मंडी में सब्जी विक्रेता बाबा इस्माइल ने कहा, बाजार खाली पड़े हैं. कोई नजर नहीं आ रहा. 7 बजे तक मंडी पूरी खाली हो जाती थी लेकिन अब हमें रोज बड़ा भारी नुकसान उठाना पड़ रहा है. एक-एक दिन काटना भारी है. हमें लगता है कि बस हम आ रहे हैं, दुकान बढ़ा रहे हैं और वापस घर जा रहे हैं. 

फिलहाल इस्माइल की पत्नी का एम्स में ऑपरेशन हुआ है. जब वह मंडी में काम नहीं कर रहे होते हैं तो अपनी पत्नी की दवा लाने के लिए 100-100 रूपए के नोट के बिलों की वसूली करने निकल जाते हैं. परेशान हाल इस्माइल कहते हैं, 'मुझे दोहरी मार पड़ी है.' 

गाजीपुर में एक थोक व्यापारी सुनील गावस्कर ने कहा, 'लोग खून के आंसू रो रहे हैं. अगर यही हाल रहा तो लोग एक दूसरे पर झपटने लगेंगे. तकलीफ नेताओं को नहीं, जनता को हो रही है. उन्होंने कहा, अकाउंटेंट से लेकर मजदूरों तक की आजीविका मंडी की एक दुकान पर ही निर्भर है और नोटबंदी से मंडी की सैंकड़ों दुकानें प्रभावित हुई हैं. 

हर जगह बिक्री में 500 रूपए का ही नोट चलता आया है लेकिन अब सब जगह 2,000 रूपए के बिल चल रहे हैं और जिनके पास 100-100 रूपए के नोट हैं, वे डर के मारे इन्हें नहीं खर्च कर रहे. मैं अपने मुलाज़िमों को वेतन कैसे दूंगा? मोदी के फैसले से लोग भूखे मर रहे हैं.

मोदी से नाराज़गी

इन बाज़ारों में काम करने वाले मजदूर नोटबंदी से काफी गुस्से में हैं. ओखला मंडी में दिहाड़ी मजदूरी करने वाले एक मजदूर ने बताया वह दो दिन की छुट्टी करके बैंक की लाइनों में खड़े रहे, फिर भी दोनों ही बार उन्हें बैरंग लौटना पड़ा. रामजी प्रसाद ने अपना दर्द कुछ यूं बयां किया, 'मेरी दो दिन की दिहाड़ी का नुकसान हो गया और मेरे पास पैसे भी नहीं हैं. घर पर मेरे पास 70,000 रूपए पड़े हैं. बिना बैंक अकाउंट के मैं इन्हें कैसे जमा करवाउं. नेताओं ने हमारे साथ बहुत गलत किया है. हम अपना ही पैसा काम में नहीं ले पा रहे हैं.' 

फूल बाज़ार भी प्रभावित

यह केवल नीति ही नहीं है. इससे बाजार में रुपयों का प्रवाह 85 प्रतिशत तक कम हो गया है. यह समय ऐसा है जब नोटबंदी ने दिल्ली के खाद्यान्न और फूलों के थोक बाजार की कमर तोड़ कर रख दी है. गाजीपुर के थोक फूल बाजार के अध्यक्ष अशोक रंधावा ने बताया कि कारोबार में सीधे 90 फीसदी की कमी आई है.

वह कहते हैं, 'शादियों के सीजन में ही हमारी ज्यादा बिक्री होती है और इसी वक्त यह परेशानी खड़ी हुई है. हमें कोलकाता, हिमाचल और उत्तराखंड सहित देशभर से फूल मिलते हैं. अब इन जगहों से फूलों के ट्रक आने बंद हो गए हैं और हम बर्फ की सिल्लियों पर प्रिजर्व करके रखे गए फूलों के पुराने स्टॉक को ही व्यापार में काम में ले रहे हैं.'

उन्होंने कहा, मंत्री और अफसर कह रहे हैं कि उन्होंने बाजार में पांच सौ रूपए का नोट शुरू किया है, क्या कोई बताएगा, आखिर नोट है कहां? और किस बाजार में चल रहे हैं. नोटों को कहां लॉन्च किया गया है? व्यापारियों का अनुमान है कि पिछले दस दिन में हुए इस नुकसान की भरपाई करने में महीनों लगेंगे और नोटों की किल्लत उन्हें हर दिन पीछे धकेल रही है.

First published: 20 November 2016, 8:08 IST
 
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