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विकलांगों के हज यात्रा पर रोक नीति को केंद्र ने ठहराया सही, बताई ये बड़ी वजह

कैच ब्यूरो | Updated on: 12 April 2018, 11:47 IST

विकलांगों को हज यात्रा में शामिल न करने की हज नीति को सही ठहराते हुए अल्‍पसंख्‍यक मंत्रालय ने दिल्‍ली हाईकोर्ट में कहा है कि इस तरह के लोग भीख मांगने में शामिल पाए गए हैं. मंत्रालय ने कहा कि सऊदी अरब में इस तरह से भीख मांगने पर बैन है. सरकार ने दिल्ली हाई कोर्ट में दाखिल एक हलफनामे में बताया, "यह फैसला उन घटनाओं की वजह से लिया गया, जिनमें कई लोग भीख मांगने की घटनाओं में शामिल पाए गए.”

बता दें कि अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने यह हलफनामा अदालत में दिया है. इसके मुताबिक, साल 2012 में जेद्दा स्थित भारतीय कौंसलुट जनरल ने ‘स्क्रीनिंग’ की सलाह दी थी. वहीं सऊदी अरब ने खुद इस तरह का कोई बैन नहीं लगाया है. इस देश ने तो बुर्जुगों और दिव्यांगों के लिए सुविधाओं को और बढ़ाया है.

दिल्ली हाई कोर्ट में बुधवार को इस मामले में सुनवाई हुई. कार्यकारी चीफ जस्टिस गीता मित्तल और जस्टिस हरिशंकर की बेंच की ओर से दिए गए नोटिस पर मंत्रालय ने यह जवाब दाखिल किया. कोर्ट ने यह नोटिस उस याचिका पर सुनवाई करते हुए भेजा था, जिसमें साल 2018-2022 की हज पॉलिसी को चुनौती दी गई है.

बता दें कि भारतीय हज कमिटी की ओर से विकलांगों के हज यात्रा पर जाने पर रोक है. इस मामले में याचिकाकर्ता गौरव कुमार बंसल सुप्रीम कोर्ट में एडवोकेट हैं. बंसल का कहना है कि यह पॉलिसी दिव्यांगों के अधिकारों से जुड़ी राइट्स ऑफ पर्सन्स विद डिसेबिलिटीज (RPWD) एक्ट 2016 का उल्लंघन करती है.

इसके अलावा, यह संविधान में दिए गए अधिकारों का भी हनन है. याचिकाकर्ता ने पॉलिसी में विकलांगों के लिए इस्तेमाल की गई भाषा पर भी सवाल उठाए थे. बता दें कि दिसंबर 2017 में इस पॉलिसी को लेकर विकलांगों के हित में काम करने वाली संस्थाओं का गुस्सा फूट पड़ा था.

वहीं अल्पसंख्यक मामलों के मंत्रालय ने संशोधित 2018-2022 हज पॉलिसी में न केवल विकलांगों को हज यात्रा पर रोक लगाने वाले विवादित क्लॉज को बनाए रखा, बल्कि आपत्तिजनक भाषा को भी नहीं बदला. उस वक्त अल्पसंख्यक मामलों के मंत्री मुख्तार अब्बास नकवी ने आपत्तिजनक लाइनों को मंत्रालय की वेबसाइट से हटाने के निर्देश दिए थे. हालांकि, बैन को जारी रखा गया था.

मंत्रालय का कहना है कि पवित्र कुरान के तहत सबके लिए हज पर जाना जरूरी भी नहीं है. इस यात्रा में बड़ी मेहनत लगती है. पैदल ही एक से दूसरी जगह जाना होता है. मीना स्टेशन पर भीड़ भी बड़ी समस्या है. भगदड़ या अन्य अनहोनी में शारीरिक रूप से अक्षम लोग ही शिकार होते देखे गए हैं. फिर भी हमने हज कमिटी से नए प्रावधानों पर फिर विचार को कहा है.

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First published: 12 April 2018, 11:47 IST
 
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