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एक्सक्लूसिव: नोटबंदी के 'फ़ायदे' गिनाने के लिए स्कूलों का इस्तेमाल कर रही भाजपा

(आर्या शर्मा/कैच न्यूज़)
QUICK PILL
  • दिल्ली के नगर निगम स्कूलों में अभिभावक-शिक्षक मीट में बच्चों के पेरेंट्स को नोटबंदी के फ़ायदे गिनाए गए हैं. 
  • हालांकि इस मीट में पहुंचे ज़्यादातर अभिभावक नोटबंदी की वजह से अपनी परेशानियां गिनाते नज़र आए.  

नोटबंदी के फ़ैसले को सही ठहराने के लिए भारतीय जनता पार्टी स्कूलों का सहारा ले रही है. दिल्ली के नगर निगम स्कूलों में बच्चों के अभिभावकों को समझाया जा रहा है कि 8 नवंबर को लिया गया नोटबंदी का फ़ैसला देशहित में है. 24 नवंबर को उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने अपने इलाके के सभी स्कूलों के लिए एक सर्कुलर जारी किया. इसमें 26 नवंबर को हुई अभिभावक-शिक्षक मीट (पीटीएम) का अजेंडा लिखा हुआ था. सर्कुलर में एक बिंदु यह भी था अभिभावक 'नोटबंदी नीति से नहीं घबराएं.'

सर्कुलर

उत्तरी दिल्ली नगर निगम ने 740 प्राइमरी स्कूलों के लिए यह सर्कुलर जारी किया था. सर्कुलर में सभी स्कूलों के प्रिंसिपल और टीचरों के लिए निर्देश थे कि वे अभिभावक को इन मुद्दों की जानकारी दें. 26 नवंबर यानी शनिवार को कैच ने एक प्राइमरी स्कूल का मुआयना किया. हमने पाया कि बच्चों के अभिभावक नोटबंदी को लेकर बेहद परेशान हैं. 

समयपुर बादली के एक स्कूल में उन अभिभावकों को ‘शिक्षा’ दी गई, जिन पर नोटबंदी का बुरा असर हुआ है. इनमें ज़्यादातर दिहाड़ी मज़दूर और असंगठित क्षेत्र के मजदूर शामिल हैं. स्कूल की शाम की शिफ्ट (दोपहर 1 से 6) के दौरान तीसरी क्लास में एक टीचर के सामने जमीन पर 40 लडक़े बैठे थे और उसी कमरे में दूसरी तरफ़ 15-20 माताएं एक समूह में. यहां ब्लैक बोर्ड पर पीटीएम के ‘मुद्दे’ लिख रखे थे. करीब डेढ़ बजे टीचर ने अपनी ‘क्लास’ शुरू की.

टीचर ने बच्चों के लिए आधार कार्ड बनाने और बैंक खाता खुलवाने के महत्व से ‘पढ़ाई’ की शुरुआत की. फिर बेटी बचाओ, बेटी पढ़ाओ अभियान का जिक्र करते हुए लड़कियों को शिक्षित करने का महत्व बताया. इसके बाद स्वच्छ भारत अभियान और पर्यावरण प्रदूषण कम करने की आवश्यकता पर जोर दिया. अंत में वे नोटबंदी पर आए. ऐसा लग रहा था जैसे टीचर इस विषय पर पूरी तैयारी करके आए हैं. 

टीचर ने कहा, ‘हां, हम सब नोटबंदी से परेशान हैं. पर हमें समझना चाहिए कि आगे चलकर हमें इससे फायदा होगा. एक बार काले धन का सफाया हो जाए, तो यह हम सब के लिए अच्छा रहेगा. बस कुछ दिनों की और बात है. मोदीजी ने यह देश के लिए किया है, सबके अच्छे के लिए किया है.’ फिर वह टीचर बच्चों की तारीफ करने लगते हैं कि नोटबंदी के बारे में बच्चों को अच्छी जानकारी है, मसलन नए करेंसी नोटों का आना आदि. कुल मिलाकर पैरेंट्स को यह बताना था कि वे भले ही अभी परेशान हैं, पर अच्छे दिन जल्दी आएंगे.

पीटीएम

26 नवंबर को पहली से पांचवीं क्लास तक के लिए पीटीएम बुलाई गई थी, मगर तीसरी क्लास में सबसे ज्यादा अभिभावक थे. पीटीएम में हमेशा की तरह मांएं और आंटियां थीं, कुछ के साथ छोटे बच्चे थे. उन्होंने बताया कि उनके पति नहीं आ पाए क्योंकि उनको दिहाड़ी पर जाना था. वहीं कुछ कक्षाओं में तो एक भी अभिभावक नहीं था. टीचर ने कहा कि दिहाड़ी की वजह से ज़्यादातर अभिभावक नहीं आ सके हैं. वे बेहद गरीब हैं, इसलिए एक घंटे की मजदूरी भी नहीं छोड़ सकते.

पीटीएम के बाद कुछ औरतों ने इस रिपोर्टर को बताया कि नोटबंदी ने उनकी खस्ताहाल जिंदगी को और दुश्वार हो गई है. ज्यादातर अभिभावक यूपी, बिहार से थे, और कुछ राजस्थान और हरियाणा से. कुछ घरेलू औरतें थीं, तो कुछ अपना काम छोड़ कर आई थीं. उनमें से ज्यादातर मुसलमान थीं. ये औरतें और उनके पति दिहाड़ी मजदूर और असंगठित क्षेत्र के कामगार हैं.

इनके अलावा कारख़ानों में काम करने वाले मज़दूर, निर्माण क्षेत्र के मज़दूर, रेहड़ी पर दुकान चलाने वाले, घरों में काम करने वाले, साइकिल रिक्शा चलाने वाले, ड्राइवर, घर में कपड़े वग़ैरह सिलने वाले शामिल थे. 

ज़्यादातर दिहाड़ी मज़दूर

35 साल की रज़िया के पति की मौत तीन महीने पहले हो गई थी. वह एक कारख़ाने में काम करते थे. रज़िया चार बच्चों के साथ उत्तरी दिल्ली की झुग्गी बस्ती में अकेली रहती हैं. दो बच्चे प्राइमरी स्कूल में हैं. पुराने नोटों को बदलवाने के लिए वह बैंक के बाहर तीन दिन खड़ी रहीं, पर जब-जब उनकी बारी आई तो कैश ख़त्म हो गया. आखिर में रज़िया एक एजेंट के पास गईं, जिसने 2500 रुपए के बदले 100-100 के 20 नोट यानी कि 2000 रुपए दिए. उन्होंने कहा, ‘मेरे और बच्चों के खाने के लिए कुछ नहीं था और इसके अलावा मेरे पास दूसरा कोई रास्ता भी नहीं था.’

उत्तर प्रदेश की रहने वाली सुल्ताना (40) इसलिए ज़्यादा परेशान हैं क्योंकि 24 नवंबर के बाद से पुराने नोट नहीं बदले जा रहे. सुल्ताना और उनके पति निर्माण क्षेत्र में काम करने वाले मज़दूर हैं और दोनों का बैंक में खाता नहीं है. उन्होंने बताया, ‘मेरे पास पुराने नोट हैं, जिन्हें मैं पहले नहीं बदलवा पाई. और अब बैंक ने नोट बदलना बंद कर दिया है. केवल जिनके खाते हैं, वे पुराने नोट जमा करवा सकते हैं और नए ले सकते हैं. अब हम क्या करें?’

उन्होंने एक टीचर से पूछा कि क्या वह अपने स्कूल जाने वाले बेटे के बैंक खाते में कुछ पैसा जमा करवा सकती हैं. सरकार से मिलने वाले फायदे को उठाने के लिए यह खाता स्कूल ने खुलवाया था. टीचर का जवाब सुनकर उनकी सांस में सांस आई, जब टीचर ने कहा कि वह खाते की लिमिट के हिसाब से 5000 से 10000 रुपए जमा करवा सकती हैं. 

बिहार की 32 साल की सरिता ने कहा, ‘मेरे पति एक फैक्टरी में काम करते हैं, पर फैक्टरी मालिक उन्हें काम के बदले पुराने नोट देता है, क्योंकि उनके बस में कुछ नहीं है. तो अब हम क्या करें. हमारे लिए दो वक्त की रोटी का जुगाड़ करना बहुत-बहुत मुश्किल हो रहा है.’ राजस्थान की 36 साल की सोना ने कहा कि वह घर पर सिलाई करती हैं और एक टेक्साइल कंपनी के लिए चेन लगाती थीं. वह कहती हैं, ‘मुझे काम मिलना लगभग बंद हो गया है. हाल में बस एक-दो बार सिलाई का काम आया, इसी तरह अपना काम चला रही हूं. पता नहीं आगे क्या होगा.’ 

इनमें से कई औरतों के बैंक खाते नहीं हैं. एक टीचर ने कहा, ‘कई बैंक इनके खाते नहीं खोलना चाहते क्योंकि उनके पास कम पैसा होता है और वे लेन-देन भी कम ही करते हैं. उनका कहना है कि हम कितने खाते खोलें? हम अभिभावकों की मदद करने की पूरी कोशिश करते हैं, पर नोटबंदी के बाद से, बैंक जाना मुसीबत हो गई है.’ टीचर ने बताया कि पिछले कुछ महीनों में नोटबंदी तक स्कूल ने अभिभावकों के लिए करीब 100 खाते खोले हैं.

स्कूलों का दुरुपयोग

आम आदमी पार्टी और कांग्रेस का कहना है कि भाजपा नगर निगम स्कूलों का इस्तेमाल अपने राजनीतिक एजेंडे का प्रचार करने के लिए कर रही है. दिल्ली प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष अजय माकन ने कैच को बताया, ‘बदकिस्मती से पीएम एक ओर संसदीय बहस में नोटबंदी के मुद्दे को अनदेखा कर रहे हैं, दूसरी ओर भाजपा अपने राजनीतिक एजेंडे को बढा़वा देने के लिए स्कूलों का इस्तेमाल कर रही है. नोटबंदी की वजह से हो रही परेशानी इस बात की दलील है कि इसकी आड़ में लोगों के साथ बड़ा धोखा हुआ है.’

उन्होंने भाजपा पर दिल्ली के नगर निगम को खराब करने का आरोप लगाया. उन्होंने कहा, ‘अपने जरा से राजनीतिक मकसद के लिए भाजपा नगर निगम स्कूलों का इस्तेमाल कर रही है, इससे स्थानीय निकाय कमज़ोर होंगे, जो भाजपा के अधीन आईसीयू में हैं. सत्तासीन पार्टी निगमों में सकारात्मक बदलाव के लिए उनकी ऊर्जा का इस्तेमाल कर सकती थी.’

आप की वरिष्ठ नेता आतिशी मरलेना ने भाजपा पर आरोप लगाया कि वह अपने प्रचार के लिए पीटीएम का इस्तेमाल कर रही है. उन्होंने कैच से कहा, ‘अभिभावक अपने बच्चों के स्कूल बड़ी उम्मीद से आते हैं और टीचरों पर हमेशा भरोसा करते हैं. अगर इस मंच का इस्तेमाल भाजपा अपने प्रचार के लिए करती है, तो यह सरकारी तंत्र का चौंकाने वाला दुरुपयोग है.’ आप की इस नेता ने आगे कहा, ‘नोटबंदी के बाद भाजपा को जो विरोध झेलना पड़ रहा है, उससे उबरने के लिए एमसीडी स्कूलों का इस्तेमाल नहीं किया जा सकता.’

First published: 28 November 2016, 7:37 IST
 
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