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दिल्ली: दलित मजदूरों की आवाज़ उठाने पर IIMC के टीचर को हटाया

कैच ब्यूरो | Updated on: 30 December 2016, 12:50 IST

दिल्ली के प्रतिष्ठित भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) में एक एकैडमिक एसोसिएट को कथित तौर पर मजदूरों की आवाज़ उठाने की सजा मिली है. 

अंग्रेजी अखबार फाइनैंशियल एक्सप्रेस के मुताबिक हाल ही में संस्थान में काम कर रहे 25 दलित मजदूरों को हटा दिया गया था. अखबार की रिपोर्ट के मुताबिक नरेंद्र सिंह राव नाम के संविदा कर्मचारी (एकैडमिक एसोसिएट) ने कई साल से काम कर रहे मजदूरों की बर्खास्तगी का विरोध किया था. 

इसके साथ ही राव ने कोर्स डायरेक्टर की नियुक्ति को लेकर सवाल उठाए थे. आईआईएमसी ने दंडात्मक कार्रवाई करते हुए नरेंद्र सिंह राव को हटाने के साथ ही कैंपस के अंदर उनके घुसने पर रोक लगा दी है. आदेश में कहा गया है कि उनके आने से आईआईएमसी कैंपस का शांतिपूर्ण माहौल प्रभावित होगा.

2010 से कार्यरत थे नरेंद्र सिंह राव

नरेंद्र सिंह राव 2010 से संविदा कर्मी के तौर पर इंस्टीट्यूट में काम कर रहे थे. राव का दावा है कि जब वह मेडिकल लीव पर चल रहे थे, इसी दौरान उनको बर्खास्त किया गया है. 

वहीं राव के आरोपों को आधारहीन बताते हुए आईआईएमसी ने अपनी सफाई में कहा है कि सर्विस कॉन्ट्रैक्ट के नियमों (उपधारा-1) के तहत उनके खिलाफ कार्रवाई हुई है, जिसके मुताबिक किसी भी कर्मचारी की सेवाएं किसी भी वक्त बिना कोई वजह बताए खत्म की जा सकती हैं. 

आईआईएमसी ने खारिज किए आरोप

इंस्टीट्यूट ने अपने बयान में कहा है कि नियुक्ति पत्र स्वीकार करते वक्त नरेंद्र सिंह राव ने ने सेवा शर्तों पर अपनी अपनी सहमति जताई थी. वहीं राव ने अंग्रेजी अखबार डीएनए से बातचीत में कहा है, "कैंपस में काम कर रहे 25 दलित कर्मचारियों की बर्खास्तगी के खिलाफ आवाज उठाने की वजह से मुझे निशाना बनाया गया है." 

राव ने अंग्रेजी अखबार से कहा, "इसके अलावा मैंने कोर्स डायरेक्टर की अवैध नियुक्ति का विरोध किया था, क्योंकि न तो उनके पास शैक्षणिक अर्हता थी न ही पद के लिए उनके पास पर्याप्त अनुभव था." 

एसोसिएट प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता ने दिया था इस्तीफा

वहीं आईआईएमसी ने राव के आरोपों को खारिज करते हुए कहा है कि प्रशासन को उनके खिलाफ कैंपस में अनुशासनहीनता फैलाने की शिकायतें मिली थीं. वैसे आईआईएमसी हाल के दिनों में कई बार विवाद में आया है. इसी साल एसोसिएट प्रोफेसर अमित सेनगुप्ता का ओडिशा स्थित संस्थान की ब्रांच में ट्रांसफर कर दिया गया था. 

सेनगुप्ता पर जेएनयू और एफटीआईआई के छात्रों के समर्थन का आरोप लगाया गया था. इसके साथ ही दलित छात्र रोहित वेमुला सुसाइड मामले में भी उन्होंने विरोध दर्ज कराया था. सेनगुप्ता ने जेएनयू छात्रसंघ के पूर्व अध्यक्ष कन्हैया के समर्थन पर खुद को निशाना बनाए जाने का आरोप लगाते हुए अपने पद से इस्तीफा दे दिया था.

10 साल से कार्यरत मजदूरों पर गाज

30 सितंबर को भारतीय जनसंचार संस्थान (आईआईएमसी) ने 25 दलित मजदूर और सफाई कर्मचारियों को निकाल दिया था.

यह कर्मचारी पिछले 10 साल से आईआईएमसी में काम कर रहे थे और कुछ तो 15 साल से कार्यरत थे. सभी 6 हजार से 8 आठ हजार के मासिक वेतन पर काम कर रहे थे, लेकिन बिना कोई नोटिस दिए आईआईएमसी प्रशासन ने उन्हें निकाल दिया. 

आईआईएमसी के निदेशक ने मजदूरों और सफाई कर्मचारियों को अगले दिन से ही आने के लिए मना कर दिया. जिसके बाद दलित मजदूरों और सफाई कर्मचारियों ने प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया था.

First published: 30 December 2016, 12:50 IST
 
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