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पीएफए के दो भाइयों की काली दुनिया: भाजपा समर्थक पशुप्रेमी और गोरक्षकों से गठजोड़

, शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 26 April 2017, 9:53 IST

 

दिल्ली पुलिस ने सोमवार की दोपहर कालकाजी कांड में एक शख़्स शशांक शर्मा को गिरफ्तार कर लिया. दिल्ली पुलिस के मुताबिक़ शर्मा खुद को केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के एनजीओ पीपल फॉर एनिमल्स (पीएफए) का सदस्य बताते हैं. फेसबुक पर पोस्ट तस्वीरों में भी वे पीएफए के प्रमुख सदस्य सौरभ गुप्ता के साथ बैठक में नजर आ रहे हैं.

 

एफआईआर

कालकाजी कांड में इस्तेमाल हुई कार.


कालकाजी कांड में रिज़वान और उनके दो साथियों आशु और कामिल पर हमला हुआ था. रिज़वान ने हमलावरों के खिलाफ कालकाजी पुलिस स्टेशन में एफआईआर दर्ज करवाई थी, जिसकी एक कॉपी कैच के पास है. रिज़वान ने अपनी तहरीर में साफ़ लिखा कि हमलावर कार में आए थे जिस पर पीएफए का स्टीकर था.

इस कांड की एफ़आईआर कहती है, ‘चिराग दिल्ली पर कुछ कारों ने हमारा पीछा किया और कालकाजी मंदिर के क़रीब एक कार ने हमारे ट्रक को ओवरटेक करके रोक लिया. इसके बाद कार से कुछ लोग उतरे और हमें पीटने लगे. एक कार (रजिस्ट्रेशन नंबर DELHI 1CN 8880) पर पीएफए लिखा हुआ था.’

मगर मेनका गांधी की एनजीओ पीएफए ने इस हमले में शामिल होने से साफ इनकार किया है. पीएफए कार्यकर्ता गौरव गुप्ता ने कहा कि इस हमले में उनका हाथ नहीं है. मगर गुप्ता वहां मौजूद थे और उन्होंने ही तीन पीड़ितों रिज़वान, आशु और कामिल के खिलाफ पशु क्रूरता निवारण अधिनियम के तहत शिकायत दर्ज करवाई थी.


यहां दो सवालों पर ग़ौर करना बेहद ज़रूरी है. पहला गोरक्षा में पीएफए कार्यकर्ताओं की भूमिका और पीएफए की खुद की प्रकृति.

 

खेल और उसके खिलाड़ी

 

इन दोनों पहलुओं को इस खेल के दो अहम खिलाड़ियों के ज़रिए समझा जा सकता है. इनके नाम गौरव और सौरभ गुप्ता हैं. सौरभ गुप्ता की फेसबुक टाइमलाइन से साफ ज़ाहिर है कि इस तरह के कामकाज में उनका खास झुकाव क्यों है. एफबी पर अपने परिचय में गुप्ता ने लिखा है- ‘पीएफए अधिकारी और मेनका गांधी ऑफिस में श्रीमती मेनका गांधी का प्रतिनिधि.’ उनके फेसबुक हैंडल की कवर पिक्चर में भी मेनका गांधी साथ हैं.

उनकी कई पोस्टों में पशु कारोबारियों पर गोरक्षकों की छापेमारी की तस्वीरें या वीडियो हैं. ताज़ा वीडियो 15 अप्रैल के ‘छापे’ का है. उनका दावा है कि यह छापा दिल्ली में रात तीन बजे डाला गया था. उन्होंने बेहद दिलचस्प अंदाज़ में इस छापे के बारे में लिखा है, ‘यह गौरव और सौरभ गुप्ता द्वारा पशु तस्करियों का खुलासा है.’ अपनी इस ‘छापे’ के बारे में उन्होंने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और उत्तरप्रदेश के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ को टैग कर दिया है.

 

इसी तरह 25 मार्च को सौरभ ने मेवात में की गई एक छापेमारी पर फेसबुक पोस्ट डाली. उन्होंने मेवात में उस छापेमारी को ‘सर्जिकल स्ट्राइक’ बताया और इसे 'सौरभ और गौरव गुप्ता की सर्जिकल स्ट्राइक बताया.' ये दोनों शख़्स मुस्लिम बहुल मेवात को गोहत्या का केंद्र भी क़रार देते हैं.


शनिवार को कालकाजी कांड के पीड़ित पटौदी से हैं, जो मेवात से ज्यादा दूर नहीं है. पशुपालक पहलू खान, जो गोरक्षकों के हाथों मारे गए थे, मेवात के थे. पिछले साल सितंबर में गोरक्षकों ने मेवात में ‘गाय का मांस खाने का आरोप लगाकर’ मुसलमान औरतों का कथित गैंग रेप किया था.


गुप्ता भाइयों की फेसबुक पर पोस्ट से ये भी साफ है कि ये भाजपा समर्थक हैं. सौरभ ने गृहमंत्री राजनाथ सिंह के साथ अपनी तस्वीर पोस्ट की है. योगी आदित्यनाथ के साथ भी ऐसी एक तस्वीर है जिसमें वो उन्हें अपना ‘भाई’ कहते हैं. गुप्ता की प्रोफाइल पिक्चर भी मेनका गांधी के साथ है और 2014 के लोकसभा चुनावों में मोदी को वोट देने की अपील कर चुके हैं.


इसी तरह उत्तर प्रदेश में विधानसभा चुनावों में भाजपा की जीत के जश्न में उन्होंने कई पोस्टें डालीं. 19 मार्च की एक पोस्ट तो अपने आपमें खास है. वो लिखते हैं, ‘मैं जब भी दुखी होता, मेनका मैडम से कहता, ‘हम क्या करें? यह सब कैसे ठीक होगा?’ वे कहतीं, ‘बच्चे, हमारा वक्त आएगा’. मैंने सोचा, जब मैडम मंत्री बनेंगी, हमारा वक्त आएगा. पर ऐसा नहीं हुआ. अब मैं फिर महसूस करता हूं कि हमारा समय आ गया है. भाजपा ने योगीजी को सीएम बनाकर हमें बेहद खुशी दी है. शायद भगवान ने हमारी प्रार्थना सुन ली.’ यह पोस्ट उस दिन की है, जब योगी आदित्यनाथ को उत्तरप्रदेश का मुख्यमंत्री बनाया गया था.

 

सौरभ की फेसबुक टाइमलाइन से साफ ज़ाहिर है कि वे पीएफए से जुड़े हैं. भाजपा समर्थक हैं और गोरक्षकों के साथ मिलकर काम करते हैं. गिरफ्तार शंशाक शर्मा दोनों गुप्ताओं के फेसबुक फ्रेंड हैं. फेसबुक की एक पोस्ट में सौरभ एक बैठक के बाद शशांक और अन्य लोगों को शुक्रिया कह रहे हैं.

 

मेनका से रिश्ते

सौरभ गुप्ता की एक पोस्ट जिसमें आरोपी शशांक शर्मा को टैग किया गया है.
सौरभ गुप्ता के फेसबुक हैंडल की कवर फोटो जिसमें केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी हैं.
गौरव गुप्ता के फेसबुक हैंडल से पता चलता है कि मेनका गांधी उनकी शादी में शामिल हुई थीं.

 

गौरव और सौरभ गुप्ता ने पीएफए का पक्ष लिया और शनिवार की हिंसा में उसका हाथ होने से इनकार किया, पर एनजीओ का कहना है कि इन गुप्ता भाइयों और शशांक से हमारा कोई संबंध नहीं है. मेनका गांधी के ऑफिस ने मीडिया से कहा, ‘दिल्ली में हमारी पीएफए की कोई इकाई नहीं है. देश भर में हमारे 10 हज़ार कार्यकर्ता हैं. जिसने भी यह किया है, अपने दम पर किया है.’


पीएफए ट्रस्टी गौरी मुलेकी ने पीटीआई को बताया, ‘पीएफए की तरफ से वाहन के लिए कोई स्टीकर जारी नहीं होता. इन दोनों भाइयों की दिलचस्पी ऐसी गतिविधियों में है. ऐेसा वे पहले भी करते रहे हैं मगर हम इन गतिविधियों से बिलकुल भी जुड़े हुए नहीं हैं. हम 100 रुपए में पीएफए के सदस्य बनने वाले लाखों लोगों की जिम्मेदारी नहीं ले सकते. अगर उन्होंने कुछ गैरकानूनी किया है, तो उन्हे दंड मिलना चाहिए.’


मगर बात इतनी सीधी नहीं है. जब-जब गौरव और सौरभ गुप्ता मुश्किल में पड़े, मेनका गांधी के ऑफिस ने उनकी मदद की है. अगस्त 2014 में सौरभ और अन्य पीएफए कार्यकताओं की गाजियाबाद के तत्कालीन एसएसपी धर्मेंद्र यादव के साथ तीखी नोकझोंक हो गई थी. पीएफए ने एक स्कूल पर छापा डाला था, जहां पिंजरे में एक लंगूर को कैद कर रखा गया था. स्कूल ने पुलिस को खबर दी, जिसके बाद एक पीएफए कार्यकर्ता को लॉकअप में डाल दिया गया और पुलिस ने जबरन वसूली का मुक़दमा दर्ज करने की धमकी भी दी.


इसके बाद मेनका गांधी ने एसएसपी को फोन किया लेकिन वे उनका फोन नहीं उठा रहे थे. गांधी ने तब केंद्रीय मंत्री सेवानिवृत्त जनरल वीके सिंह को शिकायत की, जो गाजियाबाद से सांसद भी हैं. सिंह ने एसएसपी यादव के खिलाफ इस शिकायत को तत्कालीन सीएम अखिलेश यादव को भेजी थी और धर्मेंद्र यादव के ख़िलाफ़ जांच बिठवा दी थी.


यहां ये ध्यान देना भी ज़रूरी है कि भाजपा की जीत के बाद सौरभ गुप्ता ने फेसबुक पर पोस्ट किया था, ‘अब यादव अधिकारियों के दिन लद जाएंगे.' मुमकिन है कि उन्होंने यह पोस्ट एसएसपी धर्मेंद्र यादव को ध्यान में रखते हुए लगाई हो जिन्होंने उनके ख़िलाफ़ कार्रवाई की थी और इसी वजह से सौरभ यादव जाति वाले अधिकारियों से नफरत करने लगे हों.’

 

पीएफए का हिंदू संगठनों से रिश्ता

इस तरह की झापेमारी में पीएफए के सदस्यों ने पहले भी हिंदूवादियों की मदद ली है. जून 2014 में पीएफए और आरएसएस कार्यकर्ताओं ने पशु कारोबारियों पर हमला किया था और दिल्ली आईटीओ पर एक वाहन में आग लगा दी थी. 2016 की आउटलुक की रिपोर्ट के मुताबिक पीएफए के सदस्य गोरक्षकों के साथ जाते हैं और जानवरों को छीन लेते हैं.


पीएफए का पशु चिकित्सालय सरधाना में है. सरधाना दिल्ली से दो घंटे की दूरी पर है. इसके प्रबंधन का काम सप्तऋषि रे देखते हैं. वो पशु प्रेमी हैं. रे ने आउटलुक को बताया कि, ‘पशु ले जाने वालों के बारे में हमें गोरक्षक बताते हैं. हम उन्हें उनसे छुड़ाते भी हैं.’ रे ने गर्व से बताया कि हम कोर्ट के आदेश पर भी जानवरों को नहीं छोड़ते.


पशु अधिकार के लिए काम करने वाली संस्थाओं पर अक्सर आरोप लगाया जाता है कि वे वैध तरीके से ले जा रहे जानवरों को भी छीन लेते हैं, फिर उन्हें छोड़ने में आनाकानी करते हैं. राजस्थान के एक पशु कारोबारी ने कैच को बताया, ‘कुछ पशु अधिकार कार्यकर्ता छीने गए जानवरों को बेच देते हैं या उनके मालिकों को लौटाने का पैसा मांगते हैं.’


कालकाजी में शनिवार की वारदात से नहीं लगता कि पशु कारोबारियों के साथ मारपीट पशुओं को बचाने के लिए की गई थी. पीड़ितों ने आरोप लगाया कि उनका रुपया चोरी हो गया, मोबाइल गायब हो गए. एक चश्मदीद गवाह खदीजा फारूकी ने कैच को बताया कि गोरक्षक पशु कारोबारियों की पिटाई करते समय ‘जय श्री राम’ चिल्ला रहे थे. उन्होंने मारपीट के लिए भीड़ इकट्ठी करने की कोशिश भी की. गौरतलब है कि गोरक्षकों ने पशु कारोबारियों पर हमला करने के लिए कालकाजी मंदिर का इलाका चुना.

First published: 26 April 2017, 9:47 IST
 
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