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जेएनयू वाइस चांसलर और प्रोफेसरों के बीच संघर्ष तेज़

प्रणेता झा | Updated on: 16 January 2017, 7:39 IST
(फ़ाइल फोटो )

‘साक्ष्य’ के तौर पर यूट्यूब का इस्तेमाल करते हुए जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी के सर्वोच्च कानूनी निकाय ने जेएनयू के शिक्षकों के खिलाफ जांच के आदेश दिए हैं. आरोप है कि उन्होंने ‘विश्वविद्यालय के नियमों का उल्लंघन’ करते हुए प्रशासन भवन के बाहर छात्रों के विरोध प्रदर्शन को संबोधित किया. ‘नियमों’ के मुताबिक ‘प्रशासनिक और अकादमिक काम्प्लेक्स’ के 20 मीटर के दायरे में किसी भी तरह का विरोध प्रदर्शन करना मना है. 

पिछले नवंबर महीने में छात्र नजीब अहमद के लापता होने पर छात्रों ने विरोध प्रकट किया गया था. इस प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने मौजूदा कानून का हवाला देते हुए उस क्षेत्र में सभी प्रदर्शनों पर रोक लगा दी थी. हालांकि वर्षों से छात्र, भवन की सीढ़ियों और आसपास की खुली जगह पर विरोध प्रदर्शन करते रहे हैं.

3 जनवरी को कार्यकारी परिषद की बैठक में प्रोफेसर निवेदिता मेनन का वीडियो दिखाया गया. इसमें वे उस क्षेत्र में आयोजित एक विरोध सभा में बोल रही हैं. इसी बैठक में कार्यकारी परिषद ने अन्य विवादास्पद फैसले पारित किए थे. इनमें प्रवेश की नीति में परिवर्तन भी शामिल था. इन सबका छात्र और शिक्षक काफी समय से विरोध कर रहे थे, पर उन पर कुछ असर नहीं हो रहा था.

मिली थी चेतावनी

10 जनवरी को यूनिवर्सिटी प्रशासन ने प्रोफेसर मेनन सहित पांच शिक्षकों को चिट्ठियां भेजीं, ‘अनुरोध’ करते हुए कि वे ‘निषिद्ध’ क्षेत्र में आयोजित विरोध प्रदर्शन में शामिल नहीं हों. अगले दिन जेएनयू के शिक्षक संघ ने उप कुलपति एम जगदीश कुमार की ‘धमकी की नीति’ के खिलाफ जंग का ऐलान कर दिया. उन्होंने प्रेस को इस शीर्षक से बयान दिया- ‘प्रशासन की धमकी के खिलाफ बयान’.

शिक्षकों का आरोप था कि, ‘प्रशासन जेएनयू की प्रगतिशील प्रवेश नीति को बदलने के प्रत्यक्ष-अप्रत्यक्ष प्रयासों के विरुद्ध बोलने से साथियों को हतोत्साहित करना चाहता है.’ मेनन का नाम लिए बिना, बयान में कानूनी निकाय की बैठकों में शिक्षकों के खिलाफ ‘चयनित और अनधिकृत वीडियो फुटेज के इस्तेमाल’ की निंदा की गई थी.

जेएनयू के एक अधिकारी ने वीडियो की पुष्टि की, जिसे ‘मेनन के एक प्रशंसक’ ने यूट्यूब पर अपलोड किया था. यही वीडियो प्रोफेसर के खिलाफ कार्रवाई का आधार बना है. सरकार और जेएनयू प्रशासन की खुली आलोचना के कारण पहले भी हमले हुए हैं. इस जांच में कानून के उल्लंघन को लेकर कुछ अन्य शिक्षकों पर भी तहकीकात की जाएगी.

30 दिसंबर को प्रोफेसर मेनन को चेतावनी नोटिस दिया गया कि अगर वे फिर से उस क्षेत्र में संबोधित करेंगी, तो उनके खिलाफ अनुशासनात्मक कार्रवाई की जाएगी. अपना नाम नहीं बताने की शर्त पर जेएनयू के एक अधिकारी ने कहा, ‘वीडियो में वे इस नोटिस और विश्वविद्यालय का मजाक उड़ाते नजर आ रही हैं.’ वीडियो को अब शायद यूट्यूब से हटा दिया गया है. 

अधिकारी ने कहा कि वीडियो को ‘इस आरोप को पुख्ता करने के लिए दिखाया गया है कि कुछ शिक्षक कैंपस के निषिद्ध क्षेत्र में विरोध प्रदर्शनों का आयोजन और भाषण देकर यूनिवर्सिटी के नियमों का उल्लंघन कर रहे हैं.’ उन्होंने आगे कहा, ‘यह पुराना नियम है, जो नॉर्म्स ऑफ फंक्शनिंग फॉर द कंपोनेंट्स ऑफ द यूनिवर्सिटी कम्यूनिटी (अकादमिक नियमों और विनियमों आदि, जेएनयू एम 7(6) के अधीन है.’

शिक्षक संघ हमलावर

जेएनयू शिक्षक संघ के सचिव प्रोफेसर बिक्रमादित्य चौधरी ने कहा, ‘कानूनी निकाय की बैठक में एक शिक्षक को बदनाम और प्रहार करने के लिए एक अप्रमाणित वीडियो को चुनना दिखाता है कि प्रशासन कितना नीचे गिर गया है. मैं किसी भी विश्वविद्यालय की ऐसा करने की कल्पना नहीं कर सकता.’

कैच ने प्रोफेसर मेनन से संपर्क किया, तो उन्होंने कहा, ‘जिस उल्लंघन का मुझ पर आरोप लगाया गया है, उसकी जब वीसी और प्रशासन के खुद के द्वारा किए सभी तरह के बड़े उल्लंघनों की तुलना करती हूं, तो हंसी आती है. वे दावा करने की स्थिति में नहीं हैं कि शिक्षकों ने कानूनों का उल्लंघन किया है.’

उनके खिलाफ बैठाई गई जांच समिति के बारे में वे कहती हैं, ‘यह उचित नहीं है. और यह गुमनाम अधिकारी कौन है, जो मीडिया को बता रहा है और कार्यकारी परिषद को चुपचाप भेद दे रहा है? क्या यह अपने आपमें उल्लंघन नहीं है.’ जेएनयू शिक्षक संघ ने ‘जेएनयू प्रशासन द्वारा शिक्षकों और छात्रों की गतिविधियों की रिकार्डिंग को अनैतिक और अवैध’ बताते हुए इसका मुद्दा उठाया. प्रोफेसर चौधरी ने कैच को बताया कि पिछले दो महीनों में शिक्षक और कुलपति की बैठकों की प्रशासन चुपचाप रिकार्डिंग करता रहा है.

प्रोफेसर चौधरी ने कहा, ‘पिछले नवंबर हमने पाया कि शिक्षक और कुलपति की एक बैठक की रिकार्डिंग हमारी जानकारी के बिना की गई, इसलिए जेएनयू शिक्षक संघ ने रजिस्ट्रार को हमारे साथ फुटेज साझा करने को कहा था.’ उन्होंने आगे कहा, ‘आईटी अधिनियम के अनुसार जब भी कोई औपचारिक बैठक की रिकार्डिंग की जाती है, बैठक में शामिल होने वालों की स्वीकृति आवश्यक होती है और उनके साथ असंपादित सामग्री साझा की जानी चाहिए.’

मौजूदा वीसी के राज में उथल-पुथल

जब से जगदीश कुमार वीसी बने हैं, विश्वविद्यालय में काफी उथल-पुथल मची हुई है. 9 फरवरी से ही जब तीन छात्रों को ‘राष्ट्र-विरोधी’ नारे लगाने के आरोप में गिरफ्तार किया गया था. इसके बाद 15 अक्टूबर को स्नातकोत्तर के फर्स्ट इयर का छात्र नजीब अहमद लापता हुआ. 

इससे एक रात पहले उसके हॉस्टल में एबीवीपी सदस्यों ने उसके साथ मारपीट की. इसके बावजूद कि अनुशासनाधिकारी समिति ने आरोपी सदस्यों को गुनहगार पाया, उनके खिलाफ कोई कार्रवाई नहीं की गई. उन्हें सिर्फ हॉस्टल से दूसरी जगह भेज दिया गया. नजीब का अब तक कुछ पता नहीं चला है.

पिछले कुछ महीनों से कई शिक्षकों का आरोप है कि वीसी ‘जेएनयू को बरबाद करने के एजेंडे के साथ आए हैं’, और ‘शिक्षकों की और छात्रों की चयन प्रक्रिया को प्रभावित करना चाहते हैं.’ 

पिछले साल 26 दिसंबर को हुई अकादमिक परिषद की बैठक के बाद 19 शिक्षकों ने वीसी पर आरोप लगाते हुए एक बयान जारी किया था. उनका कहना है कि वह ‘लोकतांत्रिक मानदंडों का उल्लंघन कर रहे हैं’ और एसी सदस्यों की स्वीकृति के बिना प्रमुख परिवर्तनों पर बुलडोजर चला रहे हैं. 

शिक्षक ने कहा कि जगदीश कुमार ने बिना विमर्श के एजेंडे की अहम बातें पारित कर दीं, और अक्टूबर में हुई एसी की पूर्व बैठक के कार्यवृत्त को ‘मैनिपुलेट’ किया ताकि उन बातों को शामिल किया जा सके, जिन पर कभी विचार नहीं किया गया था. 

शिक्षकों और छात्रों ने मांग की थी कि एसी की बैठक फिर से रखी जाए, पर परिषद के विवादास्पद फैसलों को कार्यकारी परिषद ने अंतिम स्वीकृति दे दी. अहम परिवर्तनों में शिक्षकों के चयन और एमफिल और पीएचडी में प्रवेश के नियमों में परिवर्तन के लिए वीसी को और अधिकार देना शामिल है.

एसी के फैसलों का विरोध करने के लिए 11 छात्रों का निलंबन कर दिया गया था. एसी का फैसला था कि यूजीसी की सूचना के आधार पर एमफिल/ पीएचडी में चुनाव में पूरी तरह से मौखिक इंटरव्यू को महत्व दिया जाएगा. लिखित परीक्षा को महज ‘क्वालिफाइंग’ माना जाएगा.

सालों से छात्र वाइवा की अहमियत कम करने की मांग कर रहे हैं. उनका आरोप है कि सामाजिक-आर्थिक रूप से पिछड़े छात्रों के साथ मौखिक परीक्षा में भेदभाव होता है. प्रशासन ने विरोधी छात्रों को निलंबित रखते हुए उनमें से 9 को ‘अंतरिम रजिस्ट्रेशन’ के लिए कहा है, जब तक कि इस संबंध में अनुशासनात्मक समिति की रिपोर्ट नहीं आ जाए. प्रशासन का दावा है कि अन्य दो का रजिस्ट्रेशन पहले ही खत्म कर दिया गया है. 

11 छात्रों को बैठक में ‘खलल’ डालने के लिए निलंबित किया गया था. वे बैठक स्थल पर जोर-जोर से नारे लगाते आए थे, हालांकि बैठक समाप्त होने के बाद. जेएनयू शिक्षक संघ ने 18 जनवरी से 25 जनवरी तक ‘सामाजिक न्याय के लोकतांत्रिकरण’ पर सार्वजनिक लेक्चर्स करने की सीरीज का ऐलान किया है. इनके माध्यम से वे साफ कहना चाहते हैं कि जेएनयू के शिक्षकों को धमकियां देकर या डराकर झुकाया नहीं जा सकता.

17 जनवरी को एक दिन की हड़ताल का ऐलान करते हुए जेएनयू के शिक्षक संघ ने कहा, ‘इसके माध्यम से हम फिर से कहना चाहते हैं कि अगर विश्व की किसी भी संस्था के शिक्षकों और छात्रों सहित लोगों के विरोधी स्वर दबाने के लिए उन्हें डराने, धमकाने या सताने के प्रयास किए गए, तो संघ उसका विरोध करेगा.’ इस बीच, प्रशासन भवन के बाहर विरोध करने के लिए प्रशासन की ओर से छात्रों को बराबर कारण बताओ नोटिस दिए जा रहे हैं.

First published: 16 January 2017, 7:39 IST
 
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