Home » दिल्ली » Journalists at Ramjas college were attacked by abvp, ghost of last feb returns
 

एबीवीपी-आइसा की लड़ाई में पत्रकारों की पिटाई, फ़रवरी 2016 की यादें ताज़ा

शाहनवाज़ मलिक | Updated on: 23 February 2017, 8:21 IST
(Catch News)


दिल्ली यूनिवर्सिटी में एबीवीपी, डूसू और वामपंथी छात्र संगठनों के बीच बुधवार दोपहर हुए संघर्ष के दौरान कई पत्रकार हमले का शिकार हुए. हमलावरों ने रामजस कॉलेज के पास प्रदर्शनकारियों पर ईंट, पत्थर और कांच की बोतलों का इस्तेमाल किया. अभी तक पांच ऐसे पत्रकारों के बारे में पता चल पाया है जो इस मारपीट का शिकार हुए हैं.

 

आदित्य मेनन, असोसिएट एटिडर, कैच न्यूज़

 

कैच न्यूज़ के असोसिएट एडिटर आदित्य मेनन के मुताबिक मारपीट तकरीबन 2 बजे शुरू हुई. जेएनयू स्टूडेंट यूनियन की पूर्व उपाध्यक्ष शहला राशिद पांच-सात हमलावरों से घिरी हुई थीं. इनमें दो लड़कियां और पांच लड़के थे और उनके बाल खींचे जा रहे थे. मैं उनके क़रीब पहुंचा तो शहला ने मुझे पहचान लिया. वो मुझे अपना फोन देने की कोशिश कर रही थीं कि तभी मुझपर पीछे से हमला हो गया. उन्होंने मेरे बाल खींचे, तीन-चार थप्पड़ मारे और चश्मा तोड़ दिया.

तरुणि कुमार, रिपोर्टर, द क्विंट

द क्विंट की रिपोर्टर तरुणि कुमार ने बताया कि वो क्विंट के हैंडल पर फेसबुक लाइव कर रही थीं जो अचानक बंद हो गया. फेसबुक लाइव के दौरान ही एक महिला बीच में आ गईं और उन्होंने बाल खींचना शुरू कर दिया. मेरा सिर झुंका हुआ था और मुझे बिल्कुल अंदाज़ा नहीं कि कितने लोग मुझे पंच कर रहे थे. मुझे पुलिस ने आकर बचाया, तब तक मेरा लेपल माइक और चश्मा टूट चुका था. हमलावरों ने मेरा फोन छीन लिया था, जो मुझे महिला कांस्टेबल के ज़रिए मिला लेेकिन उसकी स्क्रीन टूटी हुई थी. इस मारपीट में मेरा चश्मा गुम हो गया.

 

अपूर्वा चौधरी, फोटो जर्नलिस्ट, न्यूज़क्लिक


वेबसाइट न्यूज़ क्लिक के रिपोर्टर अविनाश सौरभ ने बताया कि उनकी सहयोगी कैमरामैन अपूर्वा चौधरी भी हमले का शिकार हुईं. उनकी पिटाई हुई और कैमरे का लेंस खींचने की वजह से वह टूटकर अलग हो गया. कैच से बातचीत के दौरान अविनाश मौरिस नगर थाने में थे और हमलावरों के ख़िलाफ़ शिकायत दर्ज करवा रहे थे.


अविनाश ने इंडियन राइटर्स फोरम के रिपोर्टर सौरवदीप रॉय को पिटते हुए देखा. उन्होंने बताया कि पिटने की वजह से सौरवदीप के कान लाल हो गए थे और वो भी मौरिस नगर थाने में हैं.

 

एक बड़े अख़बार की रिपोर्टर जो अपना नाम नहीं बताना चाहती हैं, उन्होंने कहा, 'फेसबुक लाइव करते वक्त मुझे धमकाकर ऐसा करने से मना किया गया. मैंने कहा कि मैं पत्रकार हूं, उन्हें आईडी दिखाई लेकिन वो नहीं सुन रहे थे. तभी एक लड़की ने मेरा फोन छीन लिया. मैं चीखी कि मैं पत्रकार हूं, मेरा फोन वापस करो. मैंने पुलिस की मदद से अपना फोन वापस लिया.'

 

पिछली फरवरी की यादें ताज़ा


दिल्ली यूनिवर्सिटी के रामजस कॉलेज में एक सेमिनार को लेकर वाम और दक्षिणपंथी संगठनों के छात्रों के बीच मंगलवार से संघर्ष चल रहा है. ‘कल्चर ऑफ प्रोटेस्ट’ नाम के दो दिवसीय सेमिनार के एक सेशन में जेएनयू छात्र उमर ख़ालिद और शहला राशिद को बुलाए जाने पर एबीवीपी ने आपत्ति जताई थी. इस सेमिनार का आयोजन वर्डक्राफ्ट ने किया था जो कि रामजस कॉलेज की लिटरेरी सोसाइटी है.

पत्रकारों पर हुए इस हमले ने एक बार फिर पिछली फरवरी की यादें ताज़ा कर दी हैं. पिछले साल इसी महीने में जेएनयू छात्रसंघ अध्यक्ष रहे कन्हैया कुमार को पटियाला हाउस कोर्ट में पेशी के दौरान वकीलों ने पत्रकारों पर हमला कर दिया था. इसके विरोध में प्रेस क्लब से लेकर मंडी हाउस तक पत्रकारों ने एक मार्च भी निकाला था.

 

First published: 22 February 2017, 17:56 IST
 
पिछली कहानी
अगली कहानी