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कालकाजी कांड: 'एनिमल राइट्स एक्टिविस्ट' जो जय श्री राम का नारा लगाते हैं

केंद्र में भारतीय जनता पार्टी की सत्ता आने के बाद से देश के अलग-अलग हिस्सों में गोरक्षा के नाम पर गुंडागर्दी, लूट और हत्या के मामले सामने आ रहे हैं. ऐसी ही एक वारदात शनिवार रात तक़रीबन 11:45 बजे दिल्ली के मशहूर कालकाजी मंदिर के ठीक सामने हुई. इस हमले में दो भैंस कारोबारी मुहम्मद आशु और कामिल और ड्राइवर मुहम्मद रिज़वान को बुरी तरह पीटा गया.

 

इसके बाद जानवरों के वेलफेयर के लिए काम करने वाली संस्था पीपल फॉर एनिमल्स जिसकी मुखिया केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी हैं, की दिल्ली यूनिट से जुड़े गौरव गुप्ता की शिक़ायत पर कालकाजी पुलिस ने तीनों घायलों को गिरफ़्तार कर लिया और रविवार रात 8 बजे ज़मानत पर इन्हें रिहा कर दिया गया.

 

यह पहला मामला नहीं है जब राजधानी में भैंस कारोबारियों पर हमले के विवाद में मेनका गांधी की संस्था पीपल फॉर एनिमल्स का नाम आया है. 16 मई 2014 को नरेंद्र मोदी के शपथ ग्रहण के ठीक एक महीने बाद 21 जून को केंद्रीय दिल्ली के आईटीओ और पूर्वी दिल्ली के शकरपुर इलाक़े में भैंस कारोबारियों पर बड़ा हमला किया गया था.

 

तीनों हमलों में समानताएं

  • कालकाजी में भैंस कारोबारियों पर हमला रात में हुआ. हमले के फौरन बाद पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के कार्यकर्ता सामने आए. इस संस्था के गौरव गुप्ता की शिक़ायत पर कालकाजी पुलिस ने 'पशु क्रूरता' के आरोप में तीन लोगों को गिरफ़्तार किया.
  • 21 जून 2014 को आईटीओ और शकरपुर में भी हमला रात में किया गया. हमले के बाद पीपल फॉर एनिमल्स संस्था के गौरव गुप्ता, सौरव गुप्ता और गुंजन का नाम आया. इनकी शिक़ायत पर आईपी एस्टेट और शकरपुर पुलिस ने छह भैंस कारोबारियों को गिरफ़्तार किया. सभी पर 'पशु क्रूरता' का आरोप लगाकर मुक़दमा दर्ज किया गया.
  • पीपल फॉर एनिमल की चेयरपर्सन मेनका गांधी हैं. इसकी शुरुआत उन्होंने 1992 में की थी. शकरपुर, आईटीओ और कालकाजी कांड में बार-बार इनकी संस्था का नाम आया लेकिन हर बार केंद्रीय मंत्री ने अपनी संस्था को हमलावरों से अलग कर लिया.
  • तीनों कांड में संस्था के गौरव गुप्ता का नाम आया जिन्होंने हमले के फौरन बाद पुलिस स्टेशन पहुंचकर शिक़ायत की कि भैंस कारोबारियों पर एनिमल क्रूएल्टी के आरोप में मुक़दमा दर्ज किया जाए.
  • 21 जून 2014 को आईटीओ और शकरपुर में हुआ हमला काफी बड़ा था. तब आईपी एस्टेट पुलिस ने इस रिपोर्टर से कहा था कि हमले में 50 से ज़्यादा भैंसे 'मर' गईं और बाक़ी बची भैंसों को पीपल फॉर एनिमल्स के कार्यकर्ता अपने साथ लेकर गए. दिल्ली पुलिस ने तब इन भैंस कारोबारियों के 17 ट्रक ज़ब्त किए थे.
  • केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की बहन अंबिका शुक्ला ने तब इस रिपोर्टर से बातचीत में क़ुबूल किया था कि भैंसे 'रेस्क्यू' करके उनकी संस्था में लाई गई हैं क्योंकि पशुओं से क्रूरता का अधिकार किसी को नहीं है.
  • तब अंबिका शुक्ला ने कहा था कि हमे नहीं मालूम कि हमलावर कौन हैं. हमारी संस्था के लोग तो बाद में पहुंचे. ठीक यही दावा कालकाजी कांड के बाद भी किया जा रहा है कि पीपल फॉर एनिमल्स के गौरव गुप्ता बाद में आए और हमलावरों से उनका कोई लेना-देना नहीं.
  • आईटीओ और कालकाजी कांड में एक समानता ये भी है कि इन हमलों में संस्था पीपल फॉर एनिमल के अलावा भगवा संगठन और महिलाओं की भूमिका पाई गई है.
  • 21 जून के कांड में आईपी एस्टेट के एक पुलिसकर्मी ने इस रिपोर्टर से कहा था कि हमलावरों में भगवा संगठनों के अलावा गुंजन नाम की एक महिला थी जो पीपल फॉर एनिमल संस्था से जुड़ी हुई है.
  • कालकाजी हमले की चश्मदीद ख़दीजा फ़ारूक़ी ने कैच न्यूज़ से बातचीच में बताया कि उन्होंने इस हमले में दो महिलाओं को देखा. दोनों सड़क पर खड़ी होकर राहगीरों को रोकने और भैंस कारोबारियों को मारने के लिए उकसा रही थीं.
  • चश्मदीद फ़ारूक़ी ने यह भी बताया कि ट्रक पर चढ़कर कारोबारियों को मार रहे लोग माथे पर तिलक लगाए हुए थे और जय श्री राम के नारे लगा रहे थे.

पीपल फॉर एनिमल्स और गौरव गुप्ता

पशु क्रूरता के नाम पर कारोबारियों से मारपीट और उनके जानवर छीनने का आरोप गौरव गुप्ता पर बार-बार लगता रहा है. 2013 में पंजाब और हरियाणा हाईकोर्ट ने गौरव गुप्ता और हरियाणा पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार पर ऐसे ही एक मामले में एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया था.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक दिसंबर 2012 में गौरव गुप्ता की शिक़ायत पश्चिमी यूपी के चार किसानों को हरियाणा की झज्जर पुलिस ने गिरफ़्तार करने के साथ-साथ उनके 68 जानवर ज़ब्त कर लिए थे और झज्जर पुलिस के एक सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने बिना किसी कागज़ी कार्रवाही के इन जानवरों को गौरव गुप्ता को सौंप दिया था. गौरव गुप्ता इन जानवरों को 'रेस्क्यू' करवाकर दिल्ली स्थित संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर ले आए. इस संस्था की डायरेक्टर अंबिका शुक्ला हैं जो केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी की बहन हैं.

मगर पीड़ितों ने जब हरियाणा पुलिस से गुहार लगाई और इसकी जांच हुई तो अदालत के आदेश पर गौरव गुप्ता और सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार पर मुक़दमा दर्ज किया गया. तफ़्तीश में पता चला कि बाग़पत के किसान इन ऊंटों को एक मेले से ख़रीदकर वापस लौट रहे थे मगर गौरव गुप्ता की शिकायत पर सब इंस्पेक्टर संदीप कुमार ने बिना जांच पड़ताल के झज्जर में किसानों को गिरफ़्तार कर लिया और उनके जानवर ज़ब्त भी किए. इसके बाद बिना किसी कागज़ी कार्यवाही के सारे जानवर गौरव गुप्ता को सौंप दिए गए. 

तफ़्तीश के बाद कोर्ट ने आदेश किया कि किसानों के जानवर उन्हें वापस सौंपे जाएं तो संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर ने अदालत का आदेश मानने से मना कर दिया. संस्था ने कहा कि चूंकि संस्था 'रेस्क्यू' कराकर लाए गए इन जानवरों के खाने और सुरक्षा का इंतज़ाम कर रही है, लिहाज़ा किसानों को 24 लाख रुपए संस्था को अदा करना चाहिए.

संस्था के इस रवैये से नाराज़ हाई कोर्ट ने 30 मई 2013 को गौरव गुप्ता समेत चार लोगों ने मुक़दमा दर्ज करने का आदेश दिया जिसकी अगली सुनवाई 28 अप्रैल को होनी है.

 

आईटीओ कांड में भी ले गए थे जानवर


21 जून 2014 को आईटीओ और शकरपुर में हुए हमले के बाद भी गौरव गुप्ता की शिक़ायत पर भैंस कारोबारी गिरफ़्तार हुए थे. तब पुलिस ने इस रिपोर्टर से कहा था कि बहुत सारे जानवर गौरव गुप्ता अपने साथ लेकर चले गए. अंबिका शुक्ला ने फोन पर स्वीकार किया था कि जानवर उनकी संस्था संजय गांधी एनिमल केयर सेंटर में लाए गए हैं.


आईटीओ हमले में भैंस कारोबारियों के साथ मारपीट, उनके ट्रकों के साथ तोड़फोड़ और आगजनी की गई थी. लिहाज़ा, आईपी एस्टेट पुलिस ने 'अज्ञात' लोगों के ख़िलाफ़ मारपीट, और दंगा भड़काने समेत कई धाराओं में मुक़दमा किया था. कालकाजी कांड में भी मुक़दमा 'अज्ञात' हमलावरों के ख़िलाफ़ दर्ज हुआ है. 

 

...और अब कालकाजी कांड



यह वारदात दक्षिण पूर्वी दिल्ली के कालकाजी इलाक़े में शनिवार की रात 11:45 बजे अंजाम दी गई. आईटीओ कांड की तरह इस बार भी दिल्ली पुलिस ने 'अज्ञात' हमलावरों पर हल्की धाराओं में मुक़दमा दर्ज किया है. कालकाजी एसएचओ वेद पाल ने कैच न्यूज़ से कहा कि अभी तक हमलावरों के बारे में पता नहीं चल पाया है. घायलों के वकील एतहेशाम हाशमी का आरोप है कि कालकाजी पुलिस को आईपीसी की धारा 323 की बजाय 307 के तहत मुक़मदा दर्ज करना चाहिए था.

 

क्या कहती हैं चश्मदीद?

 

कैच न्यूज़ की मुलाक़ात इस वारदात की एक चश्मदीद ख़दीजा फारूक़ी से हुई जिन्होंने पुलिस कंट्रोल रूम को घटना के बारे में जानकारी दी थी. ख़दीजा ने बताया, 'तक़रीबन 11:45 बजे मैं जामिया नगर इलाक़े से वसंत कुंज की तरफ लौट रही थी. जब मैं कालकाजी मंदिर के पास पहुंची तो ट्रैफिक जाम लगा हुआ था. मैंने देखा कि कम से कम 15 लोग एक ट्रक में चढ़ने की कोशिश कर रहे थे और उसके अंदर मौजूद लोगों को मार रहे थे.'

ख़दीजा ने बताया कि उनके माथे पर तिलक लगा हुआ था. वो जय श्री राम के नारे लगा रहे थे और ट्रक में मौजूद लोगों को नीचे उतारने की कोशिश कर रहे थे. ख़दीजा ने वहां दो लड़कियों को भी देखा जो सड़क से गुज़र रहे लोगों को रुकने और ट्रक में बैठे लोगों को मारने के लिए उकसा रही थीं. ख़दीजा को वहां दो पुलिसवाले भी नज़र आए जो हमलावरों को दबोचने की बजाय ट्रैफिक संभाल रहे थे.

 

कौन थे हमलावर?

हमेशा की तरह इस बार भी दिल्ली पुलिस को हमलावरों के बारे में कुछ नहीं पता. कालकाजी एसएचओ वेद पाल ने कैच से कहा कि अभी नहीं पता चल पाया है कि हमलावर कौन थे. हर बार की तरह इस बार भी मेनका गांधी, पीपल फॉर एनिमल्स और शिक़ायतकर्ता गौरव गुप्ता ने इस आरोप को ख़ारिज किया है कि हमलावर उनकी संस्था के सदस्य थे.


इस हमले में घायल क़ामिल के पिता तैय्यब कहते हैं कि यह पेशा जानलेवा हो गया है. मगर हम मजबूर हैं. हमारे बाप-दादा 50 साल से यही काम करते आए हैं. हम कोई ग़ैरकानूनी काम भी नहीं कर रहे थे, वरना दिल्ली की सीमा में प्रवेश करते ही पुलिस हमे गिरफ़्तार कर लेती. तैय्यब कहते हैं कि हम आए दिन गोरक्षकों के बारे में सुनते हैं मगर हमारी मजबूरी ये है कि अगर हम इस धंधे को छोड़ दें तो क्या करें. हमारे घर का दाना-पानी बंद हो जाएगा.


इस हमले की ख़बर तैय्यब को शनिवार रात में ही मिल गई थी और वो तभी दिल्ली के लिए चल दिए थे. रविवार की रात 8 बजे के आसपास कालकाजी पुलिस ने उनके बेटे समेत तीनों घायलों को ज़मानत पर रिहा किया जो पहने निज़ामुद्दीन दरगाह गए और उसके बाद अपने-अपने घरों को लौट गए.

 

 

First published: 24 April 2017, 11:49 IST
 
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